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बदरीनाथ धाम की नेपाली धर्मशाला में पसरा सन्नाटा

बदरीनाथ : में आए भूकंप के कारण बदरीनाथ धाम में नेपाली धर्मशाला में सन्नाटा छाया हुआ है। कपाट खुलने के बाद अभी तक यहां सिर्फ तीन यात्री ही आए हैं। वे भी भूकंप से पहले नेपाल से चले थे। धाम में रह रहे नेपाली तीर्थ पुरोहितों ने भूकंप से मरे लोगों की आत्मशांति के लिए जहां भगवान बदरी विशाल के आगे प्रार्थना की वहीं नेपाल में जल्द ही खुशहाली के लिए पूजा अर्चना भी की गई।

श्री बदरीनाथ धाम में पड़ोसी देश की एकमात्र धर्मशाला का निर्माण 1890 में तत्कालीन राजा श्रीतीन सरकार राणा ने किया था। तब से नेपाली धर्मशाला के रूप में बदरीनाथ में यह धर्मशाला संचालित होती रही है। श्री बदरीनाथ धाम में 1993 में हिमखंड से यह धर्मशाला टूट गई थी। इसका पुर्ननिर्माण तत्कालीन राजा श्रीपांच सरकार शाह शासन ने कराया था। नेपाल में भूकंप से पूर्व ही बदरीनाथ धाम के लिए यात्रियों का तीन सदस्यीय दल यहां आया था, लेकिन कपाट खुलने के बाद पूजा अर्चना कर वे तत्काल लौट गए हैं। जिला बाजुरा नेपाल के रहने वाले नंदराम पांडे कपाट खुलने के अवसर पर अपने दो साथियों के साथ यहां आए थे। उनका कहना है कि निसंदेह इस त्रासदी से नेपाल से बदरीनाथ की यात्रा का मन बना चुके लोगों की राह रुकी है। नेपाली तीर्थ पुरोहित भी नेपाल में भूकंप त्रासदी से परेशान हैं। नेपाल के तीर्थ पुरोहित डिमरी समुदाय के लोगों ने बदरीनाथ मंदिर में नेपाल त्रासदी में मरे लोगों की आत्मशांति के लिए प्रार्थना की, वहीं लोगों की खुशहाली के लिए पूजा अर्चना भी की। नेपाली धर्मशाला समिति के अध्यक्ष अरुण प्रसाद डिमरी का कहना है कि 2013 में आपदा से पहले श्री बदरीनाथ धाम की यात्रा पर नेपाल से यात्रा सीजन पर 50 हजार से अधिक यात्री आते थे, लेकिन आपदा के बाद गत वर्ष 1200 लोग ही आए हैं। अब इस साल नेपाल से यहां यात्रा करने वालों की संख्या बढऩे की उम्मीद थी, परंतु नेपाल में भूकंप की त्रासदी से उम्मीदों पर पानी फिरा है। श्रद्धांजलि देने वालों में धर्मशाला के प्रबंधक संजय डिमरी, नेपाल के पंडित संदीप डिमरी, सुमन डिमरी, मनोज डिमरी आदि शामिल थे।

 

CM directed support for disaster hit Nepal and its people

Dehradun : मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को बीजापुर अतिथि गृह में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि नेपाल से राज्य की सीमाएं लगी हुई है। ऐसे में वहां से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पूरा सहयोग दिया जाय। राज्य सरकार द्वारा टनकपुर व रूद्रपुर डिपो से उत्तराखण्ड परिवहन निगम की 25 बसे कांठमांडू भेजी गई है। इन बसों में मेडिकल किटए मिनरल वाटर एवं अन्य आवश्यक सामग्री भेजी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुक्त कुमांयूए जिलाधिकारी ऊधमसिंहगनरए पिथौरागढ़ व चम्पावत को निर्देश दिये गये है कि नेपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के सम्पर्क रहे। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिये कि नेपाल में रह रहे उत्तराखण्डवासियों का विवरण तैयार कर उनसे संपर्क किया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलाधिकारी हरिद्वार व ऊधमसिंहनगर को निर्देश दिये जाय कि नेपाल में भूकंप पीडि़तों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सामग्री एकत्रित करें। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि केन्द्र सरकार की अपेक्षाओं के अनुसार राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हमें नेपाल में आये भूकंप से सबक सीखना चाहिए। उन्होने कहा कि आपदा प्रबंधन सहित अन्य सभी विभाग आपस में समन्वय स्थापित करे। उत्तराखण्ड पर्वतीय राज्य है और भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील हैए इसलिए हमें किसी भी प्रकार की समस्या से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग और एसण्डीण्आरण्एफण् के अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिला स्तर पर गठित आपदा प्रबंधन इकाईयों को और मजबूत किया जाय। भूकंप आदि से निपटने के लिए जिन उपकरणों की आवश्यकता हैए उनका विवरण तैयार किया जाय। भूकंप के दृष्टिकोण से अति संवेदनशील स्थानों का चिन्हीकरण किया जाय। मुख्यमंत्री ने जिला स्तर पर गठित आपदा प्रबंधन इकाईयों को अतिरिक्त रूप से 50.50 लाख रुपये की धनराशि देने के भी निर्देश दिये। एसण्डीण्आरण्एफण् को और अधिक मजबूत किया जाय। आपदा प्रबंधन विभाग ऐसा तंत्र विकसित करेए जिससे भूकंप जैसी किसी भी आपदा के आने पर कम समय में अधिक से अधिक प्रशासनिक तंत्र को सतर्क किया जा सके। इसके लिए मुख्य सचिव से लेकर तहसीलदार तक सबके मोबाइल नंबर का डाटाबेस तैयार किया जायए ताकि तत्काल आवश्यकता पड़ने पर सबको एक साथ संदेश भेजा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधनए एसण्डीण्आरण्एफण् और स्वास्थ्य विभाग आपस में समन्वय स्थापित कर ऐसी टीम तैयार करेए जो भूकंप आदि घटनाओं से तत्काल निपटने में सक्षम हो।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसण्डीण्आरण्एफण् के अलावा 2000 पुलिस जवानों को भी तैयार किया जायए जो आपदा के समय त्वरित रूप से सहयोग दे सके। इसके लिए पुलिस विभाग एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करे। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि प्रदेश में मोटरसाईकिल एम्बुलेंस सेवा विकसित की जायए जो कम से कम समय में दुर्घटना स्थल पर पहुंच सके। इसमें मोटर बाईक का चालक पुलिस विभाग व एक स्वास्थ्य विभाग का कार्मिक तैनात रहेगा। एसण्डीण्आरण्एफण् एक वांलियटर कोर तैयार करेए जो आपात स्थिति में सहयोग करे। इसी प्रकार एनण्सीण्सीण्ए होमगार्डसए पीण्आरण्डीण्ए एनण्एसण्एसण्ए स्काउट के साथ भी संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किये जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जर्जर भवनों का विवरण भी तैयार किया जाय। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिये कि प्रदेश में बिल्डिंग बायोलाॅज के संबंध में अलग से बैठक बुलायी जाय।
 
बैठक में मुख्य सचिव एनण्रवि शंकरए अपर मुख्य सचिव राकेश शर्माए पुलिस महानिदेशक बीण्एसण्सिद्दूए प्रमुख सचिव एसण्रामास्वामीए सचिव लोनिवि अमित नेगीए सचिव आपदा प्रबंधन आरण्मीनाक्षी सुन्दरमए सचिव गृह विनोद शर्माए डीण्आईण्जीण् संजय गुंज्याल आदि उपस्थित थे। 
 

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