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रसोई गैस के लिए मारामारी पर उतरे उपभोक्ता

खटीमा। क्षेत्र में आये दिन रसोई गैस की किल्लत होने से उपभोक्ता खासे परेशान हैं। कई दिनों के इंतजार के बाद गैस पहुंचने पर चकरपुर में उपभोक्ताओं के बीच मारामारी मच गई। बमुश्किल गैस का वितरण किया जा सका।

रसोई गैस उपभोक्ताओं की तादात दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। शहर की तीनों गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एजेंसियां मांग के अनुरूप उपभोक्ताओं को आपूर्ति दे पाने में सक्षम नहीं हो पा रही हैं। इसके अलावा रसोई गैस के व्यावसायिक उपयोग व कालाबाजारी ने समस्या को और बढ़ा दिया है। प्रशासन व पूर्ति विभाग की कोशिशों के बाद भी कालाबाजारी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। खासकर, पर्वो के नजदीक आते ही कालाबाजारी बढ़ जाती है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से रसोई गैस की किल्लत हो जाती है। इधर ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। चकरपुर क्षेत्र में उपभोक्ता कई दिन से गैस का इंतजार कर रहे थे। गैस की गाड़ी पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में उपभोक्ता उमड़ पड़े। गैस लेने को उपभोक्ताओं के बीच खासी मारामारी मची रही। इस कारण कई बार अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। बड़ी मुश्किल से गैस का वितरण संभव हो पाया। उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसियों के मनमाने रुख के कारण आये दिन गैस का संकट पैदा हो रहा है। पूर्ति निरीक्षक केएस देव ने बताया कि कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखी जा रही है। ऐसा मामला पकड़ में आने पर कार्रवाई की जाएगी।

 

सरकार के फैसले जनता के हित में नहीं है: निशंक

देहरादून। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ0 रमेश पोखरियाल 'निशंकÓ जी ने मंगलवार को राज्य कैबिनेट द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। डॉ0 निशंक ने डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा पं0 दीनदयाल उपाध्याय के नाम से संचालित शिक्षण संस्थाओं का नाम बदलने, राज्य सरकार के अधीन संचालित चीनी मिलों को पीपीपी मोड पर संचालित करने संबंधी फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।

बुधवार शाम अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए डॉ0 निशंक ने राज्य सरकार के उक्त फैसलों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि डॉ0 श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने इस देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है और ऐसे देशभक्त के नाम से चल रहे शैक्षणिक संस्थानों से उनके नाम को हटाना इस देश के अमर शहीदों के बलिदान का घोर अपमान है।

वहीं पं0 दीनदयाल उपाध्याय संबद्घ विश्वविद्यालय का नाम बदले पर उन्होंने मौजूदा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने जिस तरह से पं0 दीनदयाल उपाध्याय के नाम की 'पट्टीÓ के उपर अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन के नाम की 'पट्टीÓ चिपकाई है, वह पं0 दीनदयाल उपाध्याय जैसे महापुरूष के साथ साथ श्रीदेव सुमन जैसे बलिदानी पुरूष का भी अपमान है। अगर सरकार सचमुच अमर शहीद श्रीदेव सुमन का सम्मान करना चाहती थी तो इस राज्य में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का संस्थान उनके नाम पर खोल सकती थी, लेकिन ये सरकार राज्य हित में रचनात्मक कार्य करने के बजाए नाम बदलने की राजनीति कर राज्य के लोगों का विश्वास खो रही है।
 
चीनी मिलों को पीपीपी मोड पर चलाने के सरकार के निर्णय के संबंध में कहते हुए डॉ0 निशंक ने कहा कि सरकार सिर्फ निजी कंपनियों के हित के लिए चीनी मिलों को निजी क्षेत्र में देने की बात कर रही है। सरकार को अपने कर्मचारियों के हितों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार में इतनी इच्छाशक्ति नहीं रह गई जो इन चीनी मिलों को संचालित कर सके?
 
डॉ0 निशंक ने कहा कि कांगे्रस ने हमेशा से इस राज्य में नाम बदलने की राजनीति की है। पहले राज्य का नाम बदला और अब संस्थानों के नाम बदलने में जुटी है। उन्होंने हिदायत दी कि नाम बदलने के बजाय यह सरकार अगर अपने काम करने का तरीका बदले तो राज्यहित में बेहतर होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उक्त सभी निर्णयों को जनहित में वापस नहीं लिया तो पार्टी सडक़ों पर उतर कर अपना विरोध दर्ज करेगी। 
 

The validity period of OBC Certificate will be now for three years instead of 6 months

Dehradun : The validity period of OBC Certificate will be now for three years instead of 6 months. Polytechnic Institutes, Engineering Colleges and Schools on CBSE pattern would be established on PPP mode in which 50 percent seats would be reserved for students of SC category.

Decisions to this effect were taken in a review meeting of Social Welfare and Minority Welfare Department chaired by Chief Minister Vijay Bahuguna at his residence on Wednesday. Chief Minister Bahuguna said that the benefits of all the welfare programs launched under Social Welfare Department should reach to the last person. He said that he would visit four Muslim dominated areas next month and review works undertaken in last 10 years in those areas. He directed Secretary Social Welfare to identify those four areas including one from Dehradun, two from Haridwar and one from Udham Singh Nagar.

 Mr. Bahuguna directed the officers to increase the validity period of OBC certificates to three years from existing six months. He said that one school each in Haridwar and Sitarganj would be opened on CBSE pattern on PPP mode with 50 percent reservation for the students of SC. Similar way, Engineering College and Polytechnic would be established in PPP mode with similar reservation provision. The schools run in Ashram system would have class 6 to 10 and run by Education Department. Class 1 to 5 would be abolished. Mr. Bahuguna said that camps would be organized to redress grievances of Van Gujjars in which presence of officers from all concerned departments would be mandatory. He directed the officers to ensure that pension disbursed by Social Welfare Department be directly credited in the bank accounts of the beneficiaries. He instructed all the departments to furnish reports in one month on the welfare schemes undertaken by them for SC and ST and the breakdowns of the amount spent on the schemes. 
 
Secretary, Social Welfare MH Khan apprised that process had been started for effective execution of Chief Minister Minority Self-employment Scheme launched to improve economic condition and encourage self-employment amongst Muslim youths. He said that loan would be provided for these schemes in low interest rate (6 percent) and 25 percent grant. Approval of Rs. 4.34 crore has been received for proposals of 65 madarshas from Minority Ministry which was due since a long time. 
 
 The meeting was attended by Social Welfare Minister Surendra Rakesh, Chief Secretary Alok Kumar Jain, Principal Secretary to CM DK Kotia, Principal Secretary Planning S Ramaswami, Secretary Tourism SS Sandhu and Secretary Finance Radha Raturi amongst others.
 

जल संस्थान की लापरवाही से कई गांवो के हलक सूखे

विकासनगर। भले ही इंद्रदेव मेहरबान हो, हर तरफ पानी ही पानी हो, लेकिन जल संस्थान की लापरवाही के चलते कई गांवों के लोगों के हलक सूख रहे हैं। पिछले वर्ष दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त नौ पाइप लाइनों की आज तक मरम्मत न होने से करीब 36 गांव व मजरों में पेयजल संकट बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से गुहार लगाई, किन्तु फिर भी पाइप लाइनें ठीक नहीं कराई गई। ग्रामीणों ने पेयजल मंत्री को पत्र भेजकर शीघ्र लाइनें ठीक कराने की मांग की है।

एक वर्ष पूर्व दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त मंगरौली, कोटा, जमरौली, मरलऊ, संवाई, माक्टी, कोटी, गांरौऊ, धातरी, व्यासमूंड गांव के नाम से बनी पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से 36 गांवों व मजरों में पेयजल संकट बना हुआ है। जल संस्थान ने इन लाइनों को ठीक कराने की आज तक जरूरत नहीं समझी।

कोटी निवासी मुकेश चौहान, राजेंद्र नेगी, खमरौली लाइन से जुड़े अरविंद चौहान, गंगा सिंह कहते हैं कि एक वर्ष से लाइनों की मरम्मत न होने से पेयजल संकट झेल रहे हैं। इस वर्ष दोबारा यह लाइन जगह जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। लोग बरसात के मौसम में गदेरों का पानी पीने के लिए विवश हैं। कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी लाइनों की मरम्मत नहीं की गई। उन्होंने पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को पत्र भेजकर लाइनें ठीक कराने की मांग की है।
 
उधर, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके उनियाल का कहना है कि अतिवृष्टि के चलते पिछले साल क्षतिग्रस्त नौ पेयजल लाइनों के रखरखाव के लिए दैवीय आपदा के तहत एस्टीमेट बनाकर भेजे गए थे, लेकिन धनराशि न मिलने के कारण लाइनों की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। 
 

चीनी मिलों पर किसानों का 155 करोड़ रुपये से अधिक बकाया

काशीपुर। गन्ना विभाग व चीनी मिलें नए पेराई सत्र की तैयारी में जुट गई हैं, लेकिन अभी चीनी मिलों पर किसानों का 155 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। चीनी मिलों को गन्ना आयुक्त कई बार हिदायत दे चुके हैं। इसके बावजूद चीनी मिलें किसानों का पूरा भुगतान करने को तैयार नहीं दिख रहीं। अभी तक केवल एक चीनी मिल ही किसानों को पूरा भुगतान कर सकी है।
 
प्रदेश की लक्सर चीनी मिल को छोड़ कर नौ चीनी मिलों पर किसानों का कुल 15590460 रुपये बकाया हैं। गन्ना चीनी आयुक्त कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि 16 अगस्त तक सहकारी क्षेत्र की चारों चीनी मिलों पर 6343.77 लाख रुपये बकाया हैं। इनमें सितारगंज चीनी मिल पर 1716.41 लाख, बाजपुर चीनी मिल पर 1801.41 लाख, गदरपुर चीनी मिल 1422.81 लाख व नादेही चीनी मिल पर 1403.14 लाख रुपये बकाया हैं। सरकारी क्षेत्र की दो चीनी मिलों पर 3338.86 लाख रुपये बकाया हैं। किच्छा चीनी मिल पर 1608.17 व डोईवाला चीनी मिल पर 1730.69 लाख रुपये बकाया हैं। निजी क्षेत्र की चार मिलों में एक लक्सर ने पूरा गन्ना मूल्य 21624.40 लाख रुपये भुगतान कर दिया है। अब काशीपुर चीनी मिल पर 2309.52, लिब्बरहेड़ी पर 2125.38 व इकबालपुर चीनी मिल पर 1472.93 लाख रुपये बकाया हैं।
 

साईबाबा के घर चोरो का धावा : बड़ी खबर

देहरादून। राजपुर क्षेत्र में स्थित सांई बाबा मंदिर से करोड़ों रूपए के जेवरात चोरी कर लिए गए हैं। समूचित पुलिस व्यवस्थाओं को लेकर अब लोगों का गुस्सा फूटने की कगार पर है। राजधानी के तमाम थाना क्षेत्रों में हालात बेकाबू हो चुके हैं। इस चोरी ने पूरे पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया। दर्जनों सेवादारों की मौजूदगी के बीच हुई चोरी के बाद आला अधिकारियों ने घटना स्थल का दौरा किया। चोरों ने मुख्य पूजा स्थल पर जमकर कहर मचाया और सांई बाबा पर चढे छत्र, जेवरात व चांदी के शेर लेकर चंपत हो गए। हैरानी की बात तो यह है कि पूजा स्थल पर लगाए गए सीसीटीवी मंदिर ने रात को ही बंद कर दिए थे, जिसे लेकर अब कई प्रकार की शंकाए भी जन्म लेने लगी हैं।
 
