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सात महिने से रहस्य बना है अमित शाह का मामला

देहरादून। लापता लोगों की तलाश करने में दून पुलिस कितनी संजीदगी बरतती है इसका एक जीता-जागता उदाहरण अमित शाह का मामला है। गत २७ जुलाई से गायब अमित शाह की फाईल तक पुलिस ने बंद कर दी है और परिजन भी पूरी तरह से निराश होकर अपने घरों में बैठ गए हैं। वहीं पुलिस की मानें तो इस मामले में हर तरह की जांच कर ली गयी है लेकिन अमित के बारे में तिल भर सुराग भी नहीं मिल पाया। अधिकारी अभी इस मामले में जांच की बात कर रहे हैं लेकिन वर्तमान में यह मामला पुलिस की जांच सूची से ही गायब है।

आईआईएम राजपुर में एडमिशन हैड के तौर पर काम करने वाला अमित शाह संदिग्ध परिस्थितियों में आज से सात माह पूर्व गायब हो गए थे। २७ जुलाई को वह अपने कार्यालय तो पहुंचे लेकिन इसके बाद अपने घर नहीं पहुंचे। रात तक जब अमित घर नहीं आए तो उनकी तलाश शुरू की गयी। उनकी कार आईएसबीटी की पार्किग में बरामद की गयी थी। अमित के दोस्त पुलिस को वहां लेकर पहुंचे और बाद में कार की तलाशी ली गयी। कार में मिली वस्तुओं के आधार पर इस बात की भी पुष्टि हुई कि कार में अमित अकेला नहीं था। अमित की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की गयी लेकिन बावजूद इसके अमित कहीं नहीं मिला। डालनवाला पुलिस ने अमित के कुछ साथियों को हिरासत में लेकर पूछताद की, मगर परिणाम ढाक के तीन पात ही रहे। पुलिस की कार्यशैली का विरोध करते हुए स्थानीय लेागों ने तीन दिन तक डालनवाला के आगे जाम लगाया लेकिन पुलिस की तरफ से कोई सकारात्मक कदम न उठने के बाद परिजनों एवं स्थानीय लोगों का धैर्य भी टूटने लगा। थकहार कर लोग भी अपने घरों में बैठ गए। 

वहीं अमित के परिजन अपने स्तर पर भी अमित शाह को तलाश करने की कोशिशों में लगे रहे जबकि पुलिस ने अमित के सभी संभावित ठिकानों पर उसकी तलाश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन समय के साथ ही पुलिस ने इस जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अमित शाह को लापता हुए लगभग सात माह हो चुके हैं और अब धीरे-धीरे अमित प्रकरण की यादें भी धुमिल पड़ती जा रही हैं, लेकिन अमित के परिजनों की उम्मीद अभी बनी हुई हैं। पुलिस से निराश हो चुके परिजन अपने स्तर पर सभी प्रयास कर रहे हैं। आईआईपीएम के उसके सहयोगियों ने भी अमित के बारे में सभी जानकारियां अपने स्तर पर मुहैया करा दी हैं। वहीं इस मामले को लेकर अमित के परिजनों ने सीबीसीआईडी, सीबीआई से भी जांच कराने की मांग की। सीबीआई ने डालनवाला पुलिस से इस मामले को लेकर संपर्क भी साधा था।
 
प्रकरण की जांच कर रहे उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह खोलिया ने बताया कि अमित शाह प्रकरण अभी भी जांच के दायरे में है। अमित की तलाश के लिए अब तक पुलिस टीमें दिल्ली, हिमाचल, पंजाब, चंडीगढ, सहारनपुर, मुज्जफरनगर, रूडकी, हरिद्वार एवं मंगलौर सहित कई राज्यों एवं नगरों में छानबीन कर चुकी है। इसके अतिरिक्त अमित शाह की चार सौ से अधिक कॉल डिटेल्स भी छानी गयी हैं लेकिन कोई सुराग अब तक हाथ नहीं लग पाया है। बहरहाल अमित शाह की गुमशुदगी का मामला जस का तस ही बना हुआ है। पुलिस के पास तिल भर भी सुराग नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि पूरे प्रकरण के पीछे कोई गहरी साजिश एवं षडयंत्र का तार जुड़े हुए हैं।
 

