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चुनाव में आर्थिक भ्रष्टाचार है मुख्य मुद्दा : मुख्य चुनाव आयुक्त

देहरादून। मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने चुनाव में आर्थिक भ्रष्टाचार को मुख्य कारण बताते हुए शुक्रवार को यहां कहा कि धन बल चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
 
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य के दो दिवसीय दौरे पर आए कुरैशी ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि चुनाव में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं और चुनाव जीतने के बाद उसकी वसूली में लोग लग जाते हैं। यही आर्थिक भ्रष्टाचार का मुख्य कारण हो गया है।
 
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि आर्थिक भ्रष्टाचार की बुनियाद तो चुनाव से ही शुरू होती है। इसलिए इसको रोकने के लिए आयोग द्वारा कई ऐहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
 
उन्होंने कहा कि विभिन्न पार्टियों के साथ मुलाकात में उन लोगों को पेड न्यूज के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है तथा चुनावी खर्चे के लिए अलग से विशेष खाता खोलने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कुरैशी ने बताया कि विभिन्न पार्टियों से बातचीत तथा अधिकारियों से मुलाकात के बाद उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले खर्चे को नियंत्रित करने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई।
 
कुरैशी ने बताया कि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों द्वारा की जाने वाली जनसभा की वीडियो रिकार्डिंग कराई जाएगी तथा पर्यवक्षकों द्वारा एक शैडो रजिस्टर भी रखा जाएगा, जिसमें उम्मीदवार के खर्चे का अनुमानित विवरण दर्ज किया जाएगा और उसे उम्मीदवार के रजिस्टर से मिलान किया जाएगा। यदि कोई अंतर आएगा तो उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विधानसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के लिए 11 लाख रुपये के खर्च की सीमा तय की गई है। इसमें उम्मीदवारों का प्रत्येक चुनावी खर्च शामिल है। सभी उम्मीदवार को 14 दिनों में कम से कम तीन बार अपना रजिस्टर पर्यवेक्षक के सामने पेश करना होगा। कितनी सभाएं की गईं और कितने दौरे किए गए इसका भी विवरण देना होगा।
 
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि पर्यवक्षकों को आदेश दिया गया है कि किसी प्रकार चुनावी गड़बड़ी के बारे में मीडिया की रिपोर्टों का भी संज्ञान लें। उन्होंने कहा कि किसी के द्वारा शिकायत किए जाने का इंतजार नहीं करें, क्योंकि मीडिया तो चुनाव आयोग की आंख और कान हैं।
 

उत्तराखंड जनमंच ने चुनाव तिथि को संशोधित करने की दरखास्त

देहरादून :  अवैज्ञानिक और अलोकतांत्रिक कहते हुए तिथि में संशोधित करने की दरखास्त एक ज्ञापन भेज के की ।
 
ज्ञापन
 
सेवामें
श्रीमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त
भारत ,नई दिल्ली
 
        विषय- अवैज्ञानिक और अलोकतांत्रिक मतदान तिथि में परिवर्तन के विषय में
 
महोदय,
 
आप भली भांति अवगत हैं कि भारतीय राष्ट्र एक लोकतांत्रिक देश है और हम सब 21 वीं सदी में हैं जब हमारे पास निर्णय लेने के लिए वैज्ञानिक उपकरण और समझ मौजूद है।मैं आपके ध्यान में यह भी लाना चाहूंगा कि चुनाव सिफ मतदान संपन्न कराने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह मतदाताओं के पास राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की नीतियों और कार्यक्रमों को भली भांति परखने और उन्हे स्वीकार करने या नामंजूर करने की लंबी और जटिल लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। चुनाव आयोग का काम सिर्फ मतदान या चुनाव प्रचार के कायदे- कानून लागू करने की मैकेनिकल कवायद करना नहीं है। आयोग का काम वोट देने के निर्णय तक पहुचने में मतदाता की कठिनाईयों को सरल करना भी है। आम तौर पर चुनाव आयोग निर्वाचन को एक ब्यूरोक्रेटिक एक्सरसाइज मानकर इसे जैसे-तैसे कराता नजर आता है। कम से कम उत्तराखंड के चुनाव कार्यक्रम को देखकर यही लगता है कि यह पूरा कार्यक्रम हड़बड़ी में जमीनी जानकारी व वैज्ञानिक दृष्टि के बिना ही तैयार कर दिया गया है। खेदजनक यह भी है कि ऐसा लोकतांत्रिक विचार विमर्श को ताक पर रखकर नौकरशाही अहंकार के प्रभाव में किया गया है।
 
उत्तराखंड जनमंच इस मतदान तिथि को अव्यवहारिक, अलोकतांत्रिक, अवैज्ञानिक और अहंकार प्रेरित मानते हुए इसे निम्न आधारों पर संशोधित करने का आग्रह करता है क्योंकि-
 
01- उत्तराखंड, की 43 विधानसभा सीटें उन पहाड़ी क्षेत्रों में हैं जहां जनवरी के महीने न्यूनतम तापमान 07 डिग्री से कम होता है। इनमें से 28 सीटें ऐसी हैं जहां कड़ाके की ठंड पड़ती है और न्यूनतम तापमान शून्य के आसपास होता है और दिन का तापमान 10 डिग्री से भी नीचे होता है। इन सीटों पर पाला सड़कों पर जमकर कांच की तरह सख्त हो जाता है। ऐसे में इन सड़कों पर दोपहर से पहले वाहन चलाना मौत को दावत देना हैं। राज्य के 38 प्रतिशत मतदान केंद्र ऐसे स्थानों पर हैं जहां हिमपात होता है या फिर वहां की आबोहवा बेहद प्रतिकूल होती है। 
 