पुलिस शायद अभी इससे भी बड़े किसी हादसे की प्रतीक्षा कर ही है। इस बात सांई बाबा मंदिर भी चोर गिरोहों की चपेट में आ गया। आज सुबह चोरी की घटना के सामने आने के साथ ही सनसनी फैल गयी। अब तक बंद घरों एवं दुकानों के ताले तोडऩे वाले चोरों ने करोड़ों रूपए के माल की चोरी को अंजाम देकर पूरी पुलिस व्यवस्थाओं को ही कटघरे में ला खड़ा किया है। राजपुर थाना क्षेत्र में स्थित सांई बाबा मंदिर में रोज की तरह ही मंदिर के पुजारी हरे राम झा ने मंदिर के चौकीदार जयसूर्या को मुख्य पूजा स्थल के द्वार खोलने को कहा। आमतौर पर इन दरवाजों पर ताला रहता है लेकिन यहां के ताले भी टूटे हुए पाए गए। अंदर जाने पर पूजा स्थल का दृश्य देख कर दोनों लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गयी। पूजा स्थल पर सारा सामान बिखरा हुआ था जबकि सांई बाबा की मूर्ति पर चढे छत्र व अन्य जेवरात गायब थे। साथ ही यहां लगे चांदी के दो बड़े शेर भी चोर अपने साथ ले गए। पुजारी झा ने मंदिर के ट्रस्टी एवं राजपुर पुलिस को इस मामले की सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंची। निरीक्षण स्थल का मुआयना करने पर पता लगा कि चोरों ने पूजा स्थल में लगीं कांच की खिडक़ी का शीशा तोड़ा और अंदर प्रवेश करने के बाद करोड़ों रूपए के जेवरातों पर हाथ साफ कर दिया। 
 
मंदिर के पुजारी ने बताया कि रात की आरती के बाद मंदिर को रोज की ही तरह बंद कर दिया गया था। मंदिर में कुछ सेवादारों के अतिरिक्त पुजारी हरेराम झा भी रहते हैं। संभावना जताई जा रही है कि चोर मंदिर के पीछे बने नाले से ही होकर अंदर आए और पीछे की ओर से इन लोगों ने सांई मंदिर में चोरी की। दिन खुलते-खुलते सांई भक्तों को भी इस बड़ी चोरी का पता लगा तो कुछ ही देर में सैकड़ों की तादात मे लोग मंदिर आ गए। एसएसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मंदिर के सेवादारों से पूछताछ की। मंदिर में चोरी हुए माल की कीमत एक करोड़ रूपए से अधिक बताई जा रही है। इसमें सांई बाबा का सिंहासन, सोने का हार, सहित लगभग सौ किलो चांदी की चोरी की गयी है। पुलिस ने आज सुबह मंदिर के पीछे नाले एवं जंगल में भी जांच पड़ताल की लेकिन यहां से कोई खास सुराग नहीं मिल पाया। सांई मंदिर में हुई इस चोरी से सांई भक्तों में राजपुर पुलिस के प्रति भी गुस्सा देखा गया। अधिकारियों ने किसी तरह से लोगों को शांत कर जल्द से जल्द घटना का खुलासा करने का आश्वासन दिया है। 
 
वहीं पुलिस ने मंदिर में लगे सीसीटीवी के फुटेज मंदिर प्रशासन से उपलब्ध कराने को कहा तो प्रबंधन के जवाब से पुलिस भी हतप्रभ रह गयी। पुजारी ने बताया कि रात की आरती के बाद मंदिर को बंद कर दिया जाता है। रात को बाबा को सुला दिया जाता है जिस कारण मुख्य पूजा स्थल की बत्तियां भी बंदकर दी जाती हैं। लाईटें बंद कर देने के कारण सीसीटीवी कैमरे भी बंद हो जाते हैं। मंदिर प्रशासन की यह लापरवाही अब पुलिस के भी गले नहीं उतर रही है। जिस प्रकार से चोरी को अंजाम दिया गया है और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी ऐसे में मंदिर के सेवादारों से भी पुलिस पूछताछ करने जा रही है।
 

पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या घट रही है

देहरादून। पूरे देश में लिंगानुपात घट रहा है, यानी पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या घट रही है। उत्तराखंड के पहाड़ी जिले दो दशक पूर्व तक इस समस्या से अछूते थे, लेकिन अब यहां भी हालात बदल रहे हैं, यूं कहें कि खतरनाक हो रहे हैं। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पिछले दो दशकों में प्रति हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 18.2 प्रतिशत कम हो गई है। यही हाल रहा तो दुल्हनें ढूंढने से भी नहीं मिलेंगी। नब्बे के दशक तक पहाड़ पर लिंगानुपात कोई समस्या नहीं थी। बालिकाओं की संख्या बालकों के लगभग बराबर ही रही। 1991 की जनगणना में पहली बार बालिकाओं की संख्या में कमी सामने आई। तब प्रति हजार बालकों पर 36 बालिकाएं कम थीं, लेकिन यह स्थिति बहुत गंभीर नहीं मानी गई। हालांकि तब भी समाज विज्ञानियों ने खतरे का इशारा कर दिया था, लेकिन सरकार की ओर सेे कोई पहल नहीं हुई। परिणाम 2001 की जनगणना में सामने आ गया। इस वर्ष बालिकाओं की संख्या गिरकर 902 पर पहुंच गई, यानी लिंगानुपात का अंतर 36 से बढक़र 89 हो गया। तमाम संगठनों ने चिंताएं जताई, इसके लिए कन्या भ्रूण हत्या को कारण मानते हुए रोकथाम के लिए सख्त कानून बनाए जाने की मांग उठी, लेकिन सरकार सोई ही रही। 2011 में सामने आए जनगणना के आंकड़ों ने भयावह होती स्थिति की तस्वीर सामने रख दी। अब सीमांत जिले में प्रति हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या मात्र 812 रह गई है। लिंगानुपात में 188 का अंतर आ गया है। दस वर्षो में ही लिंगानुपात का अंतर दोगुने से भी अधिक हो गया है। यही हाल रहा तो अगली जनगणना तक तस्वीर क्या होगी इसका अंदाज लगाया जा सकता है।

नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ छात्रो ने की आवाज बुलंद

डोईवाला। डोईवाला क्षेत्र में नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्र संघ कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों ने नशे के खिलाफ जन जागरूकता रैली निकाली। साथ ही ब्लॉक मुख्यालय में प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को ज्ञापन भी भेजा।
मंगलवार को छात्र संघ अध्यक्ष प्रकाश कोठारी के नेतृत्व में डिग्री कॉलेज, पब्लिक इंटर कॉलेज, सरस्वती विद्या मंदिर, होली एंजिल स्कूल, माजरीग्रांट, संगम स्कूल, दून पब्लिक स्कूल, डोईवाला, भानियावाला आदि क्षेत्रों के स्कूलों के छात्रों ने रैली निकाली। रैली को डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. हर्षवंती बिष्ट ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जन जागरूकता रैली नगर क्षेत्र से होती हुई ब्लॉक मुख्यालय पहुंची। यहां रैली प्रदर्शन के बाद सभा में तब्दील हो गई। इस दौरान रैली संयोजक प्रकाश कोठारी ने कहा कि क्षेत्र में नशे के खिलाफ युवा पीढ़ी को खुद जागरूक होकर आगे आना होगा। राहुल कुमार, ललित पंत ने कहा कि क्षेत्र में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ शासन-प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। परिषद कार्यकर्ता पंकज शर्मा, सोनू गोयल, रश्मि, रविंद्र बेलवाल, बलजीत सिंह ने कहा कि नशे से युवा पीढ़ी का भविष्य नष्ट हो रहा है।
 
रैली में में हिमांशु राणा, कविता, आरती, सोनम राणा, सुशील ममंगाई, अजय पुंडीर, अनुराग गोयल, कोमल कठैत, अमित कुकरेती, नरेश रावत आदि उपस्थित थे।
 

Several important decisions taken by CM Bahuguna; approved by the cabinet

Dehradun : The Cabinet on Tuesday approved several decisions taken by the Chief Minister Vijay Bahuguna during departmental review meeting. Several other decisions were also taken on the issues pertaining to public interest.

Significant enhancement had been made in the honorarium paid to the doctors and dentists. As per the decision, the honorarium of general doctors had been increased to Rs. 48,000 for easily accessible places, Rs. 52,000 for Diploma holders and Rs. 55,000 for PG Specialists. For doctors serving in difficult places, honorarium has been increased to Rs. 52,000 for general doctors, Rs. 56,000 for diploma holders and Rs. 59,000 for PG Specialists. For very difficult places, general doctors would now get Rs. 56, 000, diploma holders would get Rs. 60,000 and PG Specialists, Rs. 63,000. The contract period for doctors has been increased to three years from existing one year Now the contract would be renewed on Ministerial level every year, while, Cabinet approval has to be taken every three year. 

The age limit for general category in government service has been increased to 40 years from existing 35 years. The age relaxation would be given to other categories as per the earlier norms. The PPP Policy in the State was passed in 2012 and an Empowered Group of Ministers has been constituted to be chaired by the Chief Minister which could sanction the proposal upto the limit of Rs. 250 crore. Besides CM, Finance Minister, Planning Minister, Urban Development Minister, PWD Minister, other ministers nominated by the CM and respective departmental ministers would be its Members. In addition, an Empowered Committee has also been constituted under the chairmanship of Chief Secretary which would conduct preliminary review of the proposals. Any proposal exceeding Rs. 250 would be approved by the Cabinet.
 
Amendment has been made Uttarakhand Government preliminary Education Service Rules according to which now the recruitment of assistant teachers in primary school would be done on the basis of Block Cadre. After promotion their respective district would be their main cadre.
 
The Cabinet also approved the proposals of Tanakpur-Pyrnagiri and Jankipatti-Yamunotri Ropeways, while, to promote River Rafting, the Beach Camping Policy too was given a nod. The allocation period would be five years. The allocation within one hectare would be given only to the local residents, while allocation beyond it would be given on the basis of tenders. The currently engaged firm would have first right of refusal.
 
Deen Dayal Upadhyaya Affiliation University would be rechristened Sridev Suman Affiliation University.
 
Three amendments had been made in Van Panchayat Regulation including 50 percent reservation for women in Sarpanch post, priority to water and soil conservation and power to District Magistrate to extend the tenure of Van Panchayats for three months.
The cabinet endorsed recommendations made by National Sugar Federation to close down Gadarpur Sugar Mill. The workers employed in this Sugar Mills would be reinstated in other mills or given option of Voluntary Retirement Scheme (VRS) on better conditions. The land of Gadarpur Sugar Mill would be transferred to SIDCUL and the amount received in lieu of land would be utilized to pay the dues of farmers. As 90 percent of Sugarcane farming field had finished it was not viable to run the Mill further. Decision was also taken to run Doiwala, Sitarganj, Nadehi and Kichchha sugar mills in PPP mode for long period.
 
Names of five Shyamaprasad Mukherjee Navodaya Vidyalaya at Uttarkashi, Chamoli, Rudraprayag, Udham Singh Nagar and Bageshwar would be reverted to Rajiv Gandhi Navodaya Vidyalaya. These schools would be run on PPP mode and 50 percent of students would comprise of those selected by the State Government. These students would be given free education.
 
The contract period of super specialist doctors has been renewed for three years on completion of their present contract period.
The Cabinet also approved Uttarakhand Flood Plain Zoning Bill 2012. Through this Bill the construction works in flood prone areas would be restricted as per the guidelines of Government of India.
 
The Cabinet also approved in-principal the joint multi-purpose Pancheshwar project of India and Nepal. As some areas of Pithoragarh were included in this 2800 MW project, the State Government has expressed its consent in the project to be constructed in Mahakali River.
 
Making amendment in Section 39 of Procurement Rules, the limit of works carried out on the basis of Work Order has been increased to Rs. 3 lakh from existing Rs. 2 lakh.
 
The 13.5 percent VAT imposed on Rubber Process Oil has been reduced to 5 percent.
 
The Hindu Marriage Registration fee has been increased to Rs. 100 from Rs. 4. It may be noted that no increment was made in it since 1973. 
 
Making improvement in Uttarakhand motor Vehicle Taxation Reform Bill, the diversity in vehicle tax has been scrapped. The Tax on vehicles used in plying students would also be reduced.
 
Uttarakhand Transport and Civic Infrastructure Cess Bill has been passed to levy sub-cess on vehicle with registration of other states entering the State. Now Rs. 40 to 60 would be charged from public vehicles and Rs 20 to 60 from private vehicles. 
Uttarakhand Motor Vehicle Taxation Reform Rules has been made for E-payment in Transport Department.
 
Nod has also been given to Uttarakhand State Consumer Commission.
 
