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बीएड का रिजल्ट 30 अक्टूबर को होगा घोषित

देहरादून। बीएड रेगुलर वर्ष 2009-10 की परीक्षा का रिजल्ट रविवार 30 अक्टूबर को घोषित कर दिया जाएगा। विवि के श्रीनगर, पौड़ी, टिहरी तीनों परिसरों सहित बीएड सेल्फ फाइनेंस चलाने वाले 14 राजकीय डिग्री कॉलेजों का रिजल्ट रविवार को घोषित होगा।
 
बीएड रिजल्ट घोषित करने की मांग को लेकर बिड़ला परिसर छात्रसंघ अध्यक्ष अर्जुन कृष्ण गैरोला, महासचिव दर्शन सिंह दानू के नेतृत्व में छात्रों ने शनिवार को कुलपति प्रो. श्रीकृष्ण सिंह से भेंट कर रिजल्ट शीघ्र खुलवाने की मांग की। कुलपति प्रो. एसके सिंह ने कुलसचिव डॉ. उदय सिंह रावत और ओएसडी परीक्षा प्रो. एलजे सिंह को बुलाकर मामले की जानकारी ली, जिस पर बताया गया कि रविवार को रिजल्ट घोषित हो जाएगा।
 
डॉ. उदय रावत और प्रो. एलजे सिंह ने आरएनएस संवाददाता को बताया कि निजी स्ववित्त पोषित बीएड कॉलेजों के बीएड वर्ष 2009-10 के प्रैक्टिकल हर हाल में पांच नवम्बर तक करा लेने का समय विवि ने उन्हें दिया है। इन कॉलेजों के छात्रों का थ्योरी का रिजल्ट तैयार है। जैसे ही निजी बीएड कॉलेजों से प्रैक्टिकल के अंक विवि को प्राप्त होंगे उनके भी रिजल्ट घोषित कर दिए जाएंगे।
 

हेमवती नंदन बहुगुणा (HNB) की प्रतिमा के अपमान पर मुकदमा दर्ज

पौड़ी गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा की कलक्ट्रेट परिसर स्थित प्रतिमा के गले में खाली बीयर की बोतल टांगने वाले अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है। इस मामले की विवेचना सब इंस्पेक्टर भगत सिंह को सौंपी गई है।

काबिलेगौर हो कि शुक्रवार सुबह अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विनोदानंद बड़थ्वाल ने थाने में शिकायत की कि स्व. बहुगुणा की प्रतिमा के गले में शरारती तत्वों ने खाली बीयर की बोतल लटका दी है। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (क) में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस मामले की विवेचना सब इंस्पेक्टर भगत सिंह को सौंपी गई है। नागरिक संघर्ष समिति ने भी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह रावत ने इस मामले में दोषियों की जल्द गिरफ्तारी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

 

कैंसर इंस्टीट्यूट (Cancer Institute) में जल्द शुरू हो जाएगी ब्रेकीथेरेपी (Brachytherapy)

हल्द्वानी। स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में कैंसर के उपचार की नई थेरेपी भी जल्द अस्तित्व में आ जाएगी। इसके लिए राजकीय मेडिकल कालेज प्रशासन की ओर से तेजी से प्रयास हो रहे हैं। रेडियोथेरेपी की दूसरी विधि ब्रेकीथेरेपी से भी रेडिएशन दिया जाएगा।

कैंसर इंस्टीट्यूट में वर्तमान में रेडियोथेरेपी में केवल टेलीथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। इस थेरेपी के माध्यम से मरीज के कैंसर वाले अंग को दूर से रेडियशन दिया जाता है। इंस्टीट्यूट के कैंसर रोग विशेषज्ञ व विभागाध्यक्ष डा. केसी पाण्डे का कहना है कि ब्रेकीथेरेपी से कैंसर मरीजों को कैंसर के सेल खत्म करने के लिए उसी अंग पर रेडिएशन दिया जाएगा, जो अंग कैंसर से प्रभावित हो रहा है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. निर्दोष पंत व डा. अभिषेक ने बताया कि यहां पर प्रतिदिन 25 कैंसर रोगियों की टेलीथेरेपी की जाती है। प्रतिवर्ष 1100 मरीजों का उपचार किया जाता है। नई थेरेपी आने से मरीजों को और अधिक सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।