फुटेज के बावजूद लुटेरों तक नहीं पहुंची पुलिस

देहरादून। सर्राफ की दुकान में घुसे बदमाशों की फुटेज उपलब्ध कराने के बावजूद भी पुलिस अभी तक अंधेरे में ही हाथ पैर मार रही है। इस मामले में कोतवाली पुलिस की भूमिका को लेकर नेशविला रोड के व्यापारियों ने कोतवाली में प्रदर्शन किया एवं जल्द से जल्द इन लुटेरों की गिरफ्तारी न होने की दशा में आंदोलन किया जाएगा। वहीं व्यापारियों से वार्ता करते हुए कोतवाली पुलिस ने जल्द से जल्द इस मामले का खुलासा करने का आश्वासन दिया।

नेशविला रोड पर वंदना ज्वेलर्स में लूट का खुलासा करने में पुलिस को अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। दुकान में घुसे लुटेरों की फुटेज पुलिस को उपलब्ध करा दी गयी थी लेकिन बावजूद इसके दोनों बदमाशों के बारे में पुलिस को कोई सुराग अभी तक नहीं मिल पाया है। दुकान स्वामी मनीष का कहना था कि फुटेज के बाद भी पुलिस इन लुटेरों को दबोचने में तत्परता नहीं दिखा रही है। पुलिस की कार्यशैली के विरोध में आज भारी संख्या में व्यापारी कोतवाली पहुंचे और कोतवाली में प्रदर्शन करते हुए घेराव किया। व्यापारियों का कहना था कि दून में बदमाशों के ईरादे बुलंद होते जा रहे हैं जबकि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। वंदना ज्वेलर्स में घुसे  बदमाशों  के फुटेज पुलिस को दिए गए थे लेकिन फिर भी इन बदमाशों को अब तक तलाशा नहीं जा सका है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि इन बदमाशों को बेनकाब नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

वहीं प्रभारी निरीक्षक दिनेश चंद्र बौंठियाल ने बताया कि फुटेज के आधार पर बदमाशों को दबोचने की पूरी तैयारी चल रही है। बदमाशेां तक पहुंचने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है और जल्द ही एक ही दिन में दो लूटों को अंजाम देने वाले इन बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने व्यापारियों को आश्वासन दिया और इस मामले में पूर्ण सहयोग करने की बात कही। 
 

दो युवतियों का हाथ पकडक़र कर राह चलते घसीटा

देहरादून। अलग-अलग मामलों में दो युवतियों से छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई गयी है। एक मामले में तो छेड़खानी का विरोध करने पर मनचलों ने युवती के पिता के साथ ही मारपीट कर डाली और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस अब आरोपियों की तलाश कर रही है। पुलिस के अनुसार दोनों मामलों में आरोपियों के ठिकानों पर दबिशें दी जा रहीं हैं लेकिन दोनों ही अपने घरों से फरार हैं।
 
दून में मनचलों के मंसूबे किस प्रकार से बेलगाम हो हो चुके हैं इसकी एक बानगी बसंत विहार थाना क्षेत्र में देखने में आई। यहां मनचलों ने राह चलती एक युवती का सरेआम हाथ पकड़ लिया और उसे अपने साथ खींचने का प्रयास किया। लडक़ी ने किसी तरह से अपनी जान बचाई और अपनी मां को इस घटना के बारे में बताया। घटनाक्रम के अनुसार शास्त्रीनगर खाला की एक युवती अपने घर लौट रही थी। तभी क्षेत्र के रोहित व उसके कुछ अन्य साथियों ने युवती के साथ छेड़खानी शुरू कर दी। युवती ने विरोध किया तो इन युवकों ने उसे जबरन खींचने का प्रयास किया। लडक़ी ने शोर मचाया तो लडक़े वहां से भाग निकले। घर आने के बाद परिजनों ने रोहित व उसके साथियों की तलाश शुरू की। कुछ ही देर में रोहित युवती के पिता को मिला। पिता ने उसे उसकी इस हरकत के लिए डांटा तो रोहित ने युवती के पिता के साथ ही मारपीट करनी शुरू कर दी और जान से मारने की धमकी दी। बाद में रोहित व अन्य युवकों के खिलाफ बसंत विहार में मामला दर्ज किया गया।
 