Externally aided Integrated Livelihood Support Project (IFED sponsored) has been extended till 2018-19 from 2012 in which total investment limit would be Rs. 793 crore. The working area of this project run for skill development of local unemployed youths has been extended to 30 development blocks from 17. 
 
The approval has been given for Uttarakhand Departmental Promotion Committee for posts outside Public Service Commission. The Committee would comprise of Departmental Head/Appointment Officer as its Head, Additional Departmental Head as its Member and two nominated gazette officers as other Members.
 
Amendment has been made in the direct recruitment process for Group C. Now the applicants would have to appear only in general knowledge test for short-listing for interview. 
 
The Cabinet took several decisions for the welfare of journalists. The experience required to obtain affiliation for Working Journalists has been reduced to 5 years from 10 years. The outright grace amount has been increased to Rs. 2 lakh from existing Rs. 50,000. Now there would be separate provisions for medical, health and reimbursement. 
 

अखिल भारतीय किसान महासभा ने जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया

धारचूला : अखिल भारतीय किसान महासभा की बजानी इकाई ने नहर, पानी, पैदल रास्ता, मनगरेगा में रोजगार दिये जाने की मांग को लेकर धारचूला में जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। महासभा के बैनर तले किसानों ने दो घण्टें उपजिलाधिकारी कार्यालय के आगे धरना दिया। 20 दिन में समुचित कार्यवाही का आश्वासन एसडीएम के द्वारा दिये जाने के बाद धरना स्थगित किया गया। 

बजानी से कालिका तक सात किमी तक पैदल यात्रा करने के बाद कालिका में जमा होने के बाद किसान महासभा के कार्यकर्ता धारचूला के अनवार चैक तक पहुंचे। अनवार चैक से एसडीएम कार्यालय तक जुलूस निकाल कर प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन तथा विधायक व सांसाद के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उपजिलाधिकारी कार्यालय पर हुए धरना प्रदर्शन में बोलते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा ब्लाॅक कार्यकारिणी सदस्य किशन सिंह कुँवर ने कहा कि बजानी नहर को चालू किये जाने, कालिका से बजानी तक सम्पर्क मार्ग को पक्का किये जाने व गाँव को सड़क सुविधा से जोड़ने, बजानी में पेयजल व्यवस्था को सुचारू किये जाने व मनरेगा में व्याप्त अनियमिताओं के लिए बार बार प्रशासन एवं सरकार से मांग की जा रही है लेकिन प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस उपेक्षा के कारण ही ग्राम पंचायत के लोग आज तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।  के प्रदेश सचिव कामरेड जगत मर्तोलिया ने कहा कि स्थानीय सांसद एवं विधायक जनसरोकारों के मामलों में नक्कारे साबित हुए हैं। राज्य व केन्द्र में सरकारें होने के बाद भी समस्याऐं जस की तस पड़ी हैं और भाजपा मित्र विपक्ष की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता के सामने स्थानीय सांसद एवं विधायक के निक्कमेपन से परिचित हो गयी है। 

इस अवसर पर एक ज्ञापन भी उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार को सौंपा गया। उपजिलाधिकारी ने आन्दोलनकारियों को आश्वासन दिया कि 15 दिनों के अन्दर ही उक्त समस्याओं पर कार्यावाही कर दी जायेगी। उपजिलाधिकारी से मिले आवश्वासन को देखते हुए धरना प्रदर्शन 20 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया। 
 
इस अवर पर हर सिंह गण्डी, उत्तम सिंह, रघुवीर सिंह, महेन्द्र सिंह, भवान सिंह, रेवती देवी, मोहन सिंह गण्डी, मधु, बहादुर सिंह समेत किसान महासभा के दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे। 
 

Concrete proposal to be made to establish better, efficient transport service in State

Dehradun : Finance Minister Indira Hridyesh on Tuesday said that a concrete proposal would be made on the model of Tamil Nadu and Himachal Pradesh to establish a better and efficient transport service in the state.

 
Ms Hridyesh was chairing a meeting in her office here to discuss the ways and means to make the transport system better and safe in the state, especially in the hill regions, including purchase of new buses for Uttarakhand Parivahan Nigam (Uttarakhand Transport Corporation).
 
Ms Hridyesh stressed that the old and run-down buses should be immediately removed from the fleet and replaced by new buses to curb the incidence of mishaps caused due to faulty vehicles.
 
Speaking at the meeting, Transport Minister Surendra Rakesh referred to his recent visit to Australia and stressed that like in Australia, Uttarakhand must also provide transport at hill regions as essential service for the public welfare, irrespective of whether it was running in loss or profit.
He said that 600 buses were needed to provide smooth services in hill areas. At present the state transport corporation has a fleet of 1127 buses out of which 473 were being run in hills and 654 buses were plying in plains.
 
He said that in 2011-12 the Corporation earned Rs 264.74 crore while the expenditure was Rs 289.94 crore and expected that the Rs 25 crore annual loss incurred to run the buses in hill region should be borne by the state government.
 
Secretary Transport, Umakant Panwar briefed the meeting regarding the strategy to minimize the losses of the Corporation. The meeting also discussed the possibility of the state government helping the Corporation to overcome its losses and also bearing the expense of purchase of new buses.
 
Finance Minister Hridyesh directed the officials concerned to make a proposal based on the suggestions made in the meeting. A number of Uttarakhand Transport Corporation officials, including Managing Director MC Upreti were present in the meeting.

भारी पड़ रही प्रकृति के साथ छेड़ छाड़

गोपेश्वर। प्रकृति के साथ मानव द्वारा निरन्तर की जा रही छेड़-छाड़ भविष्य में क्या रूप लेगी और इसका परिणाम कितना भयावह होगा , इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है । विशेषरूप से पहाड़ी जिलों के लिये यह एक यक्षप्रश्न है और इस पर व्यापक स्तर पर चर्चा किये जाने की आवश्यकता है । हम जमीन , जंगल और पानी के साथ जो छेड़-छाड़ कर रहे हैं , वह अत्यन्त ही घातक है और इसके दुष्परिणाम भयानक रूप में सामने आ रहे हैं । उत्तरकाशी हो अथवा चमोली या पिथौरागढ़ विशेषरूप से सभी सीमान्त/ पहाड़ी जनपद भौगोलिक दृष्टि से अति-संवेदनशील हैं और हर बरसात इन जिलों के निवासियों के लिये कुछ न कुछ आपदा लेकर ही आती है । जब तक एक क्षेत्र आपदा से हुये भारी नुकसान से कुछ उबर पाता है , कि दूसरा क्षेत्र उसका ग्रास बन जाता है । सीस्मिक जोन -5 में स्थित होने के कारण वैसे भी भारी भूकम्प की आशंका निरन्तर ही बनी रहती है । कुल मिलाकर यह कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिये कि प्रत्येक वर्ष के चौमास में यहां के निवासी दैवी आपदाओं के प्रकोप की आशंका से इतने भयभीत रहते हैं कि वे रात दो घण्टे भी चैन की नींद नहीं ले पाते हैं । अप्रत्याशित दैवीय आपदा की आशंका एवं भय के साये में जीना उनकी नियति बन गई है । इनकी इस पीड़ा को समझना होगा और इसका हल ढूंढना न केवल आवश्यक है , ूल्कि अपरिहार्य है । 
 
दैवीय आपदा से प्रभावित जिन गांवों का विस्थापन किया जाना अपरिहार्य बताया गया है , हम 8-10 साल से उन्हें ही विस्थापित नहीं कर पाये हैं जबकि विस्थापन के लिये नित नये गांव सूची में जुड़ते जा रहे हैं ।  इस बारे में राज्य सरकार और जिला प्रशासन को बहुत ही संवेदनशील होने की जरूरत है तभी आपदा से प्रभावित इन लोगों की पीड़ा कम की जा सकती है । जन- धन की हानि का सवाल है और ऐसे में इस काम में थोड़ी भी देरी करना उनकी पीड़ा को कम करने के बजाय हम और बढ़ा रहे हैं । 
 
सबसे नवीनत्तम घटनायें  उत्तरकाशी और चमोली जनपदों की है , जिसको देखने और प्रभावित ग्रामीणों की व्यथा सुनकर रूह कांप उठती है । घर उजड़ गये , अपने प्रियजनों को खो चुके , ये लोग कितने अकेले और हताश एवं निराश दिखते हैं । यह सही है कि यह दैवी घटनायें हैं और इनको रोक पाना मानव के हाथ में नहीं है , लेकिन इनसे होने वाले नुकशान को कम करने के लिये राहत और बचाव कार्यो के लिये इसप्रकार की टीमें हर क्षेत्र में होनी चाहिये , जो इस कार्य में प्रशिक्षित एवं निपुण हों । राज्य आपदा प्रबन्धन की ओर से दावे तो काफी किये जाते हैं कि इसके लिये काफी काम हो रहा है , लेकिन धरातल पर जब चुनौती आन पड़ती है , तब उनके आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबन्धन की पोल खुलती है । यहां तक कि प्रदेश के आपदा प्रबन्धन मंत्री जी को चमोली में घटित एक दैवीय आपदा से सम्बन्धित घटना की लगभग डेढ़ माह बाद याद आती है । ऐसे में हम क्या प्रभावित परिवारों के जख्मों पर मरहम लगा पायेगें ? 
 
यह संकट की ऐसी घड़ी है , जब सभी राजनैतिक दलों को एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के बजाय आपसी मन-मुटाओं , विरोधी विचारों को दर-किनार करते हुये इस राजनैनिक दलदल से ऊपर उठकर एक स्वर एवं एक मन से पीडि़त परिवारों की सहायता के लिये हाथ बटाना चाहिये । साथ ही न केवल सरकार अपितु सभी समाजसेवा में लगी गैरसरकारी संस्थाओं ( एनजीओ ) , समाजसेवियों , धनाड्यों और बुध्दिजीवीवर्ग को आगे आकर कुछ ऐसा करना होगा , जो दैवीय आपदाओं से ग्रसित क्षेत्रों के लोगों में उत्पन्न पीड़ा को कम कर सके और उन्हें ऐसा अहसास न होने दें कि वे इस दैवी जंग में अकेले हैं । उन्हें भरोसा दिलाने की आवश्यकता है कि हम हर पल और हर संकट में उनके साथ हैं । अपनी सामथ्र्य के अनुसार नैतिक और आर्थिकरूप से उन्हें जितना समर्थन एवं सहायता हम दे सकें , दें । यद्यपि हमारी ओर से यह सहायता पूर्णरूप से नि:स्वार्थ एवं इंसानियत की हैसियत से की जानी चाहिये, तथापि हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिये कि जो निराशा और हताशा आज उनमें है , कौन जाने कल हमारे सामने भी आ खड़ी हो , क्योंकि दैवी आपदाओं के लिये छोटा -बड़ा, अमीर-गरीब , शिक्षित - अशिक्षित , हिन्दू - मुसलमान- सिक्ख - ईसाई सभी एक समान हैं । 
 