स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के विभागाध्यक्ष डा. केसी पाण्डे ने आरएनएस संवाददाता को बताया कि मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में जिस तरह की जीवनशैली हो गयी है, उससे कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ रही है। ब्रेकीथेरेपी से जल्द ही मरीजों का उपचार शुरू हो जाएगा।
 

टिहरी बांध (Tehri Dam) के ऊपर से आवागमन की सुविधा शुरू की जाए

नई टिहरी। टिहरी बांध के ऊपर से आवागमन की मांग फिर जोर पकडऩे लगी है। जाखणीधार प्रखंड के जनप्रतिनिधियों ने इसको लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा है।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि टिहरी जनपद के लोगों ने टिहरी बांध के लिए त्याग किया है, लेकिन यहां की जनता की कई समस्याओं से जूझ रही है। बांध के ऊपर आवागमन न होने के कारण लोगों को जीरो ब्रिज से दस किमी. की अतिरिक्त दूरी झेलनी पड़ रही है। विगत कुछ महीनों से बांध के ऊपर से ही आवागमन प्रारंभ हो गया था, लेकिन 26 अक्टूबर से पुन: इस रास्ते को बंद कर दिया गया है। उनका कहना है कि जीरो ब्रिज की वाले मार्ग पर पहाड़ी हमेशा धंसती रहती है। इस मार्ग खतरनाक बना हुआ है, जबकि घूमते हुए इसी बांध के किनारे से गाडिय़ां आ रही है और 100 मीटर की बांध की पट्टी को प्रतिबंधित कर रखा है, जिससे जनता में काफी रोष बढ़ गया है। जन प्रतिनिधियों ने डैम के ऊपर से आवागमन शुरू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र उनकी यह मांग नहीं मानी गई, तो जाखणीधार, भिंलगना, प्रतापनगर, देवप्रयाग के सभी जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत व प्रतिनिधि सहित जनता 15 नवंबर को आंदोलन व चक्काजाम के साथ ही बांध का निर्माण के कार्य को बंद करने को बाध्य होंगे। ज्ञापन भेजने वालों में ब्लॉक अध्यक्ष विनोद बिष्ट, ब्लॉक महासचिव मस्ता सिंह पंवार, ब्लॉक उपाध्यक्ष मीरा देवी, उपाध्यक्ष रमेश खत्री, कार्यकारिणी सदस्य आशाराम थपलियाल, भगवती प्रसाद नौटियाल, पीताम्बर थपलियाल आदि थे।

 

नवंबर में होगा सतपुली (Satpuli) में चिकित्सालय (Hospital) का शिलान्यास

कोटद्वार । द हंस फाउंडेशन के संस्थापक भोले महाराज व माता मंगला जी नवंबर माह में गढ़वाल मंडल में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे।

फाउंडेशन के प्रदेश प्रभारी पद्मेंद्र सिंह बिष्ट टेगू भाई ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भोले महारापज व माता मंगला, सतपुली में चिकित्सालय का शिलान्यास करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरीश रावत, प्रदेश के मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी सहित अन्य केंद्रीय मंत्री, विधायक व समाजसेवी शिरकत करेंगे। फांउडेशन जिला मुख्यालय पौड़ी में बोर्डिग स्कूल खोलने जा रहा है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्रवेश देकर नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा पोखड़ा प्रखंड में एक विद्यालय को गोद लिया जायेगा, जिसमें निशुल्क व आधुनिक शिक्षा प्रदान की जाएगी। साथ ही तीन सचल चिकित्सा वाहन भी जनता को समर्पित किए जाऐंगे। गौचर में सात दिवसीय चिकित्सा शिविर का भी उद्घाटन किया जाएगा।