02- अभी तक जो राजनीतिक हालात हैं उनके अनुसार लगभग तीन-चार जनवरी तक प्रत्याशियों के टिकट फाइनल हो पायेंगे। अर्थात प्रत्याशियों के पास मतदाताओं तक पहुचने के लिए मात्र 25 दिन होंगे। कड़ाके की इस ठंड में चुनाव प्रचार के घंटों का आकलन करें तो जनवरी के महीने एक दिन में महज आठ घंटे ही प्रचार किया जा सकता है। इसमें से भी जनसभायें,नुक्कड़ सभायें जैसे सामूहिक जनसंपर्क करने का समय घटकर छह घंटे ही रह जाता है। आप जानते हैं कि एक सामान्य दिन में चुनाव प्रचार का औसत समय 14 घंटे होता है। सुबह आठ बजे से लेकर रात दस बजे तक। यदि इस औसत समय के पैमाने पर राज्य में प्रत्याशियों को मिले वर्तमान समय को देखें तो इन प्रत्याशियों को वास्तविक रुप से चुनाव प्रचार के लिए मात्र 14 दिन ही मिलेंगे। उत्तराखंड की विधानसभा सीटों का औसत क्षेत्रफल 400 से 500 वर्ग किलोमीटर है। इसप्रकार हर प्रत्याशी को अपने मतदाताओं तक पहुचने के लिए हर दिन 28 वर्ग किमी से लेकर 35 वर्ग किमी क्षेत्र कवर करना होगा चलना होगा।हर गांव तक पहुचने के लिए उसे हर रोज न्यूनतम 12 से लेकर 16 किमी पैदल चलना होगा। यह असंभव हैया इसके लिए हर प्रत्याशी को हजार से ज्यादा कार्यकर्ता और साधन चाहिए। इसका सीधा अर्थ यही है कि पहाड़ के अधिकांश मतदाताओं तक प्रत्याशी या उसके कार्यकर्ता नहीं पहंुच पायेंगे। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन नहीं होगा क्योंकि इससे ज्यादा कार्यकर्ताओं का खर्च वहन करने वाले दल को बाकी दलों पर स्वाभाविक बढ़त मिल जाती है। इससे राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों और उनके मुद्दों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के मतदाता के बुनियादी अधिकार का हनन होता है। चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों से जुड़ी प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह मतदाता के जानकारी प्राप्त करने के बुनियादी अधिकार से जुड़ा मसला है।
 
03- आपके ऐलान ने खतरनाक पहाड़ी रास्तों पर सख्त बर्फ पर चुनाव प्रचार की हड़बड़ी पैदा कर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की ही नहीं बल्कि मतदान कर्मियों की जान को अनावश्यक रुप से खतरे में डाल दिया है।इसके अलावा मतदान कर्मियों को डयूटी पर जाने के लिए बड़ी तादाद में बर्फ के चश्मे, जैकैटें स्नोकटर्स, चेन लगी बसं, जीपें समेत अनेक इंतजाम करने होंगे। इन पर अनावश्यक खर्च भी होगा और इतने सामान का इंतजाम करना भी मुश्किल होगा। पर सवाल ये है कि एक अवैज्ञानिक जिद के लिए क्या लोगों की जान जोखिम में डालने से लेकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया जाना चाहिए?
 
04- अंतिम बात यह है कि यदि उस अवधि में हिमपात हुआ तो तब कोई भी इंतजाम चुनाव संपन्न नहीं करा सकता। इससे चुनाव आयोग की जिद पर जो सवाल उठेंगे उनका जवाब देना आयोग के लिए मुश्किल होगा और उस पर एक राजनीतिक दल विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए अवैज्ञानिक कार्यक्रम लागू करने के आरोप लगेंगे।
 
आशा है कि आप मतदान तिथियों के बारे में जिद और धारणाओं के आधार पर नहीं बल्कि विज्ञान और लोकतांत्रिक विमर्श के आधार पर चुनाव तिथियों में जरुरी संशोधन करेंगे।
 
सादर
   भवदीय
राजेन टोडरिया
प्रमुख महासचिव
उत्तराखंड जनमंच
 

 

Vidhan Sabha General Elections–2012 for the state of Uttarakhand

Dehradun : Chief Electoral Officer Uttarakhand Radha Raturi has said that the announcement of the election programme for the Vidhan Sabha General Elections–2012 has been made by the Election Commission of India (ECI), on Saturday. She said that in compliance of the announcement, polling would be conducted in a single round in Uttarakhand.

As a result of the announcement of the Vidhan Sabha General Elections, the model code of conduct of the Election Commission of India has come into force in the State with immediate effect. The model code of conduct would also be applicable with immediate effect on all ministers and nominated persons holding the rank of Minister of State (MoS). All Principal Secretaries, Secretaries, Divisional Commissioners, District Magistrates, Head of Departments, and Private Secretaries to the Ministers, among others, have been apprised regarding the model code of conduct of the Election Commission of India, to ensure its faithful compliance.

According to a Press Release issued by the Commission, the programme for the Vidhan Sabha General Elections–2012 for the state of Uttarakhand has been prescribed as follows:

5 January 2012–Date of issue of notification, 12 January–Last date for filing nominations, 13 January–Date of scrutiny of nomination forms, 16 January–Last date for withdrawal of names, 30 January–Date of polling, 4 March 2012–Date of counting of votes, and, the process of conduct of the elections would be completed before 9 March, 2012.

चौड़ीकरण में प्रभावित लोगों में पनप रहा आक्रोश

देहरादून। चकराता रोड़ चौड़ीकरण में जिस तरह की जल्दबाजी और लापरवाही बरती गई है। उससे परेशानियों का सामान करना पड़ा रहा है। बल्कि कई तरह का नुकसान भी उठाना पड़ा रहा है। जिसके कारण प्रभावित लोगों में भारी आक्रोश है।
 