इसके अलावा क्षेत्रीय विकास , अपने भौतिक सुख- सुविधाओं एवं अन्य हितों के लिये प्रकृति के साथ जो छेड़छाड़ हम कर रहे हैं , वह न्यूनत्तम हों, इस सम्बन्ध में गम्भीरता से विचार करना होगा । बिना तकनीकी जानकारी के खनिजों का खनन करना और खनन के बाद बने गढ्ढों को ऐसे ही छोड़ देना , यह देखे बिना कि जिस स्थान से खनन हो रहा है , उससे जो कैविटी बन रही है , वह भविष्य में भूस्खलन का रूप लेगी  , छुद्र राजनैतिक लाभ के लिये मोटर मार्गो के निर्माण में सहज एवं उपलब्ध समरेखण होने के बावजूद घने जंगलों के बीच से मोटर मार्ग का निर्माण करने के लिये हजारों की संख्या में पेड़ों का पातन करना और भूस्खलन के लिये संवेदनशील क्षेत्रों - स्थानों से होकर मार्ग के लिये भारी कटिंग कर देना , बिना कुछ  देखे , भारी चट्टानों के नीचे , सूखे बरसाती नालों के किनारे , बड़ी - बड़ी नदियों के निकट और ऐसे स्थानों पर जहां पर पूर्व में भी दुर्घटनायें हो चुकी हैं , मकानों का भारी संख्या में निर्माण करके पूरी बस्ती का रूप दे देना , सीमित क्षेत्रान्तर्गत काफी संख्या में क्रांक्रीट - सीमेंट के तीन-तीन एवं यहां तक चार-चार मंजिली मकानों का बनाया जाना , मकानों के लिये ड्रेनेज की व्यवस्था न करना , मोटर मार्गो एवं अन्य मार्गो के किनारे नालियों और स्कपरों का निर्माण न करना , मार्गो के किनारे की नालियों में कूड़ा- करकट फेंक कर उन्हें अवरूध्द कर देना और उनकी निरन्तर सफाई न करना , ये सभी ऐसी मानव-भूलें और दुष्कृत्य हैं , जो भविष्य में दैवीय आपदाओं को आमंत्रण देते हैं और सैकड़ों निरपराध लोगों का जीवन तबाह कर देती हैं । यद्यपि राष्ट्रीय , राज्य एवं जनपद स्तरों पर दैवी आपदा प्रबन्धन प्राधिकरणों का गठन किया गया है , लेकिन इन प्राधिकरणों की सक्रियता केवल दैवी आपदायें घटित होने के बाद ही देखी गई हैं जबकि इन्हें पूरे वर्षभर सक्रिय रहते हुये कुछ ऐसे सकारात्मक कदम उठाने चाहिये , जिससे उनके अस्तित्व का बोध भी हो सके । इन्हें इस बारे में गहन अध्ययन करके ऐसे सुझाव भी देने चाहिये , जिससे आपदाओं को न्यूनत्तम किया जा सके । वैसे तो दैवी आपदाओं को रोक पाना मानव के सामथ्र्य में नहीं है , लेकिन दैवी आपदाओं के लिये जिम्मेदार सभी मानव-निर्मित कारकों की पुनरावृति को बन्द कर उसे काफी कम करना तो मानव-सामथ्र्य में है ही । इसलिये इन कारकों को विशेषरूप से ध्यान में रख कर सरकारों को जन- जागरण करने के साथ - साथ कानून बनाये जाने पर भी गहराई से सोचना होगा , ताकि ऐसे समस्त कार्यो पर रोक लग सके , जो आपदाओं को दावत देते हैं । 
 

मूसलाधार वर्षा से ठप्प हुआ सडक़ चौड़ीकरण का कार्य

जोशीमठ। लगातार मूसलाधार वर्षा व नदी-नालों मे ऊ फान के कारण नीतीघाटी मे कई स्थानों पर सडक़ ध्वस्त हो गई है। उधर दो वर्ष से मलारी-नीती मोटर मार्ग को वन विभाग से संस्तुति ना मिलने के कारण चौडीकरण का कार्य भी बाधित है।

भारी बारिश के चलते भारत-तिब्बत चीन सीमा को जोडऩे वाला एक मात्र मोटर मार्ग जोशीमठ-सुमना व मलारी-नीती कई स्थानों पर पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। हांलाकि बीआरओ ने वाहनों की आवाजाही के लिए मार्ग को खोला हुआ है, लेकिन न केवल सडक़ के निर्माणाधीन स्थानों ब्लकि पूरी तरह बन चुकी सडक़ों को भी भारी नुकसान हुआ है। इस मोटर मार्ग के सराईथोटा क्षेत्र मे ही दो स्थानों पर करीब 01 किमी0 नई बनी सडक़ पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। उधर सपंर्क करने पर जोशीमठ-मलारी मोटर मार्ग की देख-रेख कर रहे बीआरओ की 12 सडक़ निर्माण कंपनी के कमान अधिकारी मेजर आरडी धुरी ने बताया कि क्षेत्र मे तमक, जुम्मा व तोलमा नालों के अचानक ऊ फान से सडक़ कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुई है, जिसकी मरम्मत व अन्य कार्यो के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है।

उधर दो वर्ष पूर्व मलारी-नीती 20 किमी0 मोटर मार्ग लोनिवि से बीआरओ को हस्तांतरित हुआ था, लेकिन वन विभाग से संस्तुति ना मिल पाने के कारण बीआरओ इसका चौडीकरण नही कर पा रहा है। इस संबध मे बीआरओ के कमान अधिकारी मेजर आरडी धुरी का कहना है कि हस्तांतरण के बाद से ही वन विभाग से स्वीकृत के लिए पत्रावली भेजी गई है, वन अधिनियम से संस्तुति मिलने के बाद ही बीआरओ चौडीकरण व डामरीकरण का कार्य शुरू कर सकेगा। गौरतलब है कि पडोसी देश चीन ने जहां तिब्बत-चीन सीमा तक न केवल सडक़ों का बल्कि रेल नेटवर्क का जाल भी बिछा चुका है वहीं भारत की ओर से सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण सीमा तक सडक पंहचाने के लिए दो वर्षो से वन अधिनियम के तहत स्वीकृत ही नहीं मिल सकी है। 
 

अस्थाई इंतजामों की नाजुक पटरी पर दौड़ रहा उत्तरकाशी

उत्तरकाशी।  बाढ़ से हुई तबाही ने उत्तरकाशी का भूगोल बदल कर रख दिया। फिलहाल पूरा शहर 17 दिन से अस्थाई इंतजामों की नाजुक पटरी पर दौड़ रहा है। ये इंतजाम भी अगर दम तोड़ गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं। बाढ़ में बचे जोशियाड़ा मोटर पुल, जर्जर ताबाखाणी सुरंग व लंबगाव मोटर मार्ग ऐसे ही अस्थाई इंतजाम हैं, जिन पर आजकल क्षमता से कहीं अधिक दबाव आ गया है। ऐसे में समय रहते ऐसे इंतजामों को ठोस आकार देने की जरूरत महसूस की जा रही है। तीन अगस्त की रात्रि में भागीरथी की बाढ़ से तिलोथ पुल और झूला पुल ढह गए। इससे जिला मुख्यालय और जोशियाड़ा, लदाड़ी, कुटेटी, तिलोथ व माडों आदि गावों के लिए जोशियाड़ा मोटर पुल ही आवाजाही का एकमात्र जरिया बच गया है।

बी ग्रेड की भार वाहन क्षमता का यह पुल लंबे समय से अपनी क्षमता से कहीं अधिक बोझ ढो रहा है। 0 वर्ष से अधिक पुराने इस पुल की मरम्मत भी लोनिवि ने लंबे समय से नहीं की। इसके चलते यह पुल बेहद जर्जर हालत में है और इसके दोनों ओर की डेकिंग काफी कमजोर हो चली है। लगातार यातायात के दबाव के कारण इस पुल को नुकसान पहुंचने की आशका है। गंगोत्री हाईवे पर ताबाखाणी सुरंग की हालत इससे अधिक खराब है। समय रहते इस सुरंग को अंतिम रूप देने के काम नहीं हो सके। इसलिये इसके अंदर लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। सुरंग के बाहर से होकर गुजरने वाले गंगोत्री हाई का बड़ा हिस्सा नदी के कटाव के कारण बह गया है।

हाईवे का पूरा यातायात सुरंग के भीतर से ही होकर गुजर रहा हैं। अंधेरी सुरंग में पानी के कई तालाब बने हैं और पूरी सुंरंग में पानी लगातार टपक रहा है। उबड़ खाबड़ होने के कारण यहा लगातार दुर्घटनाओं का भय बना हुआ है। इसके अलावा लंबगाव मोटर मार्ग भी बदहाल स्थिति में हैं। टूटी हुई नहरों का पानी इस सडक़ पर लगातार बह रहा है। जिससे एनआईएम मोड़ व इंद्रावती पुल के निकट सडक़ का डामर पूरी तरह उखड़ चुका है। बरसात के सीजन को देखते हुए इस सडक़ पर भी किसी भी वक्त यातायात बाधित हो सकता है। इन वैकल्पिक इंतजामों को लेकर लंबे समय से गंभीरता बरते जाने की माग भी होती रही है। लेकिन शासन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, अब ऐसे हालात में कभी भी लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

 

हाईवे बंद होने से बढ़ी गोपेश्वर में गैस की किल्लत

गोपेश्वर ।  गोपेश्वर में इन दिनों गैस की किल्लत छाई हुई है। बदरीनाथ हाईवे जगह-जगह बंद होने के कारण गैस की सप्लाई नियमित नहीं हो पा रही है। नगर में तय रोटेशन व्यवस्था भी इससे प्रभावित हो गई है।
 
गैस उपभोक्ता सुबह से ही रोटेशन द्वारा तय वितरण प्वाइंट पर सिलेंडर सहित खड़े हो रहे हैं। जब गैस सिलेंडर वितरण वाहन आ रहा है, तब उपभोक्ताओं के लिए कम सिलेंडर होने के चलते मारामारी हो रही है। गैस एजेंसी के कर्मचारियों का कहना है कि बहदराबाद प्लांट से चमोली के लिए आवंटित वाहन हाईवे बंद होने के चलते आए दिन जगह जगह खड़े हो रहे हैं। इससे वितरण कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है।
 

अनियंत्रित होकर सूमो खाई में गिरी एक की मौत, दो जख्मी

रुद्रप्रयाग ।  रुद्रप्रयाग-चोपता मोटरमार्ग पर मयकोटी में एक टाटा सूमो अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस दुर्घटना में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रुप से घायल हो गए। घायलों में एक की हालत गंभीर देखते उसे नगर बेस चिकित्सालय रेफर किया गया है।

रविवार रात करीब बारह बजे दुर्गाधार से सतेराखाल की ओर आ रही एक टाटा सूमो मयकोटी के पास अनियंत्रित होकर करीब बीस मीटर गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में सूमो में सवार 26 वर्षीय मुन्नी देवी पत्नी गुडडू लाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 40 वर्षीय शिशुपाल लाल पुत्र सिद्धू लाल, 7 वर्षीय गुडडू लाल पुत्र बंशीलाल निवासी सतेराखाल, जिला रुद्रप्रयाग घायल हो गए। दोनों घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लाया गया। शिशुपाल लाल की हालात को गंभीर देखते डॉक्टरों ने उसे बेस अस्पताल नगर के लिए रेफर कर दिया।

 

गैर कानूनी तरीके से कुत्तों के प्रजनन पर पशुपालन विभाग गंभीर

देहरादून। गैर कानूनी तरीके से कुत्तों का प्रजनन कराने के बाद बीमार कुत्ते पशुपालकों को दिए जाने को लेकर पशुपालन विभाग गंभीर हो गया है। अब कुत्तों का व्यापार करने वाले लोगों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 38 के तहत एनिमल (डाग) बर्थ कंट्रोल रूल 2001 के नियम 12 के अनुरूप प्रत्येक डाग ब्रीडर का पशु पालन विभाग में पंजीकरण किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार जिले में डाग ब्रीडिंग के काम में कई लोग शामिल है। इसकी सूचना विभागीय अधिकारियों को नहीं दी जाती है। पशु व्यापारी कुत्तों की गैर कानूनी तरह से छोटे कमरों में ब्रीडि़ंग कराते हैं और खानपान का भी ख्याल नहीं रखते । इससे पैदा होने वाले बच्चे कमजोर और बीमार होते हैं। इन्हें पशु प्रेमियों को गुमराह कर महंगे दामों पर बेच दिया जाता है, जो कुछ ही दिन में बीमार होकर मौत की नींद सो जाते हैं। इससे पशु प्रेमियों को आर्थिक हानि के साथ ही मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। पशुपालकों की शिकायतों के चलते ही पशुपालन विभाग अब लाइसेंस लेना अनिवार्य किया है। संयुक्त निदेशक पशु पालन विभाग  का कहना है कि लोगों को शिकायत रहती है कि ब्रीडर छोटा और बीमार पप देते हैं और स्वयं उसका उपचार और टीकाकरण करते हैं। ऐसा करना पशु चिकित्सा परिषद का उल्लंघन हैं। इसके लिये भारतीय पशु चिकित्सा परिषद की अनुमोदित इकाई राज्य पशु चिकित्सा परिषद में पंजीकृत वैटनरी डाक्टर ही पशुओं को इंजेक्शन लगाने और उपचार के लिये मान्य है। कुत्तों के विशेषज्ञ बताते हैं कि पिल्ले के पैदा होने के पांच सप्ताह के बाद ही खरीदना चाहिए। जनपद में उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड देहरादून ने जनपदीय पशु कल्याण समिति के सचिव (मुख्य पशु चिकित्साधिकारी) को  सभी डाग ब्रीडरों पर पंजीकरण ना करवाए जाने की दशा में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।

