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धरने पर डटी आशा कार्यकत्री

 देहरादून। आशा कार्यकत्रियों ने परेड ग्राउंड में धरना मंगलवार को भी जारी रखा। इस दौरान उन्होंने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। संगठन से जुड़े कार्यकत्रियों ने कहा कि 25 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर परेड ग्राउंड स्थित धरनास्थल पर धरने पर बैठी है , सरकार उनकी मांगों को लेकर लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि आशा कार्यकत्रियों को अन्य स्कीम वर्करो आंगनबाड़ी , भोजन माताओं की भांति बोनस दिया जाय। आशा कार्यकत्रियों को राज्य में मात्र इंसेंटिव दिया जाता है

जबकि अन्य प्रान्तों में इंसेंटिव के साथ -साथ मानदेय भी दिया जाता है जैसे हरियाणा राज्य में 2000 रु मानदेय व इंसेंटिव , पश्चिमी बंगाल में 2000 मानदेय व इंसेंटिव , राजस्थान में 1800 रु$ मानदेय और केंद्र सरकार के बराबर इंसेंटिव दिया जाता है। केरल सरकार ने कुल 7500 रु$ मानदेय , तेलंगाना राज्य दुवारा 3500 रु$ मानदेय और राज्य का इंसेंटिव 3500 रु$ कुल 7000 रु$ प्रति माह दिया जाता है त्रिपुरा राज्य में जितना केंद्र सरकार इंसेंटिव देती है उतना ही राज्य सरकार मानदेय दे रही है जबकि केंद्र सरकार दुवारा जनवरी 2014 के आदेश में आशाओं का इंसेंटिव बढ़ाया गया है जो कम से कम 1000 रु$ प्रति माह बनता है इस लिये उत्तराखण्ड राज्य में कार्यरत आशाओं को उपरोक्त राज्यों की भाँति मानदेय के साथ - साथ इंसेंटिव भी दिया जाये। आशाओं का स्वास्थ्य बीमा किया जाये ताकि आशाओं को स्वास्थ्य लाभ और कार्य के दौरान मृत्यु होने पर बीमे की राशि आश्रितों को मिल सकें।

Update on: 10-10-2017

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