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पेंशन ना मिलने से परेशान रिटायर्ड कर्मचारी, बहाली के लिए उतरेंगे सड़कों पर

 शिमला। प्रदेश सरकार के उपक्रमों, यानी निगमों और बोर्डों से रिटायर हुए कर्मचारी पेंशन की बहाली के लिए अब आंदोलन की राह पकड़ने वाले हैं। प्रदेश में 2004 के बाद रिटायर हुए कर्मचारियों को कोई पेंशन नहीं दी जा रही है। पेंशनरों की मांग है कि उन्हें भी जल्द से जल्द पैंशन के दायरे में लाया जाए, और अगर सरकार उन्हें पेंशन की सुविधा नहीं देती है तो आंदोलन पर उतर आएंगे। कालीबाड़ी हाल में सोमवार को कॉरपोरेट पैंशनर समन्वय समिति के अधिवेशन में सरकार से फिर यह मुद्दा उठाने की बात कही गई। साथ ही यह निर्णय भी लिया गया कि यदि अब भी सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती तो आंदोलन शुरू कर देंगे।समन्वय समिति के समन्वयक गोविंद चतरांटा ने कहा कि जब कर्मचारियों या फिर पैंशनरों को लाभ देने की बात हो तो नौकरशाह खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हैं और जब इनकी अपनी बात हो तो वह स्थिति नहीं आती।

  यही नहीं जब माननीयों के वेतन या पेंशन बढ़ाने की बात हो तो भी कोई दिक्कत नहीं होती। उन्होंने कहा कि ऐसे में क्या खराब वित्तीय स्थिति केवल कर्मचारियों के लिए ही होती है।चतरांटा ने कहा कि राज्य में बोर्ड और निगम के 39072 रिटायर कर्मियों में से 32342 को पेंशन मिल रही है और केवल 6730 ही ऐसे बचे हैं, जो इससे महरूम हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा घाटे में बिजली बोर्ड है और उसके कर्मचारियों कों पेंशन मिल रही है। परिवहन निगम के कर्मचारियों को भी पेंशन दी जा रही है, लेकिन 20 बोर्ड-निगम ऐसे हैं, जिनके कर्मियों को यह लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने सरकार से मांग की कि पेंशन से वंचित कर्मचारियों को भी पेंशन जारी की जाए।

Update on: 04-09-2017

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