Uttarakhand News Portal

Uttar Pradesh

National

मनुष्य एक गलतियों का पुतला: हरदेव

देहरादून। मानव एक गलतियों का पुतला है, जिससे जाने-अनजाने में गलतियां होती रहती हैं। एक महान व्यक्ति वही कहलाता है, जो अपनी गलती मानकर सामने वाले से क्षमा मांग लें। ऐसे ही भाव आज निरंकारी सत्संग भवन, रेस्टकैम्प, देहरादून में क्षमा याचना दिवस पर आयोजित सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सन्त निरंकारी मण्डल, दिल्ली से पधारे विवेक मौजी ने सद्गुरू माता सविन्द्र हरदेव महाराज के पावन सन्देश को देते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि गुरूसिख सदैव गुरू का आधार लेता है। अपने अनुभव से ही हमें ज्ञान पर चलने की सिख मिलती है। गुरू के वचनों को केवल सुनना ही, बल्कि उन्हें अपने जीवन व आचरण में उतारना ही भक्ति है। ज्ञान प्रान्ति से पूर्व हमारा जीवन कैसा था और ज्ञान प्रान्ति के पश्चात हमारा जीवन कैसा है, यह विचार करने का विषय है। अगर गुरूसिख को ऐसा लगता है कि मेरे अच्छे कर्मो से ही मुझे ज्ञान प्रान्त हुआ, तो यह उनके मन की भूल है, बल्कि गुरू ने हम पर दया करके हमें इस ज्ञान से जोड़ा है। गुरूसिख जब खुद (अंहकार) से मुक्त हो गया, वही खुदा हो गया अर्थात उसी ने ही प्रभु परमात्मा को पा लिया। परमात्मा के अलावा सभी वस्तुयें जो हमें दिखायी देती है या जिन्हें हम महसूस करते है, वे सभी परिवर्तनशील और नाशवान है। यदि हम इन भौतिक वस्तुओं की ओर जुडाव रखेगे, तो इस निराकार से दूर हो जायेगें, परन्तु दुनियावी चीजों से जुड़े रहकर भी भक्ति कैसे की जाये, यही ज्ञान हमें गुरू ने प्रदान किया है। हमारी आत्मा को गुरू ने परमात्मा से जोड़ दिया है। गुरू कहता है कि तुम शरीर नही हो, लेकिन तुम शरीर में हो। दुनिया के भीतर रहकर ही इस निराकार का आसरा बना रहेगा, तो हमारे जीवन में सन्तुलन बना रहेगा। संसार का हिस्सा बनकर भी हमें इस निरंकार का हिस्सा बने रहते है। यह अवस्था तभी प्रान्त होगी, जब हमें गुरू से ज्ञान मिल जाये। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों संतों, भक्तों ने अपनी-अपनी भाषा का सहारा लेकर सत्संग को निहाल किया। मंच संचालन भगवत प्रसाद जोशी ने किया।
 
 

Update on: 01-01-2018

Himachal Pradesh

Current Articles