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Political killing in Bihar; RJD leader shot dead

Patna : A violent protest was triggered in Sapaul District of Bihar after a Rashtriya Janata Dal leader Ravinder Yadav, who had contested State Election in 2010 was shot dead today. Yadav was killed by unidentified men in a planned manner as he was asked to move out of the house by someone, as reported to police.

Angry over the killing, hundreds of Yadav’s supporters blocked roads and burnt tyres. The shops were closed, public transport haulted and even private vehicles were less to be seen on the roads. The situation was tense in the area untill special armed security forces were deployed in the area to take control. As per the resources some special aorders were also passed on the spot to bring the situation back to normal.

Yadav's family members, close family associates and supporters however have said that his murder was a preplaned political killing by his rivals; no names have been suggested yet.

It is being discussed that Yadav had a heated argument onThursday, the day before, during Lok Sabha polls over Supaul seat and he was even threatened for life by the rivals. Police has taken note of the same as a statement of the family.

AAP Candidate Cheema refused bail; will contest from lock up

Haldwani : AAP candidate Cheema with two of his associates were arrested on April 22 for staging a silent protest outside the SSP's camp office in Rudrapur against seizure of his campaign vehicle by the authorities.

Cheema alleged that his campaign vehicle was seized despite the fact that he had the required permission to use it for the purpose, terming the act as harrasment.

Udham Singh Nagar SSP Ridhim Agarwal said, "14 other AAP party workers arrested for the same offence were let out on bail but Cheema and two of his associates refused to take bail and were sent to jail."

On the other hand senior party workers of the state are accusing the police for harassing the candidate under pressure and have stated that Cheema has been arrested for no offence and so he is not opting out for a bail. "Now he has decided not to take bail and contest the elections from Haldwani jail," Shamsher Singh Bisht said.

Demanding immediate removal of the police officials posted in Udhamsingh Nagar district, Bisht said fair polls cannot be expected in Nainital without their transfer.

It is being discussed that  AAP leaders like Kumar Vishwas and Shazia Ilmi are likely to visit Cheema in jail in the next couple of days.

चुनाव नामांकन का पहला दिन : सभी दलों ने खोले पत्ते

देहरादून 12 अप्रैल : मौसम में भले ही अभी वह गरमाहट महसूस न की जा सकी हो, मगर लोकसभा चुनाव के समर में राज्य की राजनीति में गरमाहट देखी जा रही है। सभी दलों की ओर से पत्ते खोल दिए गए हं। ऐसे में सभी उम्मीद्वार 'हर ओर अपना शौर का फण्डा अपनाते हुए प्रसार प्रचार में व्यस्त दिखाई पड़ रहे हैं। देश की १६वीं लोकसभा में जनता किसे स्पष्ट बहुमत के साथ कुर्सी में बैठाएगी और किसे नकारेगी, यह अभी भविष्य के गर्भ में छिपा है। राज्य में दल प्रत्याशियों के बीच रस्साकसी चरम पर है। वहीं कुछ निर्दलीयों की ओर से भी मैदान में कूदकर 'नाक में दम करने वाली परिपाठी अपनाने की तैयारी पूरी कर ली है। 

राज्य की पांचो लोकसभा सीटों में क्रमवार तरीके से चलें तो टिहरी गढ़वाल में कुल १२८५०७१ मतदाता अपने सांसद का चुनाव करेंगे। यहां भाजपा से माला राजलक्ष्मी शाह मैदान में हैं जिन्हें कि राज परिवार का होने के नाते जनता से उम्मीद बढ़ी होगी। टिहरी सीट से कांग्रेस के साकेत बहुगुणा पिछली दफा हार के बाद भी निष्क्रिय नहीं हुए बल्कि अतिसक्रिय दिखे और पार्टी के अधिकांश जन हितैषी कार्यक्रमों का हिस्सा बने। टिहरी सीट पर बसपा अपने उम्मीद्वार शीषपाल से बड़ी आस लगाए बैठी होगी। वहीं आप की ओर से अनूप नौटियाल से उम्मीदों की डोर बांधी गई है। यहां राष्ट्रीय लोकदल ने कुंवर जपेन्द्र सिंह पर दांव खेला है। 