 

सप्ताह में ढाई दिन ही खुलेंगे बैंक

देहरादून। ईद की छुट्टी फिर एक दिन खुलने के बाद बैंक दो दिन हड़ताल के कारण बंद रहेंगे। शुक्रवार को पूरे दिन कामकाज होगा तो शनिवार को आधे दिन और अगले दिन रविवार की छुट्टी। यानी इस सप्ताह केवल ढाई दिन ही बैंक खुलेंगे और बैंकिंग एटीएम पर निर्भर रहेगी। बैंकिंग के लिहाज से यह सप्ताह उपभोक्ताओं के लिए परेशानियां बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। दरअसल रविवार के बाद सोमवार को बैंकों में ईद की छुट्टी रही। मंगलवार को बैंक खुलेंगे तो भीड़ बढऩा लाजिमी है। 22 व 23 अगस्त को बैंकों में हड़ताल का एलान किया जा चुका है। फिर शुक्रवार 24 अगस्त को भी बैंक शाखाओं में काम का दबाव बढ़ेगा। इसका एक कारण 25 को फिर शनिवार की आधी बैंकिंग और अगले दिन रविवार का अवकाश है। जाहिर है इन स्थितियों में क्लियरिंग हाउस न लगने से चेक क्लियरेंस फंसी रहेगी। जबकि नए खाते खोलने एवं कारोबार के लिए निकासी एवं जमा भी बैंक से नहीं हो सकेगी। यानी ढाई दिन ही बैंक खुलने से निर्भरता एटीएम पर ही अधिक रहेगी। स्टेट बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन का कहना है कि दिल्ली में वर्किंग कमेटी की बैठक होने के बाद 22 व 23 को हड़ताल का एलान किया जा चुका है। ऐसे में सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय की स्थिति में ही बैंक खुल सकते हैं, अन्यथा दो दिन बंदी रहेगी।

 

गुजरात और राजस्थान की प्यास बुझायेंगी उत्तराखंड की नदियां

देहरादून। यदि सबकुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में उत्तराखंड की पहाडिय़ों से निकलने वाली सदानीरा नदियां गुजरात और राजस्थान की प्यास बुझायेंगी। जी हां यह सही है इसके लिए सरकारी तौर पर खाका तैयार किया गया है। ये नदियां अभी तक आदिकाल से पूर्वी क्षेत्रों की प्यास बुझाती रही हैं, लेकिन अब उलट धारा बहेगी। उत्तराखण्ड की नदियों का रुख पश्चिमी राज्यों की ओर होगा। इसके लिए शारदा को यमुना और यमुना को साबरमती से लिंक किया जाएगा। ये नदियां गुजरात और राजस्थान की प्यास और सिंचाई जरूरतों को पूरा करेंगी।
 
शारदा नदी को हरियाणा के करनाल में यमुना नदी से जोड़ा जाएगा। इसके लिए पूर्णागिरी में शारदा नदी पर डैम का निर्माण होगा। शारदा-यमुना कैनाल के जरिये कुमाऊं की छोटी-बड़ी करीब आधा दर्जन नदियों का पानी भी यमुना में जाएगा। नदी जोड़ो परियोजना में देश की 30 नदियों को जोडऩे की योजना है, जिनमें एक नदी (शारदा) उत्तराखंड से चुन ली गई है। इसका ब्लू प्रिंट तैयार हो गया है। राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने पूर्णागिरि डैम का जो खांका खींचा है, उसके अनुसार डैम 162 मीटर गहरा और 20 किमी लंबा होगी। डैम से हरियाणा के करनाल तक नहर बनाई जाएगी। करीब 200 किमी लंबी नहर उत्तराखंड से होकर गुजरेगी। शेष दूरी उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा में तय करेगी। इस नहर में पूर्णागिरि डैम से 192 क्यूमेक पानी छोड़ा जाएगा। शारदा-यमुना कैनाल का रूट होगा खटीमा-सितारगंज-बाजपुर-काशीपुर। इस कैनाल को गौला, कोसी और रामगंगा नदियों को पार कर गुजरना है। इसके लिए इन नदियों पर छोटे-छोटे डैम बनेंगे। इससे इन छोटी नदियों का पानी भी शारदा-यमुना कैनाल में जाएगा। 600 मेगावाट की बिजली परियोजना भी प्रस्तावित । पूर्णागिरि डैम का निर्माण सिर्फ राजस्थान और गुजरात को पानी की आपूर्ति के लिए नहीं होगा बल्कि इस पर 600 मेगावाट की बिजली परियोजना भी प्रस्तावित है। राज्य की आपत्तियां दरकिनार ।
 
उत्तराखंड के सिंचाई विभाग ने इस परियोजना पर यह कह कर आपत्ति दर्ज कराई थी कि करीब 20 मीटर चौड़ी व 200 किमी लंबी नहर बनने से सैकड़ों एकड़ कृषि और वन भूमि बर्बाद होगी, जबकि राज्य को कोई विशेष फायदा नहीं होगा। 
 

साढ़े तीन किलों चरस के साथ दो गिरफ्तार

हल्द्वानी। मुखबिर की सूचना मिलने पर शनिवार को एसटीएफ व पुलिस की संयुक्त टीम ने जजी के पास  दो युवकों को साढ़े तीन किलों चरस के साथ गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाही करते हुयें जेल भेज दिया है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस को सूचना मिली की दो युवक चरस को बेचने के लिये हल्द्वानी आ रहे है। सूचना मिलते ही एसटीएफ व पुलिस की संयुक्त टीम ने जजी के समीप एक चैकिंग अभियान चलाया गया। चैकिंग के दौरान दो युवक पुलिस को आते दिखाई दिये। पुलिस ने दोनों युवकों को रोकने का प्रयास किया लेकिन वह पुलिस को देखकर भागने लगे। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों को धरदबोच लिया। दोनो युवकों की तलाशी लेने पर दोनों युवकों के पास से साढ़े तीन किलों चरस बरामाद हुई। पुलिस पूछताछ के दौरान दोनों युवकों ने अपना नाम मो. ताहिर हुसैन पुत्र आसिफ हुसैन इस्लाम नगर नूरी मजिस्द खटीमा निवासी,  व दूसरे ने अपना नाम रवि सिंह राणा पुत्र दिवान सिंह राणा ग्राम मुंडेली थाना खटीमा निवासी बताया है। पुलिस दोनों युवकों से उनके और साथियों के बारे में जानकारी लेने में जूटी हुई है। पुलिस ने बताया कि रवि के पास से दो किलो, व मो. ताहिर के पास से डेढ़ किलों चरस बरामद हुई। पुलिस का मानना है कि साढ़े तीन किलों चरस की कीमत अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में लगभग लाखों रूपये की होगी। पुलिस ने देर शाम दोनों युवकों पर कार्रवाही करते हुये जेल भेज दिया है। पुलिस टीम में एसटीएफ के एसआई संजय मिश्रा, भोटिया पड़ाव चौकी प्रभारी केआर पांडे, एसआई नंदन सिंह रावत, जगदीश सिंह, किशन सिंह आदि लोग शामिल थे।

 

संदिग्ध परिस्थितियों ने नवविवाहिता ने की खुदकुशी

बाजपुर।  संदिग्ध हालात में जहर के सेवन से एक और नवविवाहिता की जान चली गई। जहर उसने क्यों खाया, इसका राज नहीं खुला है। पुलिस ने पंचनामा भर कर शव के पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू की तो परिजनों ने कानूनी कार्रवाई करने से इन्कार कर दिया। उपजिलाधिकारी के आदेश पर शव परिजनों को सौंप दिया गया।

बैलपड़ाव नैनीताल निवासी दलीप चंद्र ने बेटी सोनिया का विवाह चार माह पूर्व लंकुरा निवासी सत्यपाल पुत्र दर्शन चंद के साथ किया था। विवाह के बाद से ही पति-पत्नी में किसी बात पर विवाद चल रहा था। इस पर दोनों में अक्सर झगड़ा होता था। बीती रात सोनिया ने संदिग्ध हालात में जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। पता लगने पर परिजन उसे आननफानन निजी चिकित्सक के पास ले गए। उसके इन्कार करने पर उसे सीएचसी ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराने की तैयारी शुरू कर दी। घटना का पता लगने पर शनिवार सुबह युवती के मायके से तमाम लोग कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने एसएसआइ विक्रम सिंह राठौड़ का घेराव कर ससुरालियों पर दहेज के लिए जबरन जहर देकर सोनिया की हत्या करने का आरोप लगाया। तभी कुछ लोगों ने बीच में पडक़र दोनों पक्षों में समझौता कर दिया। उसके बाद एसडीएम के आदेश पर पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। इस दौरान अस्पताल व कोतवाली में दोपहर तक खासी भीड़ जमा रही। एसएसआइ राठौड़ ने बताया कि यदि वधू पक्ष की तरफ से लिखित तहरीर दी जाएगी तो पुलिस केस दर्ज कर जांच करेगी।

 

पैर बांध कर वाहन में ठूंसे पशु कराए मुक्त

देहरादून। राजधानी में पशु तस्करों की हरकतों के कारण मवेशियों की जान आफत में है। पशुओं को वाहन में जरबन भर कर ले जा रहे तीन लोगों को विकासनगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वाहन के अंदर से तीन भैंसे बरामद की गयीं जिनको पैर बांध कर नीचे लेटाया हुआ था। तीनों पशु हिलने-डुलने की भी स्थिति में नहीं थे। तीनों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
 
दून से पशुओं की चोरी का क्रम थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। पशु तस्करों ने ऐसे पशुओं को निशाना बनाना शुरू किया है जो कि रास्तों में घूमते रहते हैं। इसके अलावा यह लोग घरों के आगे बंधे पशुओं को भी चोरी कर ले जाते हैं। विकासनगर पुलिस ने मुख्बिर की सूचना पर कल धर्मावाला चौक शिमलाबाई पास रोडढ पर छोटा हाथी टैंपा संख्य यूके ०७ सी ए ४४२७ को चैकिंग के लिए रोका तो उसमें सवार तीन लोगों ने भागने का प्रयास किया। वाहन में तीन भैंसों को बेहद कू्ररतापूर्ण तरीके से ठूंसा गया था। इन तीनों भैंसों के पैर बांध कर इन्हें लिटा कर रखा गया था। छोटे से वाहन में तीनों पशु हिलने तक की स्थिति में नहीं थे। पूछताछ करने पर पशु तस्करों ने अपने नाम विकासनगर निवासी निशार अहमद, रिहान निवासी जीवनगढ एवं सहवान निवासी शिमलाबाई पास रोड बताए। इन तीनों पशुओं को वध के लिए सहारनपुर ले जाया जा रहा था। ज्ञात हो कि इससे पूर्व भी विकासनगर से चुराए गए वाहनों केा अलग-अलग स्थानों पर बरामद किया गया है।
 
पशु तस्करों ने पटैलनगर, सहसपुर, विकासनगर, राजपुर सहित अन्य क्षेत्रोंं आतंक फैला रखा है। यहां तक की अब स्कोर्पियो जैसे वाहनों में भी वाहनों की तस्करी की जा रही है। चार दिन पूर्व ही क्लेमेंटाउन पुलिस ने क्वालिस में भर कर ले जाई जा रही गायों को मुक्त कराया था। कई क्षेत्रों में पशु चोरों के आतंक के बाद स्थानीय लोग अब खुद ही रातों को अपने पशुओं की सुरक्षा के लिए जागते हैं और गश्त करते हैं।
 

जल्द होगा कुलदीप हत्याकांड का भी खुलासा, दो दबोचे

देहरादून। कुलदीप हत्याकांड में परिजनों ने आज नेहरू कॉलोनी थाने में हंगामा किया और हत्यारोपियों की अब तक गिरफ्तारी न होने पर नाराजगी जताई। नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कुलदीप की हत्या की गयी थी। इस मामले में नेहरू कॉलोनी पुलिस को अहम सुराग मिले हैं। वहीं मृतक के परिजनों ने आज पुलिस की कार्यशैली को लेकर हंगामा किया तथा आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की। वहीं नेहरू कॉलोनी पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच में अब तक जो भी तथ्य सामने आए हैं उसके आधार पर जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।
 
