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पर्यावरण संतुलन व आजीविका के लिए एग्रोफोरेस्ट्री महत्वपूर्ण

देहरादून। राजभवन में आयोजित टॉपर्स कान्क्लेव के तीसरे दिन के प्रथम सत्र में राज्यपाल डॉ$ कृष्ण कांत पाल की उपस्थिति में एफआरआई की निदेशक डॉ$ सविता ने ‘‘उत्ताराखण्ड के विशेष परिदृश्य में स्थानीय लोगों की आजीविका में वनों का महत्व’’ विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया। डॉ$ सविता ने कहा कि एग्रोफोरेस्ट्री (कृषि वानिकी) के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया जाना चाहिए। एग्रो फोरेस्ट्री से पर्यावरण संतुलन के लिए कार्बन फिक्सिंग में सहायता मिलेगी वहीं इन्हें अपनाने वाले लोगों को आय भी प्राप्त होगी। एग्रो फोरेस्ट्री में शीशम,, यूकेलिप्टस, पापलर, मेलिया आदि पौधों की अधिक उत्पादकता वाली किस्मेें, किसानो ंव ग्रामीणों को उपलब्ध करवानी होगी। 
   
 
 डॉ$ सविता ने कहा कि हिमालयी राज्यों में बांस भी आजीविका का एक अच्छा विकल्प है। प्रयास किया जा रहा है कि बांस की उम्र को बढ़ाया जा सके। साथ ही बांस से बने उत्पादों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। उाराखण्ड में ग्रामीण महिलाएं रिंगाल व निरगाल से  टोकरियां बनाकर आय प्रान्त कर रही हैं। मशरूम, औषधीय पौधों व फूलों की खेती भी आजीविका में सहायक हो सकते हैं। नेचुरल डाई, फाईबर, स्थानीय फलों पर आधारित कुटीर उद्योगों के माध्यम से भी ग्रामीणों को आजीवका प्राप्त हो सकती है। दूसरे सत्र मे दैनिक जीवनचर्या में आयुर्वेद के महत्व पर बोलते हुए प्रो0 अनुप कुमार ने कहा कि अन्न का मन पर सीधा प्रभाव होता है। हम जैसा भोजन करेंगे, हमारा स्वास्थ और व्यवहार भी उसके अनुकूल प्रतिबिम्बित होगा। आयुर्वेद का ज्ञान ऋषि मुनियों की दिव्य दृष्टि से उपजा ज्ञान है। उन्होंने व्यक्ति के दिनचर्या में पानी के प्रयोग पर विस्तृत जानकारी दी।
 
साथ ही व्यवस्थित खान-पान का एक स्वस्थ व्यक्ति के जीवन में कितना महत्व है, इसकी भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चरक संहिता में पांच सौ औषधीय पौधों का नाम बताया गया है इनमें से तीन सौ औषधीय पौधे, उत्तराखण्ड में उगाये जाते हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद बीमारी को शरीर में आने से रोक सकता है। डा$ कुमार ने दैनिक जीवन में घरेलू उपचारों के महत्व और उनके सकारात्मक प्रभाव पर भी विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। कान्क्लेव में छात्र-छात्राओं ने अनेक प्रश्न पूछे जिनका वक्ताओं द्वारा भलीभांति जवाब दिया गया। इसके बाद कान्क्लेव में प्रतिभाग कर रहे टॉपर्स को सेलाकुई स्थित सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट्स का भ्रमण कराया गया। 

Update on: 10-08-2017

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