शासन-प्रशासन द्वारा आनन-फानन में न सिर्फ आधे-अधूरे निर्माण आदि कॉम्लैक्स का उद्घाटन करा कर दुकान दारों को दुकानों का आंवटन करने की औपचारिकता पूरी कर ली गयी बल्कि दुकानदारों और सम्पति स्वामियो से रातो-रात सामान खाली करा कर जेसीबी और बुल्डोजरो से इमारतों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया गया। यह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जिस लापरवाही से की गयी उसके कारण भवनों के उन हिस्सों को भी भारी क्षति हुई है जो ध्वस्तीकरण की जद में नहीं थे। जिस भवन का कुछ हिस्सा ध्वस्तीकरण की जद मे आ रहा था उस हिस्से को तोडते समय इस बात का ख्याल नहीं रखा गया कि इससे बाकी हिस्सा प्रभावित न हो । इसका सर्वाधिक नुकसान दिग्विजय सिनेमा को हुआ जिसको गिरते वक्त अहतियात न बरते जाने के कारण उसकी पहली मंजिल की छत और पिलर को जेसीबी से ढहा दिया गया सिनेमा के इस पिलर में मोटे - मोटे गाडर पडे होने के कारण जब यह पिलर गिरा तो पूरी बिल्डिंग इसे हिलकर रहा गयी। हालंकि छत और पिलर गिरने के साथ यह गाडर बीच से मुड गये। लेकिन इससे यह पिलर दस फीट अन्दर तक दराक गया जिससे सिनेमा की सम्पति को भारी नुकसान हुआ है। इस छत और पिलर के लटक जाने के बाद ठेकेदारों और शासन-प्रशासनों को इस बात का होश आया कि इसे गैंस कटर से काटा दजाना चाहिए था। हालंकि शोर यह भी मचाया गया कि सिनेमा को किसी तरह का नुकसान न हो इसके लिए दिल्ली से विशेष कटर मशीने मंगायी गयी है लेकिन यह मशीने दूसरे दिन शाम तक भी न आ सकी और यह छत और पिलर चौबीस घंटे तक यूहीं लटका रहा। जिसे आज गैस कटर काटा कर नीचे गिराया गया। यह समझ से परे है कि दिल्ली से आने वाली विशेष कटर मशीने कहां अटक गई? जो अभी तक देहरादून नहीं पंहुची और अभी भी दिग्विजय सिनेमा का कुछ हिस्सा जो अतिसंवेदन शील है, गिराया जाना बकाया है। जिसे गिरने में अहतियात नहीं बरती गई तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। यह बात अकेला दिग्विजय सिनेमा के ही सम्सया नहीं है इस ध्वस्तीकरण की जद में जितने भी भवन आ रहे है उन सभी के सामने है, जिसके कारण इन सम्पति स्वामियों को भारी नुकसान हो रहा है चर्चा यह भी है कि निर्धारित सीमा से ज्यादा आगे तक ध्वस्तीकरण की दकार्रवाई कर ठेकेदारो द्वारा अधिक से अधिक मलवा और निर्माण सामग्री बटोरने का प्रयास किया जा रहा है यहीं नहीं इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर कई तरह के सवाल उठाये जा रहे है ? जिसे लेकर प्रभावित व्यापारियों मे काफी आक्रोश की भावना उत्पन्न हो गयी है।
 

108 एंबुलेंस सेवा के फील्ड कर्मियों के तेवर तल्ख, मरीज हलकान

देहरादून। पूरे राज्य में108 एंबुलेंस सेवा के फील्ड कर्मियों के तल्ख तेवर को देख नहीं लगता कि हाल-फिलहाल हड़ताल खत्म होगी। आंदोलन को धार देने के लिये अब इन्होंने वामपंथियों का लाल झंडा थाम लिया है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं के पास भी इतनी एंबुलेंस नहीं कि गांवों की गलियों से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचा सके। समय रहते बीच का रास्ता न निकाला गया तो आमजन की दुश्वारियां बढऩी तय है।
 
राज्य में 108 सेवा की आठ एंबुलेंस के पहिये सोमवार से थम गये हैं। 108 पर कॉल करने के बाद भी जरूरतमंदों तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही है। इससे मरीजों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को उठानी पड़ रही है। हड़ताल से तो प्रसूताओं की जान पर बन आई है। सोमवार को बैकअप पायलटों ने हड़ताल के जख्म पर मरहम का काम तो किया लेकिन मंगलवार को इन्होंने भी हाथ खड़े कर दिये। आठ घंटे की ड्यूटी और उचित वेतन दिये जाने की मांग को लेकर आंदोलित फील्ड कर्मियों ने आंदोलन को धार देने के लिये सीटू से भी गठबंधन कर लिया है। कर्मियों के तल्ख तेवर को देख हाल-फिलहाल हड़ताल खत्म होने के आसार कम ही दिख रहे हैं। समय रहते कर्मियों की जायज मांगें नहीं मानी गई तो आमजन की मुश्किलें बढऩी तय है।
 
देवभूमि ईएमआरआई वेलफेयर समिति के सचिव प्रदीप बिष्ट ने आरएनएस संवाददाता को बताया कि जब तक फील्ड कर्मियों की जायज मांगें नहीं मान ली जाती हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलन को धार देने के लिये सीटू से गठबंधन किया गया है।
 
देवभूमि ईएमआरआई वेलफेयर समिति के उप सचिव जगजीत सिंह ने बताया कि कर्मचारी अपनी मांगों पर अडिग हैं। आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया गया तो इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
 

बजाज शोरूम, लखानी शूज गोदाम राख

हल्द्वानी। बरेली रोड स्थित नागपाल ट्रेडर्स में रविवार देर रात हुए भीषण अग्रिकांड में बजाज शोरूम और लखानी शूज का गोदाम स्वाहा हो गया। फायर ब्रिगेड की 11 गाडिय़ों की मदद से 12 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हादसे में शूज गोदाम, सोलह मोटरसाइकिलें, फर्नीचर व पार्टस खाक हो गए। 350 मोटर साइकिलें और 25 पेटी मोबिल ऑयल निकाल लिया गया। जेसीबी की मदद से बेसमेंट की छत काटकर आग बुझाई जा सकी।

पुलिस के अनुसार गौजाजाली निवासी रणवीर नागपाल के पास बजाज आटो और लखानी शूज की कुमाऊं की डिस्ट्रीब्यटूरशिप है। नागपाल ट्रेडर्स के बेसमेंट में लखानी का गोदाम और भूतल पर बजाज का शोरूम है। रविवार देर रात चौकीदार ने बेसमेंट में आगे की तरफ कोने से धुआं निकलते देखा तो नागपाल को सूचना दी। वह शोरूम के पीछे ही रहते हैं। तत्काल अन्य कर्मचारियों को फोन कर वहां बुलवा लिया और आग बुझाने के प्रयास शुरू कर दिए। इस बीच सूचना मिलने पर वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारी सत्यपाल सिंह चौहान दो गाडिय़ां लेकर वहां पहुंचे। तब तक आग बेसमेंट के अधिकांश हिस्से में फैल चुकी थी। कुछ ही देर में मुख्य अग्निशमन अधिकारी एसएस यादव भी तीसरी गाड़ी के साथ वहां पहुंच गए। आग की विकरालता को देखते हुए उन्होंने रुद्रपुर, सेंचुरी पेपर मिल से भी फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां मंगवा ली। इस बीच कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों की मदद से बजाज शोरूम में रखी 350 मोटर साइकिलें और 25 पेटी मोबिल ऑयल, कुछ रिकार्ड, कंप्यूटर आदि निकाल लिए गए। इसके फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां बेसमेंट में पानी फेंकती रही और आग धू-धू कर जलती रही।