वहीं ऐसे ही एक अन्य मामले में पटेलनगर में भी एक युवक ने युवती के साथ पहले छेड़छाड़ की और बाद में उसे जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। बंजारावाला निवासी अक्षय भट्ट ने इस मामले की शिकायत पटेलनगर पुलिस को दी। शिकायत में बताया कि उसकी बहन को आशीष गौड निवासी आजाद विहार लंबे समय से परेशान करता आ रहा है। इस संबंध में आशीष को कई बार समझाया एवं डांटा भी गया था लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। इसी दौरान कल आशीष ने अक्षय की बहन को रास्ते में पकड़ लिया और उसका हाथ पकडक़र उसे जबरन अपने साथ ले जाने का प्रयास किया लेकिन लडक़ी द्वारा विरोध करने पर वह उसे जान से मारने की धमकी देता हुआ चंपत हो गया। दोनों ही मामलों में अब आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की गयी है लेकिन दोनों मनचलों में से किसी भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। 
 

पासपोर्ट तेजी से बनाने के लिए अभियान

देहरादून। स्थित पासपोर्ट कार्यालय इन दिनों पासपोर्ट तेजी से बनाने के लिए अभियान चला रहा है। पासपोर्ट अधिकारी श्री जय कुमार ने बताया कि इस वर्ष हज यात्रा पर जाने के इच्छुक पासपोर्ट आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे शीइा्र पासपोर्ट के लिए आवेदन करें, जिससे उन्हें समय पर पासपोर्ट जारी किया जा सके। इसके अलावा टॉयफैल और जी. आर. ई. आदि परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को भी चाहिए कि वे जल्दी आवेदन करें, ताकि अभियान के तहत उन्हें शीइा्र पासपोर्ट दिया जा सके। पासपोर्ट के लिए आवेदन देहरादून में एमकेपी इंटर कॉलेज के पास 12, न्यू रोड स्थित पासपोर्ट कार्यालय में जमा कराए जा सकते हैं। 

 

पासपोर्ट तेजी से बनाने के लिए अभियान

देहरादून। स्थित पासपोर्ट कार्यालय इन दिनों पासपोर्ट तेजी से बनाने के लिए अभियान चला रहा है। पासपोर्ट अधिकारी श्री जय कुमार ने बताया कि इस वर्ष हज यात्रा पर जाने के इच्छुक पासपोर्ट आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे शीइा्र पासपोर्ट के लिए आवेदन करें, जिससे उन्हें समय पर पासपोर्ट जारी किया जा सके। इसके अलावा टॉयफैल और जी. आर. ई. आदि परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को भी चाहिए कि वे जल्दी आवेदन करें, ताकि अभियान के तहत उन्हें शीइा्र पासपोर्ट दिया जा सके। पासपोर्ट के लिए आवेदन देहरादून में एमकेपी इंटर कॉलेज के पास 12, न्यू रोड स्थित पासपोर्ट कार्यालय में जमा कराए जा सकते हैं। 

 

168 पदों पर नियुक्तियों के लिए साक्षात्कार शुरू

श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों में शिक्षकों के 168 पदों पर नियुक्तियां करने को लेकर शनिवार से इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू हो गई। यह इंटरव्यू मध्य मार्च तक चलेंगे। शनिवार को लॉ विभाग में नियुक्तियों के लिए इंटरव्यू हुआ। इनके साथ ही प्रवक्ता और रीडर को करियर एडवांस स्कीम के तहत व्यक्तिगत प्रमोशन देने के लिए भी इंटरव्यू होने जा रहे हैं।