गैस एजेंसी (Gas Agency) न खुलने से परेशान बच्छणस्यूं वासी

रुद्रप्रयाग। बच्छणस्यूं क्षेत्र में गैस एजेंसी न होने से क्षेत्रीय जनता को भारी परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। विगत कई वर्षो से लोग एजेंसी खोलने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक मायूसी ही हाथ लगी है। वहीं गैस के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं।

दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों वाले बच्छणस्यूं क्षेत्र में अभी तक एक भी गैस एजेंसी नहीं खुल पाई है। क्षेत्र के लगभग ढाई हजार से अधिक उपभोक्ताओं को रसोई गैस लेने के दस किमी दूर जिला मुख्यालय आना पड़ता है। वहीं अभी तक पूर्ति विभाग व गैस एजेंसी की ओर से क्षेत्र में रसोई गैस वितरण के लिए कोई भी स्थान व समय निर्धारित न किए जाने से समस्या और अधिक बढ़ती जा रही है। इन परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को वाहन बुकिंग कर जिला मुख्यालय से गैस सिलेंडर ले जाने पड़ते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इस बाबत कई बार शासन व पूर्ति विभाग को लिखित रूप से अवगत भी करा चुके हैं, लेकिन अभी तक मायूसी ही हाथ लगी है।

इन गांव में है समस्या
 
खांकरा, फतेहपुर, रामपुर, कांडई, नौला, बामसू, मल्छोड़ा, बरासूड़ी, खेड़ाखाल, मलसारी, कमोल्डी, छतौड़ा, बणसौं, गहडख़ाल, बैरांगणा, पीपली सहित अन्य।
 
क्षेत्र पंचायत सदस्य नरेन्द्र मंमगाई प्रधान खांकरा,प्रदीप मलासी सरपंच फतेहपुर व विक्रम कंडारी ने कहा कि क्षेत्र में गैस एजेंसी न होने से भारी परेशानियां सामने आ रही हैं। अभी तक संबंधित विभाग की ओर से गैस वितरण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। लोगों की समस्याओं पर शासन-प्रशासन को गंभीरता बरतनी चाहिए।
रुद्रप्रयाग के जिला आपूर्ति अधिकारी जेपी घिल्डियाल ने आरएनएस संवाददाता को बताया कि क्षेत्र में श्रीनगर व रुद्रप्रयाग गैस एजेंसी द्वारा गैस सप्लाई की जाती है। अभी तक गैस एजेंसी का कोई प्रस्ताव शासन को नहीं गया है।




अब पेंशन पाने में असुविधा नहीं होगी राज्य के विकलांग व अन्य को

देहरादून। माह दिसंबर से समाज कल्याण विभाग की सभी पेंशन ऑनलाइन हो जाएगी। इस बारे में शासन स्तर पर कवायद तेज हो गई है। एनआइसी उत्तराखंड योजना में सेतु की भूमिका निभाएगा। इससे करीब साढ़े चार लाख पेंशनर्स को फायदा मिलेगा।
 