बेसमेंट का एकमात्र द्वार भी आग की चपेट में आने से उस पर काबू पाने में दिक्कत हो रही थी। फिर दो तरफ स्थित खिड़कियों में लगे शीशे तोड़ दिए गए, ताकि आग बुझाने में आसानी रहे। लेकिन करीब तीन हजार वर्ग फुट वाले बेसमेंट में बाहर से फायर ब्रिगेड का प्रयास अधिक कारगर नहीं हो पा रहा था। पहले परिसर स्थित दो टैंकों के पानी का उपयोग किया गया। इसके बाद गाडिय़ां अन्य स्थानों से पानी भरकर लाई। हल्द्वानी के अलावा सितारगंज, पंतनगर, काशीपुर, रामनगर, बजाज, अशोक लीलेंड, सेंचुरी पेपर मिल से आई फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां लगातार जुटी रही। बेसमेंट में चप्पल, जूते, पार्ट्स आदि की वजह से आग बुझाने के लिए फोम का भी इस्तेमाल किया गया। भीषण अग्निकांड की वजह से बजाज शोरूम वाला हिस्सा धुएं से भर गया था और तप रहा था। छत, पिलर दीवारें चटक जाने से धुआं वहां से अंदर भर गया था। उधर, आग नहीं बुझने की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का भी वहां आना शुरू हो गया। आग बुझाने के लिए पहले बेसमेंट की दीवार फिर छत तोडऩे का फैसला किया गया। दीवार नहीं टूटी तब ग्यारह बजे छत तोड़ी गई, इसके बाद वहां से पानी फेंककर आग कम हुई और दोपहर दो बजे तक इस पर काबू पा लिया गया।
 

नैनीताल संग्रहालय में रखा है 12वीं सदी के वीर स्तंभ

नैनीताल । कुमाऊं के इतिहास की जानकारी जिज्ञासु लोगों, इतिहास के विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए खुश खबरी है। कुमाऊं विवि डीएसबी परिसर इतिहास विभाग के संग्रहालय में 12 वीं सदी में कुमाऊं के चंद राजाओं के वीर स्तंभ उपलब्ध हो गये हैं। यह खम्भ रामनगर के सीतावनी क्षेत्र में मिले हैं। कुमाऊं में राज्य विस्तार के दौरान वीरता के साथ युद्ध जीतने के एवज चन्द राजाओं द्वारा इन्हें स्थापित किया था। इन वीर खम्भों को आज भी लोग पूजते हैं।

यहां बता दें कि चंद राजाओं ने 12वीं सदी से 1790 तक कुमाऊं में राज्य किया था। इस दौरान इनकी राजधानी चम्पावत और अल्मोड़ा में हुआ करती थी। वीरता के साथ युद्ध करने के बाद वह राज्य का विस्तार करते थे, तब इन वीर खम्भों का स्थापना की जाती। यह वीर खम्भ मैदानी क्षेत्रों में एकान्तक व पहाड़ी क्षेत्रों में चोकान्तक शिखर शैली के होते थे। इनका वजन एक हजार किलो से अधिक होता था। यह भारी भरकम पत्थरों से बना होता है। इनमें उन वीर राजाओं, सेनापतियों व सैनिकों की आकर्षक आकृतियां उकेरी जाती थी। यह वीर खम्भ चम्पावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा व नैनीताल एवं उधमसिंह नगर के विभिन्न स्थानों में देखे जा सकते हैं। संग्रहालय के सहायक क्यूरेटर डा. भुवन शर्मा के मुताबिक कुमाऊं के चन्द राजा ज्ञान चंद ने चम्पावत जिले में 1253 में वीर खम्भों की स्थापना करने की शुरुआत की थी। यह सिलसिला 1790 में खत्म हो गया। तब गोरखा राजाओं ने कुमाऊं में अपना अधिपत्य जमा लिया था। उन्होंने बताया कि संग्रहालय में 12 से 13वीं सदी का वीर स्तंभ सीतावनी रामनगर से लाकर रखा गया है। धार्मिक आस्था के कारण ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था। वीर खम्भ से इतिहास के विद्यार्थी लाभ ले सकेंगे।

डीएसबी परिसर स्थित इतिहास विभाग का संग्रहालय भवन भी ऐतिहासिक भवन है। वर्ष 1870 में इस भवन की स्थापना बैलेजली स्कूल के चैपल (नीजि गिरजाघर) के रूप में की गई थी। डीएसबी परिसर में कभी बैलेजली स्कूल हुआ करता था। बाद में यह पूरा परिसर कुमाऊं के मालदार दान सिंह बिष्ट ने खरीद लिया और अपने पिता देव सिंह बिष्ट की स्मृति में डिग्री कालेज प्रशासन को दान कर दी। इस परिसर के चैपल भवन में आज शानदार व बेजोड़ संग्रहालय है।
 

नगर में सिटी बस सेवा शुरू

रुद्रप्रयाग। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार रुद्रप्रयाग नगर क्षेत्र में सोमवार से सिटी बस सेवा शुरू हो गई। जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार एवं नगर पालिकाध्यक्ष रेखा सेमवाल ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर बस सेवा का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी श्री कुमार ने कहा कि नगरवासियों की मांग को देखते हुए बस सेवा शुरू की गई है। इसके बेहतर संचालन के लिए स्थानीय जनता का सहयोग महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि बस सेवा शुरू होने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। पालिकाध्यक्ष रेखा सेमवाल ने कहा कि बस सेवा को सफल रूप से संचालित करने के लिए नगरवासियों को हरसंभव सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि तमाम दिक्कतों के बाद पालिका ने बस सेवा शुरू की गई। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय से कलक्ट्रेट, तिलवाड़ा, सुमेरपुर, नरकोटा, कोटेश्वर आदि रूटों पर बस चलेंगी तथा इसके लिए निर्धारित समय तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि न्यूनतम किया पांच रुपए रखा है। इसके अलावा दूरी के अनुसार ही किराया बढ़ाया जाएगा।