पौड़ी लोकसभा सीट की बात करें तो यहां कुल १२०४५५८ मतदाता अपने नए सांसद का चुनाव करेंगे। यहां भाजपा से उत्तराखण्ड का अपना लोकपाल कानून बनाने वाले दिग्गज नेता भुवन चन्द्र खण्डूड़ी मैदान में हैं। कांग्रेस से उनके सामने हरक सिंह के तौर पर एक दमदार प्रत्याशी खड़े हैं। वहीं बसपा ने इस सीट से धीर सिंह को आजमाया है। जबकि आम आदमी पार्टी की ओर से पौड़ी सीट से राकेश नेगी को उम्मीद्वार बनाया गया है। बात अगर करें अल्मोड़ा लोकसभा सीट की तो यहां १२०५६६३ कुल मतदाता हैं। जो कि भाजपा के अजय टम्टा, कांग्रेस के प्रदीप टम्टा, बसपा के बीआर धौनी तो आम आदमी पार्टी के हरीश आर्य की कुर्सी की 'कथाÓ अपने मतों से लिखेंगे। नैनीताल लोकसभा सीट की बात की जाए तो यहां कुल १५३७७९५ मतदाता भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री और नैनीताल लोकसभा प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी, कांग्रेस के निवर्तमान सांसद केसी सिंह बाबा, बसपा के लईक अहमद, आम आदमी पार्टी के बल्ली सिंह चीमा में किसी के लिए जन मत तो किसी के लिए जन हारा वाली स्थिति बनाएंगे। राज्य की अंतिम सीट हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां के १५५३३०७ कुल मतदाता जो कि बसपा के हाजी इस्लाम, आम आदमी पार्टी की उम्मीद्वार कंचन चौधरी (आप की ओर से यहां उत्तराखण्ड की पूर्व डीजीपी कंचन चौधरी ताल ठोंके हुए हैं।), भाजपा के डा. रमेश पोखरियाल निशंक तथा कांग्रेस की उम्मीदवार रेणुका रावत के लिए भविष्य की राजनीति की गाथा लिखेंगे।  

कांग्रेस से ज्यादा भाजपा बैचेन !

देहरादून : राज्य कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशियों की घोषणा न होना प्रदेश भाजपा में बैचेनी बढ़ाए हुए हैं। हालांकि दो सीटों पर सीटिंग गेटिंग वाला फार्मूला अपनाया गया है। मगर बाकी की तीन सीटों पर कहा तो जा रहा कि कशमकश समाप्त हो चुकी है, मगर प्रत्याशियों की घोषणा में देरी की जा रही है। बहरहाल आज फिर कांग्रेस के टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी के प्रत्याशियों के नाम जल्द घोषित होने की कयासबाजी लगती रही। कांग्रेस के प्रत्याशी घोषित न होने से जहां कार्यकर्ताओं में वह जुनून देखने को मिल रहा, बल्कि खुद भाजपा भी बैचेन दिख रही है। 

१७ मार्च को पांचो लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर भले ही राज्य भाजपा ने चुनावी बिगुल की शुरूआत करने में बढ़त पा ली हो, भले ही प्रसार प्रचार में भाजपा जनता के बीच सीधे अपने प्रत्याशियों के नाम लेकर पहुंच रही हो, मगर अंदरखाने की माने तो एक अजीब सी बैचेनी भाजपा में चहूं ओर है। यह बैचेनी पार्टी, संगठन स्तर पर तो बढ़ी ही है जबकि खुद टिहरी, पौड़ी और हरिद्वर के भाजपा प्रत्याशी प्रतिद्वंदी चेहरे को लेकर असमंजस के हालात में खड़े हैं। भाजपा के प्रचार प्रसार में मोदी की लहर महसूस की जा रही है। राजनीति के जानकारों की माने तो भले ही भाजपा ने विरोधी आवाजों को शंात करने में सफलता पा ली हो, और विरोध का बिगुल बजाने वालों को प्रचार प्रसार का काम देकर व्यस्त कर दिया हो। मगर कांग्रेस की रणनीति समझ नहीं आ रही है। 

अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, हरिद्वार और नैनीताल सभी सीटों पर टिकट बंटवारे के बाद मचे तुफान को अब फिलहाल शांत महसूस किया जा रहा है। नैनीताल प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी के आज रामनगर की जन संपर्क रैली में शामिल बचदा का जुनून देखते ही बना। नैनीताल सीट पर दावेदारी खारिज होने के बाद बची दा के बिगड़े सुरों को सभी देख चुके हैं। मगर अब बचदा को नैनीताल के भाजपा प्रत्याशी की चुनावी प्रचार प्रसार रैली में जुटना कुशल मैनेजमेंट को बयां कर रहा है। कुछ ऐसा ही हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी और अल्मोड़ा सीट को लेकर कहा जा सकता है। बहरहाल जिस तरह से खुद राज्य कांगे्रस कार्यकर्ता अपने प्रत्याशियों को लेकर बैचेनी बढ़ाए हुए हैं ठीक उससे अधिक भाजपा के प्रत्याशियों की बैचेनी बढ़ी हुई है। जानकारों की माने तो समय-समय पर उछल रहे नामों को लेकर भाजपा के रणनीतिकार असमंजस के हालात में दिख रहे हैं। पहले सभी सीटों पर तय माने जा रहे नामों के आधार पर रणनीति बनाई गई थी। टिहरी से साकेत, पौड़ी से हरक और हरिद्वार से पैराशूट प्रत्याशी की संभावना को देखते हुए रणनीतिकार पार्टी आलाकमान से हर क्षण शेयर कर रहे हैं। 

 

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