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शीतकाल के लिए हेमकुंड साहिब के कपाट बंद

 गोपेश्वर। राज्य के चमोली में बने सिक्खों के धर्मस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट मंगलवार को 4 महीने के लिए बंद कर दिए गए। मंगलवार दोपहर 1:30 बजे इन्हें बंद किया गया। इस दौरान 4 हजार से ज्यादा भक्त मौजूद रहे। बता दें भक्तों को यहां पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। श्रद्धालु करीब 19 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय कर यहां पहुंचते हैं। वहीं मंगलवार से चार महीने के लिए कपाट को बंद हो गए। इस दौरान चार हजार से अधिक श्रद्धालु  यहां मौजूद रहे। खास बात ये है कि हेमकुंड साहिब में यात्रियों को रहने की अनुमति भी नहीं होती है यहां मत्था टेकने के बाद यात्रियों को घांघरिया आना पड़ता है। हालांकि कपाट बंद होने के बाद हेमकुंड साहिब और घांघरिया में कोई भी नहीं रहता है। जानकारी के मुताबिक, गुरुद्वारा प्रबंधन यहां कपाट बंद के दौरान बस देखरेख के लिए आते जाते रहते हैं। घांघरिया से हेमकुंड साहिब तक 6 किलोमीटर मार्ग बेहद ऊंचाई भरा है। सिक्खों के प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट आज पूरे विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। वहीं चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के बाद सूबे की सरकार का सारा ध्यान सिक्खों के इस पवित्र धाम की यात्रा पर रहता है।

सिक्ख पंथ के जयकारों के बीच चार हजार से ज्यादा श्रद्धालु इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने जयकारे लगाए।  वहीं 15 हजार फुट से भी ज्यादा ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब तथा प्राचीन लोकपाल मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही यहां भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाता है। सेना व श्रद्धालुओं के सहयोग से यहां तमाम व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त किया जाता है। जून 2013 में सूबे में आई आपदा के दौरान हेमकुंड साहिब की यात्रा भी बुरी तरह प्रभावित हुई थी, लेकिन यात्रा एक बार फिर से वापस पटरी पर लौट आई है। अगर आप भविष्य में हेमकुंड आना चाहते हैं तो आ सकते हैं। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गोविंदघाट से करीब 21 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढऩे के बाद हेमकुंड साहिब तक पहुंचा जाता है। घांघरिया से हेमकुंड साहिब तक करीब छह किलोमीटर के बीच कई जगहों पर बर्फ को काटकर रास्ता बनाया जाता है। यही वो जगह है जहां गुरुगोविंद सिंह ने तपस्या की थी।

Update on: 10-10-2017

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