इस मौके पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी बद्री भट्ट, एआरटीओ मनीष तिवारी, उप जिलाधिकारी ललिता नारायण मिश्र, सभासद अजय सेमवाल, चंद्रमोहन गुसांई व संगीता कप्रवान सहित कई लोग मौजूद थे।
 

राहुल के दून आगमन को लेकर कांग्रेसियों की तैयारियां शुरू

देहरादून । कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के २३ को दून में होने वाले दौरे को लेकर कांग्रेसियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

इसकी कमान खुद प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ने संभालते हुए सोमवार कांग्रेस भवन में सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की बैठक ली और उन्हें निर्देश दिए कि कांग्रेसी युवराज की दून में होने वाली रैली के लिए अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ताओं को एकजुट किया जाए। उन्होंने कहा कि यह राहुल का विधान सभा चुनाव से पहले एक बड़ा दौरा है। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने कई पदाधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के इस दौरे से कांग्रेस को न केवल एक नई ऊर्जा मिलेगी बल्कि कार्यकर्ताओं में आगामी विधान सभा चुनाव के लिए उत्साह बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राहुल का युवाओं में खासा जोश है इसलिए उन्हें उम्मीद ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि २३ को जो विशाल रैली दून में होने वाली है उसमें कांग्रेस के हजारों हजार कार्यकर्ता शिरकत करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष सुबोध उनियाल, प्रमोद कुमार सिंह,जुगल किशोर अरोड़ा, नवप्रभात, लालचन्द शर्मा, संजय शर्मा, राजीव महर्षि, सुरेन्द्र आर्य सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी मौजूद थे।
 

चकराता रोड चौड़ीकरण को लेकर मलबा उठाने का कार्य जोरों पर

देहरादून। चकराता रोड चौड़ीकरण को लेकर बीते रोज बुलडोजरों से दुकानों के ध्वस्तीकरण के बाद सोमवार को भी मलबा उठाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे और अपने मलबा उठाने की कार्यवाही शुरू की। इस दौरान कुछ दुकानें जो ध्वस्तीकरण में शेष रह गई थी उन्हें आज ढहाया गया।

आज भी ध्वस्तीकरण व मलबा उठाने के दौरान लोग बड़ी संख्या में घंटाघर पर उमड़े रहे और यह ही सोच रहे थे कि शायद कोई कारवां यहां से गुजर गया जबकि कुछ वरिष्ठ नागरिक बीते दिनों की यादें ताजा कर रहे थे। विकास के नाम पर पुराने भवनों को तोडऩे को बाद किस तरह पुराने यादें भी ध्वस्त हो जाती हैं यही कुछ इस नजारे को देखकर लोगों के मन में ख्याल उठ रहा है। हर कोई बीते दिनों की बात और आने वाले समय को लेकर चर्चाओं में मशगूल था।

 

108 कर्मियों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल, जीवन अस्त-व्यस्त

देहरादून । राज्य की लाइफ लाइन माने जाने वाली १०८ सेवा सोमवार पूरी तरह से बाधित रही और १०८ सेवा में कार्यरत कर्मचारियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। 
 
गढ़वाल मण्डल श्रमायुक्त ने १०८ सेवा में कार्यरत कर्मचारी और ईएमआरआई प्रबंधन समिति के बीच समझौते के लिए आज उन्हें अपने कार्यालय में बुलवाया था लेकिन १०८ कर्मी वहां पर नहीं पहुंचे। अपने तय कार्यक्रम के अनुसार १०८ सेवा में कार्यरत कर्मचारियों ने १०८ एम्बुलेंस को खड़ा कर दिया। १०८ सेवा कर्मचारियों की हड़ताल पर चले जाने के कारण आज उन मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा जो कि पूरी तरह से १०८ सेवा पर निर्भर थे। १०८ कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने को रोकने के लिए जीवीके ईएमआरआई के प्रदेश प्रमुख मनीष टिंकू ने बताया कि १०८ फील्ड कर्मचारियों की सभी मांगों को एक साथ पूरा नहीं किया जा सकता है। कर्मचारी बेवजह हड़ताल कर दबाव बनाने का कार्य कर रहे हैं। कर्मचारियों की हड़ताल से १०८ सेवा का कार्य प्रभावित न हो इसके लिए जिला प्रशासन से मदद मांग कर कर्मचारी बुलाए गए हैं। वहीं अपर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य पीयूष सिंह के अनुसार यह मामला जीवीके ईएमआरआई प्रबंधन से जुड़ा है और उन्हीं को इसका हल खोजना है।
 
शासन स्तर पर इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। देवभूमि १०८ ईएमआरआई कर्मचारी वैलफेयर सोसाइटी के प्रदेश सचिव रूप सिंह भण्डारी ने बताया कि आज फील्ड कर्मचारियों को वार्ता के लिए उप श्रमायुक्त कार्यालय में बुलवाया गया था लेकिन ईएमआरआई के अधिकारियों की ठधर्मिता के कारण वार्ता नहीं हो सकी और लोगों को होने वाली परेशानी के लिए उनको खेद है।
 

Nokia Lumia 800 and Nokia Lumia 710 are now available in Indian markets

Dehradun/Gurgaon :  The most awaited smartphone of the year, the Nokia Lumia 800 and the Nokia Lumia 710 are now available to consumers in India. The first set of devices was handed over at an exclusive event at the Nokia Evo Store in Gurgaon by Indian tennis star, Sania Mirza at the stroke. The devices are retailing across the country in Nokia’s top stores, which sport an all-new luminescent look.