बताते चलें कि वर्तमान में समाज कल्याण विभाग की ओर से सूबे में करीब साढ़े चार लाख लोगों को सहायतार्थ वृद्धावस्था, विकलांग व विधवा पेंशन दी जा रही है। लेकिन सरकारी मशीनरी की लापरवाही के कारण पेंशनर्स को समय से पेंशन नहीं मिल पाती। वहीं काफी संख्या में फर्जी पेंशनर्स योजना का लाभ उठा रहे हैं। संबंधित कार्यालयों में पेंशनर्स की शिकायतों का अंबार लगा है लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने विभागीय समीक्षा में इस बारे में अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही के सख्त निर्देश दिए। इस पर अमल करते हुए विभाग ने पेंशन को ऑनलाइन करने की योजना बनाई। इसके तहत जिलों से पेंशनर्स का अपडेट डेटा एनआइसी उत्तराखंड के सर्वर से जोड़ा जाएगा। एनआइसी द्वारा तैयार विभाग की वेबसाइट पर इसे लोड किया जाएगा। विभाग पेंशनर्स को आइडी नंबर देगा। वेबसाइट पर पेंशनर्स की पेंशन का पूरा ब्योरा उपलब्ध होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पेंशनर्स की पेंशन रिलीज हुई या नहीं, सबसे पहले इसका पता चलेगा। पेंशनर्स अपने आइडी से भी यह पता कर सकेगा। पेंशनर्स का खाता बैंक में खुलवाया जाएगा। बैंकों की सुविधा मैदानी जिलों में तो आसानी से सुलभ हो जाएगी, लेकिन पहाड़ में ऐसा संभव नहीं होने पर डाकघर की मदद ली जाएगी। अब पेंशनर्स को तय करना होगा कि वह डाकघर में खाता खोलना चाहता है या मनीआर्डर से पेंशन की रकम लेगा।
 
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक योजना को लेकर सभी तैयारियां नवंबर के अंत तक पूरी कर ली जाएंगी। योजना के बारे में जिला समाज कल्याण अधिकारियों को कार्यशाला के माध्यम से जानकारी दी जा रही है।
 

उत्तराखण्ड (Uttarakhand) में आज से लागू सेवा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत राज्य में पहला मामला आज पिथौरागढ में दर्ज

देहरादून/पिथौरागढ : उत्तराखण्ड में आज से लागू सेवा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत राज्य में पहला मामला आज पिथौरागढ में दर्ज हो गया। महिला तथा जिला चिकित्सालय में सेवा सुविधाओं में की जा रही अव्यवस्थाओं को इसमें पंजीकृत किया गया है। महिला अस्पताल में 15 दिन से गर्भवती महिलाआंे का आपरेषन नहीं हो पा रहा है। जिला चिकित्सालय में सर्जन के अवकाष में रहने के कारण कई सप्ताह से आॅपरेषन की व्यवस्था ठप पडी हुई है। इस संदर्भ में भाकपा माले के प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात भी की।

भाकपा माले तथा उससे जुडे जन संगठनों के प्रतिनिधि मंडल ने इस संदर्भ में पहले जिलाधिकारी डा आर राजेष कुमार से मुलाकात की। उसके बाद किसान महासभा के जिलाध्यक्ष जगत मर्तोलिया की ओर से सेवा अधिकार अधिनियम 2011 के अंतर्गत डीएम के कार्यालय में यह षिकायत दर्ज की गयी। प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी को बताया कि जिला महिला चिकित्सालय में आॅपरेषन कक्ष की वैकल्पिक व्यवस्था किये बिना पूर्व से संचालित आॅपरेषन कक्ष का मरम्मत कार्य 15 दिनों स ेचल रहा है। इस बीच एक भी गर्भवती महिला का आॅपरेषन नहीं हो पाया। महिला अस्पताल में आॅपरेषन के लिए आने वाली महिलाओं को 120 किमी दूर स्थित अल्मोडा अस्पताल रैफर किया जा रहा है। स्थानीय निजी अस्पतालों मंे आॅपरेषन के 20 से 30 हजार रूपये लिये जा रहे है। महिला अस्पताल में वैकल्पिक रूप् से आॅपरेषन कक्ष की व्यवसथा की जा सकती थी लेकिन इस सेवा से गर्भवती महिलाओं को वंचित रखने की मंषा से पूर्व में कोई व्यवस्था नहीं की गयी। ऐसी स्थिति में गरीब परिवारों की महिलायें दोहरी मार झेलने को मजबूर है।

