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क्यों महबूबा ने कहा, सिर्फ पीएम मोदी ही हमें दलदल से निकाल सकते हैं बाहर

नई दिल्ली। घाटी आज सुलग रही है। ऐसा पहली बार हुआ है जब राज्य में लोकसभा सीट के लिए हुए उप-चुनाव में सिर्फ साढ़े छह फीसद लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया हो। आज वहां की हालत ये हो चुकी है कि कहीं राजनेताओं को निशाना बनाकर उनकी हत्या की जा रही तो कहीं पुलिस और सुरक्षाबलों की पेट्रोलिंग पार्टी पर बम फेंके जा रहे हैं।
हालात इतने विस्फोटक हो चुके हैं कि इस दिशा में जल्द केन्द्र को गंभीरता से लेकर पहल करनी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो जिस तरह पिछले की महीने से लगातार हालात बिगड़ रहे हैं स्थिति बेहद नाजुक हो जाएगी। ऐसे में घाटी में बिगड़ते कानून व्यवस्था को संभालने में लगी सीएम महबूबा मुफ्ती के ऊपर पर एक बड़ी जम्मेदारी है।
महबूबा ने पीएम के बारे में क्या कहा
पिछले कई महीने से घाटी में भारी तनाव के बीच जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही वह शख्स है जो कश्मीर समस्या का समाधान कर हमें इस दलदल से बाहर निकाल सकते हैं। महबूबा ने कहा कि मोदी के पास देश की तरफ से मजबूत जनादेश हासिल हुआ है और वह जो भी फैसला करेंगे उसका पूरा मुल्क समर्थन करेगा। इतना ही नहीं, महबूबा ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 दिसंबर 2015 के लाहौर दौरे का जिक्र करते हुए उनके इस कदम की तारीफ भी की।
महबूबा की तारीफ के मायने
लेकिन, सवाल ये उठता है कि आखिर महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए ऐसा बयान क्यों दिया। वजह साफ है कि आज घाटी में स्थिति काफी बदतर हो चुकी है। एक तरफ जहां आए दिन वहां पर आतंकियों की तरफ से बैंकों को निशाना बनाया जा रहा है, कैश वैन लूटे जा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ घाटी सुलग रही है। वहां पर लोग जवानों को निशाना बनाने और उन पर पत्थर फेंकने से बाज नहीं आ रहे हैं। और यह सब इंटेलिजेंसी की रिपोर्ट में पता चला है कि सारा खेल सीमापार से कराया जा रहा है।

बुरहान वानी की मौत के बाद सुलग रही है घाटी
घाटी आज जिस हालात से गुजर रही है उसकी बड़ी वजह है हिज्बुल कमांडर बुरहानी वानी की सुरक्षाबलों के एनकाउंटर में मौत। बुरहान वानी की मौत ने अचानक पूरी घाटी को सुलगा कर रख दिया है। इसके बाद लगातार घाटी में लोग उग्र है। केन्द्र सरकार की तरफ से कई प्रयास किए गए लेकिन हालात को पूरी तरह से सामान्य करने में सफलता हाथ नहीं लग पाई है।

2015 और 2016 में रोज हुआ संघर्ष विराम का उल्लंघन
तनाव सिर्फ घाटी में ही नहीं है बल्कि भारत और पाकिस्तान की सीमा पर किस तरह की स्थिति विस्फोटक बन चुकी है इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि पिछले दो साल के दौरान कोई दिन ऐसा नहीं बिता जिस दिन संघर्ष विराम का उल्लंघन ना हुआ हो। पाकिस्तान की तरफ से रोज उकसावेपूर्ण कार्रवाई की जा रही है। एक आरटीआई के जवाब में गृह मंत्रालय ने बताया कि 2015 से 2016 के बीच जम्मू कश्मीर की नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान द्वारा हर दिन कम से कम एक बार सीजफायर के उल्लंघन का मामला सामने आया है। इन दो सालों में पाकिस्तानी सेना की इस करतूत से 23 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं।

5 साल में 1,142 आतंकी घटनाएं
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया है कि कि 2012 और 2016 के बीच जम्मू कश्मीर में 1,142 आतंकवादी घटनाएं हुईं जिनमें 236 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए जबकि 90 नागरिकों की मौत हुई। मंत्रालय ने आगे कहा इसी अवधि में मुठभेड़ों में 507 आतंकवादी भी मारे गए थे। आरटीआई से मिले जवाब के मुताबिक, 2016 में पाकिस्तान ने 449 बार सीजफायर का उल्लंघन किया जबकि इस मुकाबले साल 2015 में पाकिस्तान द्वारा 405 बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया था। इस दो साल की अवधि में 23 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

Update on: 08-05-2017

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