 
 
The stunningly social Nokia Lumia 800 brings content to life with head-turning design, familiar Nokia elements, such as leading imaging capabilities, and Nokia’s best social and Internet performance with one-touch social network access, easy grouping of contacts, integrated communication threads and Internet Explorer 9. The Nokia Lumia 800 will retail at a best buy price of Rs. 29999/-.
 
The Nokia Lumia 710 is a smartphone that delivers excellent performance and a wide array of functionality. Colorful and compact, it can be personalized with interchangeable back covers. It has been widely praised as the best Windows Phone experience at is price point.  It combines the powerful social and Internet experience of Windows Phone with the ability to take pictures in almost any conditions and share with friends in seconds, as well as access to thousands of the most popular apps, including exclusive Nokia services. The Nokia Lumia 710 will have a best buy price of Rs. 18999/-.
 
Based on the Windows Phone 7.5 Mango release, the Nokia Lumiasmartphones are designed to appeal to people with lively social lives, who want an easy way to enjoy all the benefits of Windows Phone and access to signature Nokia experiences:
People Hub in Windows Phone displays all call, text, email and social network interactions with any individual contact in an integrated view, with the ability to group contacts and pin favourite groups and individuals to the start screen for live updates and easy access to the people who matter most. 
Faster, easier Web browsing experience with Internet Explorer 9 and one-touch Bing search. 
Nokia Drive delivers a full-fledged personal navigation device (PND) with free, turn-by-turn navigation and dedicated in-car-user-interface. 
With the 5MP camera, anyone can take pictures and share on social networks in seconds, even when the phone is locked. 
The Nokia Lumia smartphones also come with several unique apps preloaded on to them such as ContactsTransfer, a first-of-its kind which allows phonebook transfer from any other device/platform and App Highlights, which showcases top apps and is integrated seamlessly with the online Windows Phone Marketplace.
The Windows Phone Marketplace will have more than 1000 rich, locally relevant apps created by Indian partners.  In addition, users will also have access to over 40000 apps from Microsoft, both paid and free to download, on the Windows Marketplace.
 
Product Specifications:
 
Nokia Lumia 800: Stunningly social
Head-turning unibody design with vivid colors: cyan, magenta, and black
Best social networking experience provided by Windows Phone release 7.5
Best Internet browsing experience with Internet Explorer 9
Vivid 3.7” AMOLED, ClearBlack display with WVGA 800x480 pixels, 16 million colours and 2.5D 
curved glass 
Leading imaging capabilities with Carl Zeiss optics, above the lock capture, 8MP camera with 
autofocus and touch focus capability, dual LED flash, high definition 720p video recording with 
30FPS and one touch image sharing 
Nokia signature hub: Nokia Drive
1.4GHz Qualcomm Snapdragon processor, 512MB program memory, 16GB internal user 
memory, and up to 9 hours of 3G talktime
 
Nokia Lumia 710: Compact and powerpacked
Comes in All White; All Black: White Front with Cyan Back cover; White front with Fuchsia Back cover
Best social networking experience provided by Windows Phone release 7.5 
Best Internet browsing experience with Internet Explorer 9 
3.7" WVGA TFT, ClearBlack capacitive touch screen with pinch zoom, 800 x 480 pixels and 16 million colours
5 MP camera with auto focus, LED flash, high definition 720p video recording with 30FPS and one-touch image sharing 
Nokia signature hubs: Nokia Drive
1.4GHz Qualcomm Snapdragon processor, 512MB program memory, 8GB internal user memory, and up to 7.6 hours of 3G talktime
 
 

Uttarakhand Roller Skating team won 6 medals in OPEN NATIONAL

Dehradun / Meerat :Uttrakhand Roller Skating team won 6 medals in OPEN NATIONAL roller skating championship on 15TH TO 18TH DECEMBER at Meerut, U.P.” In Inline Rink Race I,  II Mohd. Amar Aqib 1 Gold 1 Silver,Harman Sandhu 2 Silver and Abhishek Bhandari won 2 Bronze.

 
All officials and members of Association congratulated the winners and wished them luck for upcoming National and International events. International Coach Gulab Choudhry informed that they have performed excellent in this event as there were 255 skaters from all over India. He also informed that Ice skating training camp is being starting from 22nd December and Vth National Ice Skating Championship will be organised at Shimal, Himachal Pradesh. 49TH National Roller Skating Championship for Speed, Artistic, Roller Hockey will be at Banglore, Faridabad and Chandigarh by Roller Skating Federation of India.
 
All selected candidates may come with all related documents like birth certificate, medical certificate to YATISKATES INDIA, 20 E Keshav Vihar G M S Road Dehradun or log on www.skatinginindia.com , www.yatiskates.com on or before 21-12-2011.
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चीला रेंज में जाएं, पर रैपर वापस लाएं

हरिद्वार। राजाजी राष्ट्रीय पार्क की चीला रेंज में अगर आप पॉलीथिन में लिपटी कोई भी खाद्य सामग्री लेकर जाएंगे तो आपको उसका रैपर (कवर) वापस भी लाना होगा। अगर रैपर वापस नहीं कर पाए तो 100 रुपये जुर्माना देना होगा।

राजाजी राष्ट्रीय पार्क की चीला रेंज में पॉलीथिन के कचरे पर अंकुश लगाने के लिए यह तरीका आजमाया जा रहा है। पार्क में घूमने वाले पर्यटक पॉलीथिन या फिर किसी अन्य तरह का कूड़ा करकट अंदर न डालें, इसके लिए चीला रेंज में रैपर वापस लाने का तरीका आजमाया जाता है। इसके तहत रेंज में जाने वाले पर्यटकों को रिसेप्शन पर उस सामान की जानकारी देनी होती है जिसे लेकर वह अंदर जाते हैं। खासतौर पर खाद्य सामग्री की पूरी सूची बनाई जाती है। पर्यटकों को पार्ककर्मियों की तरफ से साफ बता दिया जाता है कि वह प्लॉस्टिक में रैप सामग्री के रैपर वापस लाएं। पर्यटक लौटकर रैपर पार्ककर्मियों को सौंप देते हैं, जो पर्यटक रैपर नहीं दे पाते उन्हें प्रति पीस 100 रुपये के हिसाब से जुर्माना देना पड़ता है। चीला रेंज में पिछले कुछ सालों से यह तरीका आजमाया जा रहा है। पूर्व की बात करें तो पर्यटक रेंज के अंदर खाते-पीते थे और पॉलीथिन का कचरा अंदर जंगल में ही डाल देते थे। पार्क प्रशासन ने पॉलीथिन के कचरे से निपटने के लिए यह तरीका निकाला। इस नियम के लागू होने के बाद से रेंज में घूमने वाले पर्यटक अब पॉलीथिन के कचरे को इधर-उधर नहीं फेंकते।