जिला चिकित्सालय में सर्जन की वैकल्पिक व्यवस्था किये बगैर वर्तमान में तैनात सर्जन को लम्बा अवकाष दे दिया गया है। इस कारण से जिला अस्पताल में केाई आपरेषन नहीं हो पा रहे है। पूर्व में भर्ती मरीजों को छुट्टी तक नहीं मिल पा रही है। जिला चिकित्सालय में तैनात राजकीय चिकित्सकों ने अपने प्राईवेट नर्सिग होम खोल दिये है। सरकारी सेवा में रहते हुए अपने प्राईवेट नर्सिग होम को लाभ पहुचाने की नियत से जिला अस्पताल में इस प्रकार की अव्यवस्था पैदा की जा रही है।  उन्होंने कहा कि यह सेवा अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन है। इस मौके पर अस्पतालांे से रोगियों को आवष्यक दवाईयां नहीं मिलने का मामला भी उठाया गया। यह मामला भी इस अधिनियम के अंतर्गत आता है। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से इस संदर्भ में वार्ता की और अपनी ओर से पत्र लिखा। इस मौके पर भाकपा माले के नगर प्रभारी सुषील खत्री, आॅल इन्डिया स्टूडेन्ट एसोसिएषन के जिला प्रभारी हेमंत खाती, अखिल भारतीय प्रगतिषील महिला एसोसिएषन की जिला संयोजक संगीता मुनौला, विनोद तिवारी मौजूद थे। 


 

कुमाऊं (Kumaon) से भी चलेगी शताब्दी (Shatabdi Express)

देहरादून। देहरादून (गढ़वाल) के बाद काठगोदाम (कुमाऊं) से भी एक शताब्दी ट्रेन चलाई जाएगी, जबकि उत्तराखंड की सीमाओं तक ट्रेन पहुंचाने के लिए राज्य सरकार का भी सहयोग चाहिए। निजी दौरे पर पहुंचे रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने यह बात कही। उन्होंने रेल किराए में वृद्धि को जरूरी बताते हुए यात्री सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया।

रेल मंत्रालय संभालने के बाद पहली बार काठगोदाम पहुंचे रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि काठगोदाम (कुमाऊं) से दिल्ली के लिए एक शताब्दी ट्रेन चलाई जाएगी। रेलवे के आधुनिकीकरण पर फोकस करते हुए उन्होंने कहा कि सेफ्टी उनकी प्राथमिकता में है। बावजूद इसके रेलवे के पास धन की अत्यधिक कमी है। तकनीकी एवं सिग्नल सिस्टम में भी सुधार के लिए बारीकी से कार्य किया जा रहा है। रेल किराए में वृद्धि के बाबत उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से साधारण श्रेणी का किराया नहीं बढ़ाया गया है। तब के लिहाज से आज लगभग शत प्रतिशत किराया बढ़ाए जाने की जरूरत है। ट्रेनों में 91 फीसदी यात्री जनरल क्लास के ही सफर करते हैं। ऐसे में सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ यात्री किराया भी बढ़ाना जरूरी है। इस पर विचार चल रहा है।

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति के साथ-साथ चीन द्वारा सीमा तक रेल पटरियां बिछाए जाने के सवाल पर रेल मंत्री ने माना कि पहाड़ पर ट्रेन पहुंचाई जानी चाहिए, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को भी भूमि उपलब्ध कराने होगी। साथ ही मंत्रालय एवं भारत सरकार भी इस मुद्दे पर गंभीर है। जल्द ही वह मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी से भी वार्ता करेंगे। इसमें राज्य की रेलवे विकास योजनाओं एवं उनके क्रियान्वयन पर भी चर्चा होगी।
 
रानीखेत एक्सप्रेस से शुक्रवार सुबह यहां पहुंचने के बाद रेल मंत्री परिवार के साथ धानाचूली (मुक्तेश्वर) के लिए रवाना हो गए।
 

