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पंचायत प्रतिनिधियों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

देहरादून। नगर निगम द्वारा 65 ग्राम पंचायतों  के गांवों को अधिग्रहित कर सीमा विस्तार के विरोध में पंचायत प्रतिनिधियों ने त्रिस्तरीय पंचायत गांव बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश सरकार व नगर निगम को चेताने के लिए व इस प्रस्ताव को रदद किये जाने की मांग को लेकर शहीद स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना आज भी जारी और कहा कि अभी तक सरकार इस ओर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं कर पाई है जो चिंता का विषय है।
       समिति की संरक्षक व रायपुर ब्लॉक प्रमुख बीना बहुगुणा के नेतृत्व में सभी ग्राम पंचायतों के जन प्रतिनिधि शहीद स्थल पर इकटठा हुए और वहां पर उन्होंने नगर निगम की सीमा का विस्तार किये जाने वाले प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अनिश्चितकालीन धरने को जारी रखा।  इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सरकार व निगम ने शीघ्र ही ठोस कार्यवाही नहीं की गई तो सडक़ों पर उतरकर आंदोलन को तेज किया जायेगा।  उनका कहना है कि अब आर पार का आंदोलन किया जायेगा।

इस प्रस्ताव को रदद किये जाने की मांग को लेकर विधानसभा कूच भी किया जायेगा, इसके लिए शीइा्र ही तिथि घोषित की जायेगी। इसके लिए रणनीति तैयार की जायेगी। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री से वार्ता होने के बाद भी समस्याओं का अभी तक समाधान नहीं हो पाया है जिससे जन प्रतिनिधियों में रोष बना हुआ है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि समाज कल्याण विभाग की कल्याणकारी योजना का लाभ पात्र अभ्यर्थी की खुली बैठक के माध्यम से दिलाने का हक ग्राम पंचायतों के पास सुरक्षित है जिनमें वृद्घा पेंशन, विधवा, दिव्यांग पेंशन, गरीबों के लिए अटल आवास जैसी योजनाओं का लाभ सुपात्र लोगों को दिलाया जाता है। शौचालय का निर्माण, उज्जवला योजना के सुपात्र व्यक्ति को योजना का लाभ, ग्रामीण प्राानमंत्री आवास योजना, गोबर गैस प्लांट, पशुधन विकास, फल उत्पाद आदि कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाता है।
    

ग्राम के बुनियादी ढांचे का विकास, सडक़ निर्माण, खेल मैदान, पुलिया, पेयजल आपूर्ति, भूमि जल संरक्षण, नाली, खडंजा, सीसी निर्माण, स्ट्रीट लाइट लगाई जाती है। उनका कहना है कि केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा के तहत ग्रामीणों को सौ दिन का रोजगार प्रतिवर्ष दिलाया जाता है और स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों का स्तर पर कूडा उठाने का कार्य स्वयं ग्राम पंचायतों के द्वारा किया जाता है। ग्राम के सचिवालय में प्रतिदिन आम लोगों के लिए जन्म एवं मृत्यु प्रमाण प्रमाण पत्र आसानी से अपनी ही गांव में उपलब्ध कराया जाता है। उनका कहना है कि राशन कार्ड भी पंचायत घर में उपलब्ध कराया जाता है। ग्राम सभा में आंगनवाडी केन्द्र, पंचायतघर, आशा केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, पशु चिकित्सालय, सस्ता गल्ले की दुकान पर ग्राम पंचायत का नियंत्रण होता है, प्राइमरी व जूनियर हाई स्कूलों में समुचित रख रखा एवं मध्याहन भोजन पर निगरानी रखना मुख्य वजह है। ग्रामों में प्रदेश की सत्तर प्रतिशत आबादी गांव में निवास कर रही है जिससे किसानों का विकासखंड के माध्यम से बीज, खाद, कीटनाशक दवाई, कृषि उपकरण, फल व पौधों, दुग्ध डेरी की योजना का लाभ ग्रामीणों को दिलाया जाता है।

पंचायतों की भूमि का सीधा अधिकार ग्राम पंचायत के पास निहित है जिससे लेखपाल के माध्यम से  से पंचायत घर से जमीन संबंधी खसरा, खतौनी भी उपलब्ध कराई जाती है। पिछले वर्षो से सोलह पंचायतें नगर निगम में शामिल की गई और उनका कोई लाभ भी नहीं मिल पाया है जिस कारण से यह ग्राम पंचायतें न तो शहरी बन पाई और न ही गांव रहे। अपने ही नगर निगम में मूलभूत सुविधा प्रदान नहीं कर पा रहा है और अब फिर से 65 ग्राम पंचायतों को नगर निगम में मिलाने का प्रस्ताव लाया जा रहा है जिसका व्यापक स्तर पर विरोध किया जायेगा। इस अवसर पर धरने में बीना बहुगुणा, धनश्याम पाल, हेमा पुरोहित, मूलचन्द शीर्षवाल, प्रवीण पुरोहित, सुलेमान अंसारी, हरी प्रसाद भटट, शबनम थापा, राजेश परमार, शबनम थापा, पूजा नेगी, रश्मि पयाल,  विमलेश देवी, बलराज मित्तल, वीरेन्द्र कुमार, धनीमाला ठकुरी, अभिषेक पंत, राजेश कुमार आदि बैठे।
 

Update on: 17-06-2017

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