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जल्द लागू होगा क्लीनीकल इस्टेब्लीस्टमेंट एक्ट

देहरादून : उत्तराखंड राज्य में अगले माह तक क्लीनीकल इस्टेब्लीस्टमेंट एक्ट लागू हो जाएगा। जिसके बाद सरकारी तंत्र का प्राईवेट नर्सिंग होम पर नियंत्रण होगा और मनमाफिक फीस वसूली पर लगाम लग पाएगी। इस एक्ट को लागू करने की पूरी तैयारी हो गई है। इस बात का दावा प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने की। 

पिछले लंबे समय से राज्य में क्लीनीकल इस्टेब्लीस्टमेंट एक्ट को लागू करने के लिए कसरत की जा रही है। लेकिन आईएमए से जुड़े डाक्टरों के विरोध के चलते यह एक्ट अभी तक लागू नहीं हो पाया। कुछ समय पहले प्रमुख सचिव स्वास्थ्य की अध्यक्षता में आईएमए से जुड़े डाक्टरों के साथ बैठक भी हुई। इस एक्ट के लागू होने से सभी प्राईवेट नर्सिंग होम/क्लीनिकल/अस्पतालों की गुणवत्ता और फीस वृद्धि पर सरकारी नियंत्रण होगा। वर्तमान में प्राईवेट नर्सिंग/क्लीनिक मनमाफिक फीस वसूल रहे हैं। लेकिन इस एक्ट के बाद फीस की मनमानी पर रोक लगेगी। यही कारण है कि कई प्राईवेट चिकित्सक इस एक्ट का विरोध कर रहे हैं। क्योंकि वर्तमान में अधिकांश प्राईवेट क्लीनिक और नर्सिग होम में मरीजों से बेहतासा फीस वसूली जाती है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ होने के कारण ज्यादातर मरीज प्राईवेट नर्सिग होम से उपचार कराना बेहतर समझते हैं। जहां मरीजों से मोटी फीस वसूली जाती है। इस एक्ट को राज्य में लागू करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। लेकिन प्राईवेट डाक्टरों के दबाव के चलते स्वास्थ्य महकमा अभी तक इस एक्ट को लागू नहीं कर पाया। लेकिन माना जा रहा है कि केंद्र द्वारा इस सबंध में गंभीरता जताने के बाद अब इसे उत्तराखण्ड राज्य में जल्द लागू किया जा सकता है। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ओम प्रकाश ने बताया कि अब इस एक्ट को लागू करने की तैयारी है। अगले माह तक राज्य में क्लीनीकल इस्टेब्लीस्टमेंट एक्ट लागू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि एक्ट को बजट सत्र में लाने की आवश्यकता नहीं है। लिहाजा इस एक्ट को लागू करने कोई दिक्कत नहीं होगी। 

बताते चले कि उत्तराखंड राज्य में चिकित्सकों की कमी और पहाड़ मैदान के बीच बढ़ती खाई के कारण मरीजों की भीड़ मैदानी जनपदो में बढ़ी है। जिसके चलते बड़ी संख्या में नर्सिंग होम और प्राईवेट अस्पताल खुले हैं। ज्यादातर अस्पतालों और नर्सिंग होम में मरीजों को छोटी सी बीमारी के उपचार के लिए भी मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। हालात यह है कि उपचार के दौरान पैथोलॉजी टेस्ट से कराने से लेकर तमाम जांचों के लिए मरीजों से मोटी फीस वसूली जाती है। यही नहीं हर प्राईवेट नर्सिंग होमों की फीस अलग है और फीस बढ़ोत्तरी भी अपने हिसाब से की जाती है। इसके लिए कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है। इस एक्ट की प्रमुख बात यह बताई जा रही है कि बेहतासा फीस बृद्धि रूकेगी और सभी नर्सिंग होम और अस्पतालों को टें्रड स्टाफ रखना होगा। इस बिंदु को लेकर भी कई प्राईवेट चिकित्सकों ने इस एक्ट का विरोध किया है।

 

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