बच्चे में पोलियो (Polio) के लक्षण : हिंदुस्तान में २०११ का दूसरा केस

खटीमा। चकरपुर क्षेत्र में बच्चे में पोलियो के लक्षण दिखाई देने के बाद स्वास्थ्य महकमा पूरी सतर्कता बरते हुए है। विभाग पूरे गांव की निगरानी में जुटा है और सुरक्षा की दृष्टि से प्रत्येक बच्चों पर नजर रखी जा रही है। यह हिंदुस्तान में २०११ का दूसरा केस है, पहला बंगाल में मिला था 
 
चकरपुर के पचौरिया गांव में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत से आए एक बालक में पोलियो के लक्षण दिखाई दिए थे। इस पर विभाग ने बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसके खून व मल का नमूना लखनऊ प्रयोगशाला भेजा है। इसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। विभाग गांव में पूरी सतर्कता बरते हुए है। विभाग प्रत्येक बच्चे की निगरानी में जुटा हुआ है। चिकित्साधीक्षक डॉ. एचएस खड़ायत ने बताया कि विभाग रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सुरक्षा की दृष्टि से गांव में एहतियात बरती जा रही है।

केदार (Kedarnath) धाम व यमुनोत्री (Yamunotri) के कपाट बंद

रुद्रप्रयाग / बडक़ोट। भैया दूज के पावन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ (Kedarnath) और  यमुनोत्री (Yamunotri) धाम के कपाट बंद कर दिए गए। शीतकालीन प्रवास के लिए बाबा केदार की उत्सव डोली गद्दीस्थल ओंक ारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए रवाना हो गई, जबकि यमुना की भोग मूर्ति को को खरसाली स्थित यमुना मंदिर में  स्थापित किया गया।
 
शुक्रवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंदिर के मुख्य पुजारी राजशेखर लिंग ने विधि विधान के साथ सुबह  साढ़े आठ बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद किए। इसके बाद सिख रेजीमेंट बैंड की धुन के बीच बाबा केदार की  उत्सव डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना हो गई। रामपुर में रात्रि विश्राम के बाद डोली 29 अक्टूबर को गुप्तक ाशी पहुंचेगी और 30 अक्टूबर को गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान होगी। यहीं पर छह माह भोले  बाबा की पूजा अर्चना की जाएगी। इस अवसर पर मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा, एसपी विमला गुंज्याल,  सिख रेजीमेंट के सीओ बी.मनरी के अलावा तीर्थ पुरोहित आदि मौजूद थे।
दूसरी ओर खरसाली गाव से प्रात: काल पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार शनिदेव की डोली मां यमुना को लेने  यमुनोत्री धाम को रवाना हुई। डोली के पहुंचने के बाद दोपहर बाद करीब सवा दो बजे सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी  में पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यमुनोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए गए। इसके बाद शनिदेव की  डोली की अगुआई में यमुना की भोगमूर्ति शाम को खरसाली गाव पहुंची। विशाल उत्सव के साथ मां यमुना की  भोगमूर्ति को यमुना मंदिर में स्थापित किया गया। शीतकाल में श्रद्धालुओं को मां यमुना के दर्शन उनके मायके  खरसाली में ही होंगे। इस अवसर पर तीर्थपुरोहित, मंदिर समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे।
 

कैंटोनमेंट बोर्ड देहरादून क्यूँ कर रहा एक बड़े हादसे का इंतजार ?

गढ़ी देहरादून कैंट बाज़ार एक १०० साल से भी जादा पुराना बाज़ार है और आज यहाँ कई ऐसी इमारतें हैं जो की अब अपनी आयु से कई अधिक समय तक साथ देती रही हैं . आज इन इमारतों की ऐसी हालत है की अब गिरी और तब गिरी . ऐसे में हर वक्त मंडरा रहा है जान माल का खतरा .
 