१४ अगस्त को नेहरू कॉलोनी क्षेत्र रिस्पना पुल टैक्सी स्टेंड के पास लैंसडॉन कोटद्वार निवासी कुलदीप  शर्मा का शव मिला था। कुलदीप को अज्ञात हत्यारों ने गला काट कर मौत के घाट उतारा था। जिस प्रकार से उसे मौत के घाट उतारा गया था उससे साफ जाहिर हो रहा था कि रात को ही खाने-पीने के दौरान कुलदीप की हत्या की गयी। मृतक कुलदीप के परिजन आज सुबह नेहरू कॉलोनी थाने में पहुंचे थे जहां परिजनों ने हत्यारों की अब तक गिरफ्तारी न होने पर नाराजगी जताई। कुलदीप प्रेमनगर में अपने चाचा की शॉप में ही काम करता था और उस रोज वह ड्यूअी से ही वापस लौटा था। इस बात से इंकार नहीं किया जा रहा है कि रात को कुलदीप ने अपने कुछ साथियों के साथ बैठकर शराब पी और संभवत: इसी दौरान उपजे विवाद में उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। पूरे मामले को लेकर नेहरू कॉलोनी और एसओजी टीम जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार टैक्सी स्टैंड में ही डेरा जमाने वाले दो युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है जिनके साथ कुलदीप अक्सर खाता-पीता था। 
 
सूत्रों का कहना है कि हत्या से संबंधित अहम जानकारियां इन लोगों से मिली हैं और जल्द ही पुलिस इस हत्याकांड से पर्दा उठाने जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरा मामला आपसी विवाद से ही जुड़ा हुआ है और जांच में अब तक किसी भी प्रकार की अन्य बात सामने नहीं आई है। 
 

चौबीस घंटे में दो हत्याओं का खुलासा

देहरादून। चौबीस घंटों में दून पुलिस ने दो हत्याओं का खुलासा किया है। जहां कल पुलिस ने वैभव सैनी हत्याकांड के खुलासो के दावा किया था वहीं गुरूवार रात सहसपुर थाना क्षेत्र लक्ष्मीपुर में हुई महिला की हत्या का पुलिस ने खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी पहले भी दोहरे हत्याकांड में जेल जा चुके हैं। आरोपियों से पुलिस ने महिला से लूटे गए जेवरात बरामद किए हैं। एक हत्यारोपी महिला का परिचित था और उसी ने घर की रेकी की थी। तीनों आरोपियों को आज पुलिस ने कोर्ट में पेश किया।

मालूम हो कि गुरूवार को सहसपुर क्षेत्र लक्ष्मीपुर में अकेली रहने वाली ६० वर्षीय आरिस मोर्गन की बदमाशों ने घर में लूटपाट करने के दौरान गला घोंट कर हत्या कर दी थी। महिला का शव गुरूवार की शाम घर में ही बैड पर पड़ा मिला था। आरिस मोर्गन यहां अपनी बेटी के साथ रहती थी लेकिन बाद में बेटी की शादी बरेली में होने के कारण वह यहां अपने पति के साथ अकेली रह रहंी थीं। उनके पति अपनी बेटी के पास बरेली गए हुए थे। गुरूवार को जब मोर्गन शाम को दूध लेने नहीं पहुंची तो पड़ोसी खुद ही दूध देने के लिए उनके घर आए लेकिन जब घर के अंदर से कोई बाहर नहीं आया तो कुछ लोगों के साथ पड़ोसी अंदर गए। यहां मोर्गन का शव बेड पर पड़ा हुआ मिला। साथ ही पूरे घर का सामान बिखरा हुआ था। सूचना मिलने पर पुलिस ने छानबीन शुरू की और उनके भाई जैसफर निवासी विकासनगर को सूचना दी। पुलिस के अनुसार जिस प्रकार से घर की स्थिति पाई गयी उससे लूटपाट के दौरान ही हत्या करने की पुष्टि हो रही थी। आसपास के लोगों से भी पूछताछ बावजूद कुछ पता नहीं चल पाया था। 

इधर पुलिस ने इस मामले में छानबीन शुरू की और आसपास के संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। इसी कड़ी में पुलिस को हत्यारोपियों के बारे में अहम जानकारियां हाथ लगीं, जिसके बाद पुलिस ने बरोटीवाला के एक पुराने हत्यारे को हिरासत में लिया तो उसने सारा राज पुलिस के आगे खोल कर रख दिया। बरोटीवाला निवासी अनिल ने अपने दो अन्य साथियों नूर हसन एवं दिलशान निवासी छबरा के भी नाम लिए। पुलिस को दी गयी जानकारी में उसने बताया कि गुरूवार को दिन में यह लोग आरिस मोर्गन के घर में लूटपाट के मंसूबे लेकर घुसे थे। घर के अंदर घुसने पर आरिस ने इन तीनों का विरोध किया जिस पर अनिल ने गला घोंट कर महिला को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद तीनों ने घर में लूटपाट शुरू की जिसमें इन लोगों के हाथ एक सोने की चेन व कानों के कुंडल हाथ लगे। इससे पहले कि यह लोग अन्य आलमारियों को भी खोलते उसी समय घर में किसी के आने की आहट हुई तो तीनों जो माल हाथ में लगा उसी को लेकर चलते बने। 
 
सहसपुर थाना प्रभारी सूर्यभूषण नेगी ने बताया कि अनिल एवं नूरहसन उर्फ नूरा ने वर्ष २००९ में विकासनगर में दोहरे हत्याकांड को भी अंजाम दिया था जिसमें दोनों इन दिनों जमानत पर थे। तीनों हत्यारों ने बताया कि मोर्गन के घर से केवल एक सोने की चेन एवं कान के कुंडल ही हाथ लगे थे और ऐन वक्त तीनों को वहां से भागना पड़ा था।
 

संदिग्ध परिस्थितियों में एटीएम से बीस लाख गायब

देहरादून। अब तक तो यह सामने आता था कि एटीएम से डुप्लीकेट कार्ड के जरिये या फिर किसी का कार्ड बदलकर रकम निकाली जाती है। मगर अब तो एटीएम में ही रकम सुरक्षित नहीं रह गई। ताजा मामला एसबीआइ के धर्मपुर सब्जी मंडी एटीएम का है। जिसमें एटीएम तोड़े बगैर या डुप्लीकेट कार्ड का इस्तेमाल किए बिना रहस्यमय ढंग से 20 लाख कैश गायब हो गया। एटीएम को कोड-वर्ड से खोला गया। महज सात घंटे में यह रकम गायब हुई, वो भी स्टील की चार कैश-ट्रे समेत। शुक्रवार सुबह मामला सामने आने पर बैंक अफसरों के होश उड़ गए। पुलिस और बैंक की सायबर एक्सपर्ट व विजिलेंस टीम मामले की जांच कर रही है।
 
मामला शुक्रवार सुबह सवा नौ बजे सामने आया। मुंबई स्थित स्टेट बैंक आफ इंडिया के कॉल सेंटर ने दून एसबीआइ के अफसरों को सूचना दी कि धर्मपुर का एटीएम काम नहीं कर रहा। बैंक अफसर एटीएम पहुंचे तो उसमें रकम ही नहीं थी। उन्होंने मशीन खोलकर चेक की तो होश उड़ गए। मशीन की चारों कैश-ट्रे गायब थी। बताया गया कि एसबीआइ के आउटर इलाकों में लगे एटीएम में रकम डालने की जिम्मेदारी सीएमएस (कैश मॉनिटरिंग सर्विसेज) के पास है। जो प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी है। बैंक ने पुलिस को सूचना दी। जांच में पता चला कि सीएमएस ने गुरुवार शाम सवा चार बजे एटीएम में 11 लाख कैश डाला। एटीएम में पहले से ही 10 लाख कैश था। मशीन ने रात साढ़े 11 बजे काम करना बंद किया। ऐसे में माना जा रहा है कि शाम सवा चार से रात साढ़े 11 बजे के बीच ही रकम निकाली गई। ऐसे में कुल रकम 21 लाख में से बीस लाख कैश गायब बताया जा रहा है। सूचना पर एसपी सिटी अजय जोशी और सीओ डालनवाला मणिकांत मिश्रा फोर्स समेत एटीएम पहुंचे। पुलिस ने रकम डालने वाली सीएमएस के दोनो अफसरों को हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। नई दिल्ली से एसबीआइ के सायबर एक्सपर्ट्स और विजिलेंस की टीम भी यहां पहुंचकर जांच कर रही है। पुलिस कप्तान नीरू गर्ग ने बताया कि मामले का जल्द पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
 
पांच घंटे छुपाए रखी घटना
 
एटीएम से कैश-ट्रे समेत 20 लाख रुपये गायब होने की घटना को बैंक के अफसरों ने पुलिस से लगभग पांच घंटे तक छुपाए रखा। बैंक अफसरों को सुबह दस बजे ही कैश-ट्रे गायब होने का पता लग गया था, मगर पुलिस को दोपहर सवा तीन बजे यह सूचना दी गई।
डेढ़ साल पूर्व भी हुई थी घटना
 
एसबीआइ के एटीएम से रहस्यमय ढंग से कैश गायब होने की राजधानी में दूसरी घटना है। करीब डेढ़ साल पूर्व कैंट थाना क्षेत्र की वीरपुर ब्रांच में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। एटीएम से धीरे-धीरे कर रकम कम हो रही थी। पहले रकम लगभग साढ़े तीन लाख कम पाई गई, लेकिन जांच में रकम 11 लाख तक पहुंच गई। बैंक की सायबर एक्सपर्ट व विजिलेंस टीम ने जांच की तो तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर और एटीएम कस्टुडियस सुरेंद्र दत्त नौटियाल को घोटाले का आरोपी पाया। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हुई। सुरेंद्र नौटियाल इस समय जेल में हैं। उनकी जमानत अपील हाईकोर्ट में भी नामंजूर हो चुकी है। इस मामले की जांच पूरी भी नहीं हुई थी कि अब धर्मपुर में भी घपला सामने आ गया। 
 

एस पी सिटी की कुर्सी का मामला सीएम दरबार तक

देहरादून। दून पुलिस में कुर्सी की दौड़ एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार नगर पुलिस अधीक्षक पद के लिए जोड़ तोड़ शुरू हो गयी है। कई नाम सामने आ रहे हैं तो कुछ ने मुख्यमंत्री दरबार तक अपनी आवाज पहुंचानी शुरू कर दी है। अगले सप्ताह औपचारिक तौर पर दून के नए एसपी सिटी पद पर तैनाती दी जा सकती है। 

इस बार कौन होगा दून का नया एसपी सिटी? गत जुलाई में जसवंत सिंह की इस पद से विदाई के साथ ही कवायद शुरू हो चुकी है। दौड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों ने इसके लिए उच्च अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री के दरबार तक अपने जुगाड़ तलाशने शुरू कर दिए हैं। फिलहाल पांच एडिसनल एसपी दौड़ में हैं जिनमें एसपी देहात गिरीश चंद्र ध्यानी का नाम सबसे उपर बताया जा रहा है। अनुमान है कि सोमवार तक दून के नए एसपी सिटी के नाम की घोषण कर दी जाएगी। श्री ध्यानी के नाम के पीछे दून की भौगोलिक स्थिति से लंबे समय जुडे रहने के साथ ही नगर क्षेत्र में कार्य करने का लंबा अनुभव भी उनके पास है। श्री ध्यानी इससे पूर्व सीओ यातायात एवं सीओ मसूरी के पद पर रह चुके हैं जबकि वर्तमान में एसपी देहात के महत्वपूर्ण पद पर तैनात है। 