राजाजी राष्ट्रीय पार्क के निदेशक एसपी सुबुद्धि ने संवाददाता को बताया कि रेंज में पॅालीथिन के कचरे को रोकने के लिए यह नियम बनाया गया है। इससे पर्यटक भी जुर्माने के डर से कूड़ा करकट नहीं फैलाते।
 

चकराता रोड की बॉटलनेक को खोलने के लिये लिए एक दशक से जारी कवायद ने दिखाया रंग

देहरादून। चकराता रोड की बॉटलनेक को खोलने के लिए एक दशक से जारी कवायद आखिरकार रविवार को अपने अंजाम तक पहुंच गई। सुबह ४ बजे ही दल बल के साथ पहुंची प्रशासन की टीम ने ध्वस्तीकरण की कार्यवाही शुरू कर दी। जिसके साथ ही राजधानी सबसे व्यस्ततम और संकरे इस मार्ग के चौड़ीकरण का मार्ग प्रशस्त हो गया।
 
इस मार्ग के चौड़ीकरण के लिए शासन प्रशासन द्वारा पिछले एक साल से युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे थे। जिसका विरोध स्थानीय दुकानदारों द्वारा किए जाने से इसमें बार-बार रोड़े अटकते रहे। चार-चार पांच-पांच दशक से जिन दुकानों में यह व्यवसायी काम कर रहे थे और जहां से उनके परिवार की रोजी रोटी चलती वह अपनी इस पैतृक विरासत को छोडऩे के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन एमडीडीए द्वारा शासन के साथ मिलकर इन दुकानदारों से कई दौर की वार्ताओं के बाद इस समस्या का समधान निकल सका। इन दुकानदारों और स्थानीय लोगों की मांग थी कि शासन पहले उनके विस्थापन की उचित व्यवस्था करे और उचित मुआवजा करे तभी वह अपनी दुकान व मकान छोड़ेंगे। इस मांग पर सहमति बनने के बाद ही घंटाघर स्थित एमडीडीए पार्किंग में नए कॉम्पलैक्स का निर्माण कराया गया और चकराता रोड के सभी दुकानदारों को यहां दुकानों का आंवटन किया गया। वहीं आवासीय भवनों के एवज में आईएसबीटी पर बनाए गए मकानों में शिफ्टिंग की व्यवस्था की गई। चार दिन पहले मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खण्डूड़ी द्वारा इन कॉम्पलैक्स और भवनों के उद्घाटन के बाद ही यह सुनिश्चित हो गया था कि अब शीघ्र ही इस मार्ग पर ध्वस्तीकरण का कार्य किया जा सकता है। बीते कल प्रशासन और एमडीडीए द्वारा प्रभावित लोगों को दुकान व भवनों का आवंटन कर दिया गया। तथा उन्हें पुराना स्थान खाली करने के लिए कह दिया गया था।
 
बीती रात इन दुकानदारों व स्थानीय लोगों ने अपनी दुकान व आवास खाली कर दिये और इनके खाली करते ही आज सुबह ६ बजे से प्रशासनिक अधिकारी दल बल के साथ मौके पर पहुंचे और ध्वस्तीकरण की कार्यवाही शुरू कर दी। प्रारम्भिक दौर में ५० मीटर दूरी तक ध्वस्तीकरण का कार्य किया जा रहा है जिसमें दिग्विजय सिनेमा, कुमार स्वीट्स और सिन्धी स्वीट्स आदि भवन शामिल हैं। इस ध्वस्तीकरण की कार्यवाही में जहां अपनी पुरानी पहचान और पुराने स्थान को छोड़ते हुए यह दुकानदार और स्थानीय निवासी अत्यन्त भावुक दिखे। वहीं अपने बनाए गए घर मकानों और दुकानों पर बुल्डोजर और जेसीबी मशीनें चलते देख उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। चकराता रोड की इस चौड़ीकरण की कार्यवाही से हालांकि राजधानी दून की एक बड़ी समस्या का समधान हो सका है। क्योंकि इस अकेले मार्ग के सकरे होने के कारण पूरे मार्ग की व्यवस्थाएं प्रभावित होती थी। समाचार लिखे जाने तक ध्वस्तीकरण की कार्यवाही जारी थी। संभवत: इस कार्य में सप्ताह भर से अधिक का समय लगेगा। इस ध्वस्तीकरण की कार्यवाही के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं तथा बिंदाल पुल की ओर से आने वाला तथा घंटा की तरफ से जाने वाला टै्रफिक पूरी तरह से बंद कर दिया। इस दौरान ध्वस्तीकरण के इस बड़े अभियान को देखने के लिए दूनवासियों का हुजूम घंटाघर पर उमड़ा हुआ था।
 
गढ़वाल मण्डल आयुक्त अजय नबियाल, मेयर विनोद चमोली, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनोद कुमार सुमन, नगर निगम के अपर मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत, एसएसपी जीएन गोस्वामी, एसपी टै्रफिक अजय जोशी व बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। चौड़ीकरण के लिए करीब पांच जेसीबी मशीनों के साथ लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी ध्वस्तीकरण की कार्यवाही में जुटे हुए थे।
 

सालभर में हुई 15 बाघों की मौत का मामला गर्माया

रामनगर । कार्बेट लैंडस्केप में सालभर में हुई 15 बाघों की मौत का मामला गर्मा रहा है। बाघ बचाओ समिति ने सीएम को ज्ञापन भेजकर बाघों की मौत पर चिंता व्यक्त की है। फैक्स के जरिए भेजे गए ज्ञापन में समिति अध्यक्ष मदन जोशी ने कहा कि बाघों की मौत पर कोई भी गंभीर नही है। 15 बाघों की मौत में न तो कोई जांच और ना ही किसी की गिरफ्तारी हुई है। जिसके चलते शिकारियों के हौंसले बुलंद है। बाघों की मौत पर वन विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे है। उन्होंने बाघों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबन की मांग करते हुए कहा कि अगर बाघों की मौतों का खुलासा नही हुआ तो समिति आंदोलन छेड़ देगी। 
 