गढ़वाल विवि की 11वीं योजना के तहत 110 स्वीकृत पदों पर नियुक्तियों के लिए यह इंटरव्यू हो रहे हैं जिसमें प्रोफेसर के 11, एसोसिएट प्रोफेसर (रीडर) के 21 और असिस्टेंट प्रोफेसर (प्रवक्ता) के 78 पद हैं। कुलसचिव डा. उदय सिंह रावत ने कहा कि पहले से रिक्त चले आ रहे 58 पदों पर भी नियुक्तियां देने को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें प्रोफेसर के छह, एसोसिएट प्रोफेसर के 14 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 38 पद शामिल हैं। डॉ. रावत ने कहा कि यह इंटरव्यू मध्य मार्च तक चलेंगे।

उल्लेखनीय है कि गढ़वाल विवि के श्रीनगर, पौड़ी, टिहरी तीनों परिसरों में विभिन्न विषयों में शिक्षकों के कई पद रिक्त होने के साथ ही शिक्षकों की कमी भी चली आ रही है। केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद गढ़वाल विवि प्रशासन ने शिक्षकों की कमी दूर करने को प्राथमिकता दी। इस पर यूजीसी ने प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के 110 पदों पर स्वीकृति दी। जिन पर मार्च 2012 तक नियुक्तियां करना भी जरूरी है।
 

करोड़ों खर्च पर नहीं सुधरी हालत

गोपेश्वर। पौने दो करोड़ रुपये रुपये खर्च करने के बाद भी बैरासकुंड के ग्रामीणों को यातायात की सुविधा नहीं मिल पाई है। सडक़ पर आधा अधूरा कार्य छोडक़र निर्माण एजेंसी ने कार्य बंद कर दिया है।
 
वर्ष 2005 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के तहत मोलागाड़ मटई बैरासकुंड मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली थी। तकरीबन 11 किलोमीटर इस सडक़ के निर्माण के लिए 1 करोड़ 79 लाख रुपये भी विभाग को मिले। सात साल बीतने के बाद बाद भी अभी तक इस मोटर मार्ग पर कटिंग कार्य पूरा नहीं हो पाया है। डेढ़ वर्ष से इस मोटर मार्ग पर कार्य इसलिए बंद कर दिया गया है क्योंकि विभाग का कहना है कि उनके पास सडक़ निर्माण के लिए धनराशि ही नहीं बची हुई है। ग्रामीण भाष्कर पुरोहित का कहना है कि अभी तक उन्हें सडक़ सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है। उससे बड़ी बात यह कि अधिकांश ग्रामीणों को मुआवजा भी न मिलने से भी यहां के ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है। इधर, विभाग ने इसी सडक़ के नाम पर फिर से 1 करोड़ 20 लाख का री-इस्टीमेट शासन को भेज दिया गया है।
पीएमजीएसवाई के जेई यतेंद्र सिंह रावत ने आरएनएस संवाददाता को बताया कि मोलागाड़ बैरासकुंड मोटर मार्ग कटिंग का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। कुछ हिस्सा बचा हुआ है। विभाग के पास धनराशि का अभाव है। इस सडक़ निर्माण के लिए 1.20 करोड़ का री-इस्टीमेट शासन को भेजा गया है।
 
ग्रामीण योगेंद्र रावत ने कहा कि सडक़ सुविधा प्राप्त करने के लिए ग्रामीणों ने अपनी उपजाऊ भूमि भी विभाग को दे दी। लेकिन अभी तक अधिकांश ग्रामीणों को मुआवजा नहीं दिया गया है ।
 

Uttarakhand Roadways increases bus fares

Dehradun: Uttarakhand Roadways Corporation has been bearing a loss of around Rs. 150 carore a year and to cope up with the same the corporation has increased the fares of its hi-tech and ordinary buses by 29 per cent. Last time the fares were increased in April 2010.

 
Passengers have to pay the fare in ordinary buses at the rate of 81 paise per km in plains and Rs 1.26 per km in the hilly areas. The previous fare was 63 paisa per km in plains, and 92 paisa in hills. 
 
Similarly, for travelling in hi-tech buses the passengers would now have to pay at the rate of Rs 1.37 per km in the plains and Rs 1.62 per km in the hilly areas. The previous fare of hi-tech buses was Rs 1.07 a kilometer for plains, and for hills it was Rs 1.47 for a kilometer.
 