ज्ञात हो कि पूर्व एसपी सिटी जसवंत सिंह के ३१ जुलाई को सेवानिवृत्त होने के बाद से ही एसपी सिटी का पद खाली चल रहा है। सेवा विस्तार के बावजूद इस पद के लिए नया नाम तलाशा जा रहा है। एएसपी रैंक के चार अधिकारी दून का एसपी सिटी बनने को बेताब हैं और इसके लिए बकायदा शासन-प्रशासन एवं विभाग में अपने संबंधों को कैश कराने की भागदौच चल रही है। वहीं चार दिन से खाली पड़े इस पद को लेकर उठापटक शुरू हो चुकी है। पिछले चार दिनों से इस पद पर किसी भी अधिकारी की तैनाती नहीं हो पाई है। पद की दौड़ में एएसपी गिरीश चंद्र ध्यानी, मुकेश शर्मा सहित कुछ अन्य अधिकारी लगे हुए हैं। हर कोई अपने स्तर पर पद को हथियाने की जुगत लगा रहा है। पुलिस मुख्यालय से लेकर शासन की चौखट तक अपने संबंध तलाशे जा रहे हैं। संभावनाओं की बात करें तो वर्तमान में एसपी देहात का चार्ज देख रहे गिरीश चंद्र ध्यानी को इस पद से नवाजा जा सकता है। हालांकि पीएसी उधमसिंह नगर एवं राजभवन में तैनात एक एएसपी भी दौड़ में आगे बताए जा रहे हैं। फिलहाल नामों को लेकर अधिकारियों की ओर से भी अभी संयम बरता जा रहा है। अगले सप्ताह इस पद के लिए नए अधिकारी का नाम पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।
 

बारिश का कहर, एक दर्जन से अधिक मरे, पांच दर्जन लोग लापता

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा के चलते हुए भूस्खलन और बाढ़ के कारण राज्य में भारी तबाही हुयी है। इस आपदा के कारण उत्तरकाशी में अग्निशमन सेवा के तीन जवानों सहित तेरह लोगों की मौत हो गयी और कई मकानों को नुकसान पहुंचा है। जबकि चमोली जिले में एक मकान के ढहने के कारण दो बच्चों की मौत हो गयी और पांच लोग घायल हो गये। पूरे राज्य मे वर्षा के कारण अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। भारी बारिस के कारण चारधाम यात्रा पूरी तरह से बंद कर दी गयी है। यहां विभिन्न यात्रा मार्गों पर सैकड़ों तीर्थयात्री फंसे हुये हैं। मौसम विभाग द्वारा भारी वर्षा की चेतावनी जारी किये जाने के बाद राज्य में सरकार ने हाई एलर्ट जारी कर दिया गया है। वर्षा के कारण गढ़वाल मंडल के इलाकों को काफी नुकसान पहुंचा है।
 
उत्तरकाशी से हमारे संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में कुदरत फिर तबाही लेकर आई। शुक्रवार की देर रात लगभग दो बजे भारी बारिस के बाद असी गंगा घाटी में दयारा बुग्याल के पास बादल फटने से पापडग़ाड, स्वारी गाड, नहरी गाड, गवाना गाड और असी गंगा क्षेत्र में जल प्रलय जैसी हालत पैदा हो गये थे। जिले में चिन्यालीसौड़ से लेकर भटवाड़ी तक के लगभग 70 किमी के इलाके में कोहराम मचा हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों को पानी में बहते कुछ शव और एक सेंट्रो कार तैरती दिखी। बचाव के लिए पानी में हाथ-पांव मारते कुछ लोग भी दिखे। बड़ी मात्रा में पानी उत्तरकाशी नगरपालिका क्षेत्र तक पहुंच गया। कई भवन ढहने की सूचना है। अनहोनी की चिंता में डूबे सैकड़ों बदहवास शहरवासी घर खाली कर इधर-उधर शरण लिए हुए हैं। 
 
गंगोरी क्षेत्र में गंगोत्री राजमार्ग का कई किलोमीटर हिस्सा और हाईवे पर बना पुल बह गया। बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ का पानी दर्जन भर से ज्यादा होटलों, घरों और आश्रमों में घुस गया। गंगोत्री राजमार्ग पर मशहूर होटल ग्रेट गंगा में भी बाढ़ जैसी स्थिति नजर आ रही थी। पानी घुसने से उत्तरकाशी शहर के कई घरों और आश्रमों के लोग भी ऊंचाई वाले स्थान की ओर भागे। तबाही का संचार साधनों पर भी असर पड़ा है। पूरे इलाके में बिजली गुल होने से घुप अंधेरे में बादलों की गरज, घन सरीखी बारिश की बूंदों की तड़तड़ाहट के बीच सायरनों की गूंजती आवाज से लोगों का दिल बैठ रहा था। कोई घर से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। भीषण बाढ़ जैसे हालात देखकर शहरवासी दहशतजदा हैं। क्षेत्र में कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन करने के लिए जिला प्रशासन की टीम अभी मौके पर पहुचने की कवायद में लगी हुयी है। देर रात आम लोगों को राहत देने के लिए स्थानीय अग्रिशमन के कर्मचारी मौके पर पहुचंने की कोशिश कर रहे थे इस दौरान गंगोरी पुल के टूटने से तीन कर्मचारी लापता हो गये है। रात को अंधेरा होने के कारण इनकी खोज नही की जा सकी। जबकि पांच लोगों के शवों को रात में ही बरामद कर लिया गया था और पांच शव अभी पानी कम होने पर मलवे में दबे मिले हैं। कुल पांच दर्जन से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। बेघर हुए लोगों को गढ़वाल मंडल विकास निगम के अतिथि गृहों व सरकारी स्कूलों में ठहराया गया है। इनके खाने पीने का इंतजाम तमाम स्थानीय लोग कर रहे हैं। पूरे एक दर्जन से अधिक गावों का बुरा हाल है। स्थानीय लोगों के मवेशियों का कुछ पता नहीं है। साथ ही कई लोगों की दो पहिया व चौपहिया बाहन भी लापता हैं। 
 
जिला प्रशासन ने राहत व बचाव कार्य के लिए रात में ही आईटीबीपी व सेना से सम्पर्क किया और तडक़े चार बजे सेना व आईटीबीपी की दो टुकडिय़ां राहत के लिए पहुंच गयी थी। इसके बाद ही राहत कार्य शुरू हो सका और पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सका। लगातार हो रही बारिस के कारण राहत व बचाव कार्य में सेना व आईटीबीपी को भी परेशानी हो रही है। समाचार लिखे जाने तक राहत कार्य जारी थे।
 
इसके साथ ही मनेरी भाली जलविद्युत परियोजना-2 को बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। फोरवे इनटेक में भारी मात्रा में गाद आ गई थी। भारी बारिश और बाढ़ की आशंका के चलते परियोजना के कर्मचारी भी भागे फिर रहे हैं। अनुमान लगाया गया है कि परियोजना को लाखों रुपये की चपत लगी है। टरबाइन भी ठप पड़ी हैं। बिजली का उत्पादन रुक गया है। उधर, बताया गया है कि मनेरी भाली फेज-1 को भी भारी बारिश से नुकसान पहुंचा है। यहां भी उत्पादन रूका हुआ है।
 
दूसरी ओर  सुबह चमोली जिले के कर्णप्रयाग में एक मकान के गिर जाने के कारण दो बच्चों की मौत हो गयी। जिले के पोखरी इलाके में एक और बच्चा बाढ़ के पानी में बह गया। वहां पर भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ की ओर जाने वाला राजमार्ग बंद है। ताजा भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ जाने वाले तीर्थयात्री छिनका, पातालगंगा, लाम्बागर और बिराही के विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। इस समय लगभग दो हजार से अधिक यात्री पूरे राज्य में अलग-अलग स्थानों पर फंसे हैं। उधर यमुना घाटी में भी राना चट्टी के समीप लगभग दो सौ मीटर सडक़ बहने से यमुनोत्री मार्ग भी पूरी तरह से बंद हो गया है। 
 
राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्या ने बताया कि हमें सूचना मिली है कि गंगोत्री में अग्निशमन सेवा के तीन जवानों की मौत हो गयी है। केदारनाथ मंदिर की यात्रा भी स्थगित कर दी गयी है।
 
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और संबंधित अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य शुरू करने के लिए कहा है। बहुगुणा ने संबंधित अधिकारियों से मंदिर की ओर जाने वाली सडक़ों को फिर से यातायात लायक बनाने के लिए कहा है जिससे फंसे हुए यात्री अपने गंतब्य स्थान जा सकें। उन्होंने सचिवालय में विशेष चारधाम इकाई गठित करने के लिए कहा है जो उन्हें गढ़वाल इलाके के स्थिति के बारे में रोजाना रिपोर्ट भेजेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार असहाय यात्रियों को भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री मुहैया कराएगा।
 
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले चौबीस घण्टों में राज्य के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिस की आशंका है। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन टीम को भी तैयार रहने को कहा गया है।
 

प्रशासन की सख्ती भी काम नहीं आयी, ओवरलोडिंग जारी

विकासनगर। चिल्हाड़ के पास बस हादसे में 27 लोगों के काल के मुंह में समाने के बावजूद क्षेत्र में ओवरलोडिंग पर अंकुश नहीं लगा। गुरुवार को मुख्य मार्गो पर पुलिस की सख्ती के चलते स्थिति कुछ ठीक रही, लेकिन संपर्क मार्गो पर एक यूटीलिटी व अन्य छोटे वाहनों पर 30 से 40 सवारियां तक भरी हुई मिलीं। जान हथेली पर रखकर सफर कर रहे लोगों की समस्या हल करने के लिए प्रशासन अब भी गंभीर नहीं है।

पुलिस व तहसील प्रशासन की लापरवाह कार्यशैली के चलते जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर के अधिकांश रूटों पर ओवरलोडिंग की समस्या नासूर बनती जा रही है। तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस व तहसील प्रशासन के ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। बसों के अभाव में छोटे वाहन और यूटिलिटी चालक सवारियां को भेड़ बकरियों की तरह ढूंस कर ले जाते हैं। जौनसार बावर क्षेत्र के प्रमुख मार्ग कालसी-साहिया-चकराता, हरिपुर-कोटी इच्छाड़ी, त्यूनी, साहिया-क्वानू मीनस मार्गो को छोडक़र गुरुवार को अन्य मार्गो पर ओवरलोडिंग अन्य दिनों की तरह ही नजर आयी।

डीएम के सख्त निर्देशों के बाद भी यहां पर ओवरलोडिंग पर लगाम नहीं लग सकी। स्थिति यह है कि सामान के साथ ही चालक यूटीलिटी में 30 से 40 सवारियां तक ढूंस रहे हैं। ऐसे रूटों पर बसों की संख्या कम होने के कारण लोगों का छोटे वाहनों में बैठना मजबूरी है। ऐसे में यहां दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ओवरलोडिंग रोकने को एआरटीओ की चेकिंग व पुलिस प्रशासन की सख्ती का असर एक दिन से ज्यादा दिखाई नहीं देता। पुलिस व प्रशासन के सामने छोटे वाहन सवारियों को भर-भरकर ले जाते हैं, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है।
 
इन रूटों पर है ओवरलोडिंग
 
सहिया-पजिटीलानी, साहिया-क्वानू , साहिया-खमरोली-पजिटिलानी, सुरेऊ-भंजरा-उभरेऊ, आरा-अस्टी, साहिया- उद्पाल्टा, साहिया-समाल्टा-पानुवा, साहिया-अलसी सकनी, साहिया-निथला, बिसोगिलानी-साहिया, दातनू-बडनू, फैडूलानी-मलेथा, चंदेऊ-सुपोऊ, कालसी-थैना, कालसी -लखवाड, हरिपुर-कोटी, डांडा-लेल्टा-पाटा रूपऊ, चकराता-क्वासी-गोराघाटी, लाखामंडल-चकराता, चकराता-नागथात, कोटी कनासर-कांडोई भरम, त्यूनी-अटाल, त्यूनी-हनोल, मोरी-त्यूनी, आराकोट-त्यूनी, चकराता हयो टगरी आदि मोटर मार्गो पर सबसे ज्यादा ओवरलोडिंग की समस्या है।
 
जिलाधिकारी रविनाथ रमन का कहना है कि जौनसार बावर क्षेत्र में ओवरलोडिंग वास्तव में बड़ी समस्या है। ओवरलोडिंग और छोटे वाहन चालकों की मनमानी रोकने को परिवहन निगम के अधिकारियों व तहसील प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे जौनसार बावर क्षेत्र में संयुक्त अभियान चलाएं। इसके अलावा क्षेत्र के जिन रूटों पर बसों की संख्या कम है, वहां बसों की संख्या बढ़ाने को आरटीओ को पत्र लिखा जाएगा।
 

