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जांच से पहले रेल हादसे की वजह आई सामने

 मुजफ्फरनगर । उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली में शनिवार शाम पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतरने से कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसी बीच हादसे से जुड़ा एक ऑडियो सामने आने से नया मोड आ गया है। इस ओडियो से बड़ा खुलासा हुआ है। इस ऑडियो क्लिप में घटनास्थल से कुछ दूरी पर तैनात गेटमैन और एक रेलवे कर्मचारी के बीच बातचीत हुई।

इस ओडियों में गेटमैन इस बात की पुष्टि करता है कि रेल पटरी पहले से टूटी पड़ी थी। मगर, उस पर सही से काम नहीं किया जा रहा था, जो पटरी काटी गई थी, उसे जोड़ा नहीं गया और ऐसे ही छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, वहां काम करने वाले कर्मचारी अपने मशीन भी वहीं छोडक़र चले गए। इसी ऑडियो क्लिप में आगे गेटमैन ने एक और बड़ा खुलासा किया है. गेटमैन ने बताया है कि शनिवार रात हुए हादसे से दो दिन पहले भी इस तरीके का मामला सामने आया था। गेटमैन के मुताबिक, घटनास्थल से कुछ दूरी पर ही 2 दिन पहले ही एक दूसरी पटरी टूटी हुई मिली थी। गेटमैन का कहना है कि तीन दिन तक उस तरफ कोई नहीं गया. गेटमैन के मुताबिक इस लाइन के 2 स्लीपर भी टूटे हुए मिले थे, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो पटरी काफी पहले टूट गई होगी. बावजूद इसके किसी ने उसकी सुध नहीं ली. हालांकि, ये गनीमत रही कि वहां से ट्रेन गुजरती रहीं और किसी हादसे का शिकार नहीं हुईं। गेटमैन ने बताया कि इस मामले में जेई को दिल्ली भी तलब किया गया था।

 

 गेटमैन कह रहा है कि पटरी जोड़ी नहीं गई थी और ट्रेन के आने का वक्त हो गया। ऐसे में सुरक्षा के लिए न कोई सिग्नल दिया गया और न ही लाल झंडा लगाया गया। गेटमैन ने साफ किया है कि पटरी पर काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं। उसका आरोप है कि कर्मचारी साइट पर आते हैं और बैठे रहते हैं। इतना ही नहीं इस शख्स का ये भी कहना है कि हाल ही में यहां नए जेई की नियुक्ति हुई है और पुराने कर्मचारी उनकी बात नहीं मानते हैं और मनमानी करते हैं। हादसे के बाद तुरंत ड्यूटी पर तैनात गैंगमैन, लोहार और जेई भाग गए और जेई ने अपना फोन बंद कर लिया। हालांकि इस ऑडियो क्लिप की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इतना साफ हो गया है कि जांच कर रहे अधिकारी भले ही अभी किसी नतीजे तक न पहुंच पाए हों, मगर ये ऑडियो रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही की गवाही दे रहा है। वहीं जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि घटनास्थल पर काम चल रहा था, इस ऑडियो से स्पष्ट हो गया कि वो बात किसी न किसी हद तक सच थी। उल्लेखनीय है कि जिस पटरी से कलिंग-उत्कल ट्रेन को गुजरना था, उस पर काम चल रहा था। ट्रेन को धीमी गति से गुजारने के आदेश थे लेकिन सिग्नल गड़बड़ होने से ड्राइवर को सूचना नहीं मिली और ट्रेन 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चलती रही, जिस वजह से पटरी उखड़ गई।

काम नहीं करते कर्मचारी
गेटमैन बातचीत में आगे बता रहा है कि पटरी पर काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं. उसका आरोप है कि कर्मचारी साइट पर आते हैं और बैठे रहते हैं। इतना ही नहीं इस शख्स का ये भी कहना है कि हाल ही में यहां नए जेई की नियुक्ति हुई है और पुराने कर्मचारी उनकी बात नहीं मानते हैं और मनमानी करते हैं। ये भी कहा गया है कि हादसे के बाद तुरंत ड्यूटी पर तैनात गैंगमैन, लोहार और जेई भाग गए और जेई ने अपना फोन बंद कर लिया।यानी जो लापरवाही की बात शुरुआती जांच में सामने आ रही थी, गेटमैन के इस ऑडियो क्लिप ने उसे और पुख्ता कर दिया है। हालांकि, इस ऑडियो क्लिप की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इतना साफ हो गया है कि हादसे की जांच कर रहे अधिकारी भले ही अभी किसी नतीजे तक न पहुंच पाए हों, मगर ये ऑडियो रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही की गवाही दे रहा है।

रेलवे अधिकारियों का विरोधाभासी बयान
उत्कल एक्सप्रेस का स्टॉपेज खतौली में नहीं है। ट्रेन करीब 105 ज्ञउची की रफ्तार से चल रही थी।स्टेशन पार करते ही ड्राइवर को किसी खतरे की आशंका हुई, जिसके बाद उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाया. इसी वजह से डिब्बे पटरी से उतरने की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक खतौली स्टेशन के सुपरिटेंडेंट राजेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी ट्रैक के रिपेयर होने की जानकारी नहीं थी. अगर कोई रिपेयर का काम होगा तो वो इंजीनियरिंग विभाग को पता होगा, लेकिन विभाग को ऐसी कोई जानकारी नहीं थी। इसके उलट मुजफ्फरनगर इंजीनियरिंग विभाग का कहना है कि ट्रैक पर काम चल रहा था। स्टेशन को बताया गया था कि ट्रैक असुरक्षित है। एक क्रैक प्लेट को ठीक करने के लिए 20 मिनट का समय मांगा गया था यानी 20 मिनट तक कोई ट्रेन वहां से ना गुजरे ये मांग की गई थी। हादसे के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को आदेश दिया है कि रविवार का दिन खत्म होने तक इस मामले में जवाबदेही तय कर दी जाए।

आठ समितियां दे चुकी है रेलवे को सुझाव
आजादी के बाद 1954 से अब तक कम से कम आठ समितियों की ओर से रेलवे सुरक्षा का प्रस्ताव दिया गया है लेकिन रिपोट्र्स में इस बात को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। साल 2011 में यूपीए सरकार ने रेल सुरक्षा पर अनिल काकोदकर समिति बनाई थी। इस समिति की ओर से अगले पांच वर्षों में एक लाख करोड़ रुपए खर्च करके रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। इस समिति के सिर्फ पांच प्रस्तावों को ही लागू किया गया। इस वर्ष के यूनियन बजट में साल 2017-2018 के लिए रेलवे में 1.3 लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव दिया गया है। बजट के मुताबिेक रेलवे मंत्रालय राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के तहत सुरक्षा राशि तय करेगा।

रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर करेंगे हादसे की जांच
रेलवे ने उत्कल एक्सप्रेस हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर ट्रेन दुघर्टना की जांच करेंगे। कहा जा रहा है कि देर शाम तक जांच रिपोर्ट सामने आएगी और हादसे का कारणों का खुलासा किया जाएगा।

Update on: 20-08-2017

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