मादा टाइगर के चक्कर में दो टाइगर भिड़े,एक की मौत

रामनगर। एक मादा टाइगर के चक्कर में दो टाइगर ऐसे भिड़े कि एक की मौत के बाद ही जंग का खात्मा हो सका। हालांकि मुहब्बत की यह बाजी जीतने वाले टाइगर ने अपने प्रतिद्वंद्वी को हरा  तो दिया लेकिन उसकी खुद की हालत इस लड़ाई में काफी नाजुक हो गयी है। वन महकमें के आला अधिकारी भी इस घायल बाघ पर पूरी निगाहबीनी किये हुये हैं। मृत बाघ का वनाधिकारियों ने मौके पर ही पोस्टमार्टम करवाकर उसका शव नष्ट करवा दिया है। 

 

घटनाक्रम रामनगर वन प्रभाग के देचौरी रेंज में बरुआ बीट के कम्पार्टमेंट संख्या 3 का है। बीती रात ही इस इलाके के ग्रामीणों को जंगल में दो बाघों के दहाडऩे की आवाजें सुनाई दी। टाइगरों की आवाजें इतनी खतरनाक थी कि इससे इस बात का अंदेशा हो गया था कि दो टाइगर आपस में भिड़ गये है। आज सुबह जब इलाके के लोग अपनी जरुरत का ईंधन-चारा आदि लेने जंगल गये तो उन्हे वहां पर एक टाइगर का शव पड़ा मिला, इसके साथ ही एक अन्य दूसरे बाघ के गुर्राने की भी आवाज आ रही थी। बाघ की गुर्राहट सुनकर ग्रामीणों की सिटटी-पिटटी गुम हो गयी। जंगल से बाहर आकर उन्होने इसकी सूचना वन चौकी पर तैनात कर्मचारियों को दी, जिसके आधार पर वनाधिकारी का दल मौके पर पहुंचा। जहां  मौके की हालत देखकर वनाधिकारियों के माथ पर शिकन पड़ गयी। पूरे इलाके में बाघों ने आपसी संघर्ष में पूरे इलाके को तहस-नहस कर डाला था। मौके पर पहुंचे विभागीय एसडीओ रमाकांत तिवारी ने बताया कि बाघ की मौत दो बाघों में हुये संघर्ष का परिणाम है जिसकी पुष्टि मृत बाघ के शरीर पर मिले जख्मों से होती है। श्री तिवारी ने बताया कि संघर्ष में घायल हुये बाघ की तलाश की जा रही है। क्योकि वह बाघ भी काफी जख्मी हो गया है इसलिये उसपर सुरक्षा की दृष्टि से नजर रखना आवश्यक हो गया है। मृत बाघ का शव वनाधिकारियों ने पशुचिकित्साधिकारियों से पोस्टर्माटम के बाद मौके पर नष्ट करवा दिया। इस दौरान धीरजधर बछवाण, रेंजर देचौरी एमपी बिजल्वाण सहित अनेक वनाधिकारी मौजूद रहे।

 

हाथी ने गुर्जर को पटक-पटक कर मार डाला

हरिद्वार। चिडिय़ापुर रेंज के नलौवाला गांव के जंगल में हाथी ने एक गुर्जर को पटक कर मार डाला। गुर्जर की पत्नी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। वन विभाग ने क्षेत्र में अलर्ट घोषित कर लोगों को जंगल में न जाने की सलाह दी है। पिछले दो साल में हाथियों के हमले में सात लोग मारे जा चुके हैं।

शनिवार सुबह करीब 6 बजे हरिद्वार वन प्रभाग की चिडिय़ापुर रेंज के नलौवाला गांव की कोटावाली -6 बीट में गुर्जर रोशनदीन(50) अपनी पत्नी शकीना सहित घास लेने गया था। दोनों घास बीनते- बीनते हाथियों के झुंड के पास पहुंच गए। इसी बीच, एक हथिनी ने गुर्जर रोशनदीन को सूंड में लपेट पटक-पटक कर मार डाला। इसी दौरान गुर्जर की पत्नी ने वहां से भागकर अपनी जान बचाई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जंगल से रोशनदीन का शव लाकर उसके परिजनों को सौंप दिया गया। मौके पर पहुंचे उप प्रभागीय वनाधिकारी केएस रावत ने बताया कि क्षेत्र में काफी संख्या में हाथियों के झुंड हैं। क्षेत्र में अलर्ट घोषित कर लोगों को जंगल में न जाने की चेतावनी दी गई है।

 

पेयजल समस्या से मिलेगी मिलेगी निजात : खजानदास

नई टिहरी। खेल एवं आवास मंत्री खजानदास ने लालूर पंपिंग पेयजल योजना का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि पट्टी लालूर की वर्षो पुरानी पेयजल पंपिग योजना शुरू होने पर आने वाले कुछ माह में क्षेत्र की जनता को पानी की समस्या से निजात मिलेगी।
 
शनिवार को लालूर पंपिंग योजना ग्राम नैनगांव के समीप यमुना नदी तट पर 14.81 लाख रुपये की लागत से 10 किलोमीटर लम्बी इस योजना का भूमि पूजन कर मुख्य अतिथि खेल व आवास मंत्री खजान दास व विशिष्ट अतिथि खेल परिषद के अध्यक्ष एनएस राणा ने शुभारंभ किया। खजानदास ने कहा कि योजना से पट्टी लालूर की जनता की पेजयल समस्या दूर होगी। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि खेल परिषद के अध्यक्ष एनएस राणा ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए हुए कहा कि सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है। कार्यक्रम में उत्तराखंड पेयजल निगम के अधिशासी अभियन्ता संजय सिंह, अवर अभियन्ता एसआर वर्मा, प्रधान श्याम सिंह चौहान, विक्रम सिंह चौहान, गंभीर सिंह चौहान, बिरेन्द्र सिंह, मोर सिंह आदि उपस्थित रहे।
 

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