The new fares have now been applicable.
 
 
 

Supreme Court order on 2G Scam : 122 licences to be cancelled

New Delhi: 122 Telecom Licences to be cancelled as ordered by The Supreme Court on Thursday.

 
India is divided into 22 telecoms zones and there are a total 281 zonal licences in the market of 894 million users and 15 mobile operators, led by Bharti Airtel, Idea Cellular, Reliance Communications and Vodafone's India unit. Each zone has different market leader, moreover, in certain zones the market leaders for Prepaid and Postpaid are different.
 
The Central Bureau of Investigation ( CBI) says that in 2008, when India issued 122 new telecoms licences, several rules were violated and bribes were paid to favour certain firms. The same had taken a shape of a scandal and the same has been much discussed everywhere. Several operating licences were issued to companies with no prior experience in the telecoms sector or were ineligible or had suppressed relevant facts, the CAG said in its report.
 
A Raja, the telecoms minister then and a member of the DMK in UPA government, has been charged with flouting telecoms rules and accepting bribes to favour some firms, and is in jail. The violations cost the exchequer as much as $36 billion in lost revenue, the auditor said, equivalent to India's defence budget.
 
Following are the companies affected by Thursday's ruling and the number of zonal licences issued to them in 2008.
 
UNITECH WIRELESS -- 22 licences
 
Group companies of Indian realty firm Unitech Ltd that were given 22 telecoms licences had not fulfilled eligibility norms for getting these licences, the state auditor has said.
 
The companies had suppressed facts, had less share capital than required, and submitted false certificates for paid up capital among other deficiencies found, the auditor said.
 
The telecoms venture has since been bought into by Norway's Telenor, which currently owns 67.3 percent of the venture with Unitech holding the remainder.
 
LOOP TELECOM PRIVATE LTD -- 21 licences
 
Loop Telecom, which was issued 21 telecoms licences, suppressed facts, its authorised share capital was much less than required, and it did not have telecom as the main object clause in its memorandum of association among other flaws, the auditor has said.
 
VIDEOCON TELECOMMUNICATIONS -- 21 licences
 
Videocon Telecommunications, formerly Datacom Solutions, is part of the Videocon group and was issued 21 licences. The auditor said the company had suppressed facts, had much less-than-required authorised share capital and submitted false certificates regarding the company's paid-up capital.
 
ETISALAT DB TELECOM PRIVATE LTD -- 15 licences
 
Formerly Swan Telecom, the company had been given 13 licences and also later merged with itself another firm that had won 2 licences. Abu Dhabi's Etisalat in late 2008 bought about 45 percent of the company that was then renamed Etisalat DB Telecom.
 
The auditor said Swan had suppressed facts, had less-than-required authorised share capital, and submitted false certificates from its company secretary regarding paid-up capital.
 
The auditor also said a unit of Reliance Communications, India's No. 2 telecoms company, held more than 10 percent equity in Swan at the time of issue of the licences, which is a violation of rules. Reliance Communications has denied the allegation.
 
S TEL LTD -- 6 licences
 
S Tel, which was given six licences, suppressed facts, had much less than the authorised share capital required to get the licences, submitted false certificate from its company secretary regarding paid up capital, the auditor said.
 
Bahrain Telecommunications Co owns a stake in S Tel, whose other major shareholder is Siva Group.
 
SISTEMA SHYAM TELESERVICES -- 21 licences
 
Sistema Shyam, which was given 21 licences in 2008, is a joint venture between Russian conglomerate Sistema and Shyam Group. Sistema owns majority stake of the company, while the Russian government also has a stake in Sistema Shyam.
 
IDEA CELLULAR -- 13 licences
 
Idea Cellular, which was given 9 more licences in 2008, is India's No. 4 mobile operator by subscribers. It now owns Spice, which was also given 4 licences in 2008. Idea said it is using seven of the 13 licences to be revoked.
 
TATA TELESERVICES -- 3 licences
 
Tata Teleservices, which won 3 licences in 2008, is part of India's salt-to-software Tata conglomerate. In 2008, Japan's NTT DoCoMo bought 26 percent of Tata Teleservices.
 

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