 

थम नहीं रहा है चार धाम यात्रा पर बारिस का कहर

गढ़वाल । चारधाम यात्रा मार्गो पर बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार शाम मलबा आने से बंद यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग गुरुवार को भी न खोला जा सका। जबकि भटवाड़ी के पास हलकूगाड में भूस्स्खलन से गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद हो गया। वहीं, चमोली और जोशीमठ के बीच पातालगंगा में मंगलवार रात से बंद बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 40 घंटे बाद यातायात सुचारु हो सका। इस दौरान मलबा हटा रही सीमा सडक़ संगठन (बीआरओ) की एक जेसीवी अलकनंदा में जा समाई। हालांकि हादसे में चालक सकुशल बच गया। हालांकि केदारनाथ और गंगोत्री मार्ग पर यातायात सामान्य रहा।

भारी बारिश से पहाड़ों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। मंगलवार को बडक़ोट के पास यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का बीस मीटर हिस्सा धंस गया था। तकरीबन 32 घंटे बाद बुधवार देर सायं यातायात सुचारु हुआ ही था कि गुरुवार सुबह एकबार फिर भारी भूस्खलन से मार्ग बंद हो गया। बडक़ोट के उपजिलाधिकारी परमानंद राम ने बताया कि मलबा हटाने का काम जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही यातायात शुरू कर दिया जाएगा।

दूसरी ओर मंगलवार रात से पातालगंगा के पास बंद बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग गुरुवार देर सायं खोल दिया गया। बुधवार को सुबह से ही बीआरओ के जवान मलबा साफ करने में जुटे थे, लेकिन लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों के कारण इसमें बाधा आती रही। गुरुवार को पहाड़ी से गिर रहे बोल्डर के कारण एक जेसीबी मलबे अलकनंदा में जा गिरी। चालक राकेश चंद्र ने किसी तरह छलांग लगाकर जान बचाई। बाद में पांडुकेश्वर से जेसीबी मंगाकर इस स्थान पर मलवा पत्थरों को हटाने का काम शुरू किया गया। 
 

दो भाजपा नेताओं के आपस में भिडऩे के बाद कोतवाली में बवाल

खटीमा। दो भाजपा नेताओं के आपस में भिडऩे के बाद कोतवाली में बवाल हो गया। उत्तेजित कार्यकर्ताओं के जाम लगाने के प्रयास के साथ वाहन को तोडऩे की कोशिश पर पुलिस ने लाठियां फटकार उन्हें दौड़ा दिया। इससे भाजपा मंडल महामंत्री समेत कई कार्यकर्ता घायल हो गए। जवाब में हुए पथराव में एक सिपाही घायल हो गया। बुधवार देर रात तक कोतवाली में हंगामा होता रहा। विधायक व सीओ ने हस्तक्षेप कर कार्यकर्ताओं को शांत कराया। सीओ ने घटना की जांच कर दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई का विधायक को भरोसा दिलाया।
 
मुख्य चौक पर भाजयुमो के प्रदेश पार्षद अमित कुमार पांडे व भाजपा नेता कमान सिंह जेठी के बीच किसी बात पर विवाद हो गया। विवाद देखते-देखते मारपीट में बदल गया। आरोप है कि चौराहे पर खड़े पुलिस कर्मियों ने जब बीचबचाव करना चाहा तो अमित उनसे ही भिड़ गए। पुलिस कर्मी उनको कोतवाली ले गए। वहां कमान सिंह ने पांडे पर मारपीट का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी। तभी घटना की खबर पाकर बड़ी संख्या में भाजपाई कोतवाली जा धमके और हंगामा करने लगे। पुलिस कर्मियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। भाजपा मंडल महामंत्री गोपाल बोरा चौराहे पर तैनात पुलिस कर्मियों पर कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग पर अड़ गए। ऐसा न होने पर आत्मदाह की धमकी देने लगे। पुलिस कर्मियों ने उनकी पिटाई कर दी। गोपाल के अनुसार उनकी अंगुली में फैक्चर हो गया। आपाधापी में जिला उपाध्यक्ष नंदन सिंह खड़ायत को भी चोट लग गई। नेताओं की हालत देख कार्यकर्ता भडक़ उठे और कोतवाली के बाहर जाम लगाने लगे। उन्होंने एक वाहन पर तोडफ़ोड़ कर दी। यह देख पुलिस कर्मियों ने लाठियां फटकार भाजपाइयों को दौड़ा दिया। कुछ युवकों ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसमें कांस्टेबल चौधरी लाल घायल हो गया। सूचना पर सीओ जीसी टम्टा व विधायक पुष्कर सिंह धामी कोतवाली पहुंचे। वहां उन्होंने दोनों को शांत कराया। भाजपाई लाठीचार्ज करने वाले उपनिरीक्षक व पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई पर अड़े रहे। सीओ ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। साथ ही मामले में पुलिस ने कमान सिंह जेठी की तहरीर पर पांडे के विरुद्ध मारपीट व गालीगलौज का मुकदमा दर्ज कर दिया। विधायक धामी ने बताया कि सीओ ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। साथ ही लाठी चलाने वाले पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

पुलिस पर अभद्रता का आरोप
 
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की। मामूली विवाद को उसने तूल दे दिया। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला उपाध्यक्ष नंदन सिंह खड़ायत, अमित पांडे व मंडल महामंत्री गोपाल बोरा का कहना है कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की। 
 

 

Security remained tight in Uttarakhand following the serial blasts in Pune

Dehradun : General security has been on high alert of the festival of Raksha Bandhan. After the serial blasts in Pune the State Police has proactively increased security in the state.

All identified vulnerable points were secured tight with the deployment of police force. Major railway stations, bus stand and markets were also secured in a similar way. Backup of all support departments was also kept ready in case of an emergency.

We are glad that no mishappening has been reported till now.

सुधरेगी नई टिहरी की आंतरिक सडक़ो की दशा

नई टिहरी । वर्षो से खस्ताहाल नई टिहरी नगर की आंतरिक सडक़ों की दशा अब सुधरेगी। जिला योजना से सडक़ों की मरम्मत के लिए बीस लाख रुपए स्वीकृति हुए हैं। नगर पालिका अध्यक्ष उमेशचरण गुसाई ने कहा कि पालिका भी इसके लिए करीब 40 लाख रुपए देगी। बरसात खत्म होते ही मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा।

वर्षो से नगर की आंतरिक सडक़ों की मरम्मत न होने के कारण यह कई स्थानों पर खस्ताहाल हो रखी है। कॉन्वेंट स्कूल जाने वाली, एम ब्लॉक, जिला अस्पताल आदि स्थानों की ओर जाने वाली सडक़ों पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं। नगरवासियों ने भी कई बार इन सडक़ों की मरम्मत की मांग करते आए हैं, लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। मरम्मत का कार्य लोनिवि के माध्यम से करवाया जाएगा। बारिश का सीजन खत्म होते ही मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा। खस्ताहाल सडक़ों की मरम्मत होने से नगरवासियों को भी इससे राहत मिलेगी।

 

सिग्नल टॉवर अब सोलर ऊर्जा से होंगे संचालित

देहरादून। विद्युत कटौती से बेहाल भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) अपने सिग्नल टॉवरों को अब सोलर ऊर्जा से संचालित करेगा। पहले चरण में सात टॉवर सोलर एनर्जी सिस्टम से लैस किए जाएंगे। इनमें से पांच टॉवर पर कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके लिए बीएसएनल को केंद्र सरकार आर्थिक सहयोग दे रही है।
 
राज्य भर में में बीएसएनएल के लगभग 4500 सिग्नल टॉवर हैं। प्रत्येक को संचालित करने के लिए सात किलोवॉट बिजली की आवश्यकता होती है। विद्युत आपूर्ति बाधित रहने पर बीएसएनएल को जनरेटर का सहारा लेना पड़ता है। लंबी कटौती होने पर व्यवस्था बाधित हो जाती है। उपभोक्ताओं को परेशानी झेलने के साथ-साथ निगम की झोली भी खाली हो रही है। बिजली की कमी को पूरा करने के लिए बीएसएनएल ने सौर ऊर्जा का सहारा लिया है। केंद्र सरकार से बीएसएनएल के टॉवर्स पर सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने के लिए आर्थिक सहायता मिली है। पहले चरण में जनपद के ज्यादा आवश्यकता वाले सात टॉवर्स को सौर ऊर्जा सिस्टम लगाने के लिए चुना गया है। प्रत्येक टॉवर पर व्यवस्था के लिए 25 लाख रुपये खर्च होंगे। कुल खर्च का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी, शेष 10 प्रतिशत खर्च बीएसएनएल वहन करेगा। निगम ने सिस्टम लगाने का काम शुरू कर दिया है। 
 
इसके लिए बीएसएनएल को तकनीकी सहायता मोजरबेयर नामक कंपनी मुहैया करा रही है। सोलर एनर्जी सिस्टम लगने से बीएसएनएल को जहां एक ओर जेब ढीली नहीं करने पड़ेगी, वहीं लोगों को भी बिजली जाने पर सिग्नल समस्या से दो चार नहीं होना पड़ेगा। बीएसएनएल अन्य टॉवर्स पर भी सिस्टम लगाने की कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
 

Uttarakhand Power Corporation Limited to go Hi Tech in less than 10 months

Dehradun : With Data Centre of Uttarakhand Power Corporation Limited starting to function from Wednesday, the integrated commercial activities will also take off. By the month of March 2013, billing, metering and collection would go online. The consumers can see their bills and download from UPCL Web Portal and know about the bill payment made by them earlier. Besides, the consumers will also be informed through E-mails or SMS alerts. The UPCL Call Centre will start functioning from Wednesday onward and through it the consumers can register their complaints.

Chief Secretary Alok Kumar Jain reviewing the meeting of Power Department on Tuesday at Secretariat directed the departmental officers to start online bill payment service within a month. He asked them to release three- digit number for Call Centre and introduce third party audit system. He instructed them to reduce commercial loss from 23 to 21 percent and reduce collection loss to 4 percent from 6 percent. 

Secretary Energy SS Sandhu apprised that there had been reduction of 3.34 percent in line losses, 815 cases were lodged against power theft and Rs. 35 lakh recovered as fine. 

CM takes decisions to strengthen education in the State; 49.5 crore sanctioned

Dehradun : State Government has decided to establish Higher Education Selection Commission and enroll about 850 professors through it. Their retirement age would also be increased to 65 from 60 years. The Government also sanctioned Rs. 40 crore for construction of buildings for various degree colleges and Rs. 4. 50 crore for building of Higher Education Directorate at Haldwani.

Decision to this effect was taken in a review meeting of Higher Education and Technical Education Departments chaired by Chief Minister Vijay Bahuguna at Secretariat on Tuesday. Decision to constitute Higher Education Selection Commission was taken in view of delay in the selection process through Public Service Commission. The Commission would come into existence by 30 September and the vacant posts would be filled by March, 2013. Chief Minister Bahuguna has asked the departmental officers to ensure transparent and unbiased selection.

Beside sanctioning Rs. 40 crores for construction of college buildings, Chief Minister also sanctioned Rs. 5 crore for laboratory equipments. Sanctioning Rs. 4.50 crore for Higher Education Directorate building, Mr. Bahuguna instructed the officers to open extension counter of Kumaon University in the Directorate and also at Pithoragarh Degree College. Directing the officers to increase the retirement age of professors to 65 year he laid emphasis on strictly following the standards set by Higher Education and University Grant Commission. He also asked them to fill the vacant post of Registrars and Controller of Examinations in Kumaon University and Uttarakhand Open University. He instructed them to give priority to university staff as per their qualifications.
 
Chief Minister Bahuguna stressed on encouraging students from SC, ST and minorities towards technical education. He also directed to establish ITI on PPP mode at Kot, Tharali, Khatima, Sahaspur and Bironkhal development block, Engineering College at Gopeshwar and Polytechnic College at Gairsen. 
 
The meeting was attended by Chief Secretary Alok Kumar Jain, Principal Secretary to Chief Minister DK Kotia, Principal Secretary Higher Education Rakesh Sharma and Secretary Finance Radha Raturi amongst others.

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