गढ़ी बाज़ार स्तिथ खन्ना भवन का एक हिस्सा जो की सड़क से लगा हुआ है, पिछले कुछ सालों में ७ अलग अलग बार टूट के गिर चूका है . एक बार तो एक लड़का ऊपर कमरे में लिंटर गिरने से फस गया था जिसे पीछे की और से वेल्डिंग द्वारा खिड़की काट कर निकला गया था . यकीन माने तो इस लड़के का यह नया जनम था . ऐसे ही कई बार इस भवन के अलग अलग हिस्से गिर कर लोगों को निशाना बनाते रहें हैं जिसकी सूचना हर बार भवन के मालिक द्वारा कैंट बोर्ड के आला अधिकारिओं को लिखत में दी गई है . भवन के मालिक का मानना है की उनकी संपत्ति की कीमत से जादा इंसान की जान की कीमत है .ऐसे में वह उस इमारत को गिरा देना ही उचित समझते हैं और यह दरखास्त वह कई बार आला अधिकारिओं से लिखित में कर चुके हैं .
 

कैंट देहरादून में ऐसी और भी कई इमारतें हैं जो भी जर्जर हो चुकी हैं और नुक्सान देने के लिए वक्त का इंतज़ार कर रही हैं . इन इमारतों की एक रिपोर्ट कैंट बोर्ड ने २००५ में तैयार की थी जिसको उसके बाद भी कई बार इधर उधर घुमाया गया और आज ६ साल बाद भी कोई कार्यवाही नज़र नै आ रही है . रात दिन इन इलाकों में फ़ौज की बड़े ऑफिसर घूमते हैं और प्रशासन की गाड़ियों में कई बार यहाँ से गुज़रती हैं फिर भी क्यूँ कैंट बोर्ड इस्पे कार्यवाही नहीं कर रहा है ? क्यूँ ऐसे खतरों का निपटारा नहीं किया जा रहा है ? क्या एक बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है ? आगे होने वाले जान माल के नुक्सान का जिमेदार कौन होगा ?
 

अंग्रेजों द्वारा बनाये गये कानून में बदलाव किये जाने की जरूरत : कौशिक

देहरादून। पुरूष अधिकार संरक्षण फोरम के अध्यक्ष अजय कौशिक ने कहा कि पूर्व में अंग्रेजों द्वारा बनाये गये कानून में बदलाव किये जाने की जरूरत है और इसके लिए सरकार को पहल करना होगा।

विधानसभा के पास अपने कार्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में पुलिस एक्ट व संविधान में बदलाव लाने की आवश्यकता है क्यों जनता से जुड़ा हुआ सीधा विभाग है और जिसके कारण पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार अधिक है, पुलिस की कार्य प्रणाली व मुक्त भ्रष्टाचार बनाने हेतु उनकी मूलभूत समस्याओं से राहत दिलाकर उनकी कार्यप्रणाली में सुधार किया जा सके। वेतनमान राज्य स्तरीय न होकर केन्द्रीय वेतनमान होना चाहिए होना चाहिए और छठा वेतनमान राज्य सरकारों ने नहीं केन्द्र सरकार ने बढाया है।
 
उनका कहना है कि पुलिस, सब इंस्पेक्टर, कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल व अन्य पुलिस कर्मचारी का पे ग्रेड भी शीघ्र बढाया जाये, पुलिस कर्मियों की अन्य राज्य कर्मियों के बराबर डयूटी आठ घंटे प्रति पुलिस कर्मचारी होना चाहिए, या १० घंटे निर्धारित किया जाये किसी घटना के होने पर ही। पुलिस कर्मियों के उच्च पुलिस अधिकारियों का व्यवहार व्यवहारिक होना चाहिए। परिस्थिति अनुसार पुलिस कर्मियों को त्यौहार हेतु छुटटी बढऩी चाहिए, पुलिस कर्मियों का डयूटी समय निर्धारित किया जाना चाहिए। सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टरों को प्रतिमाह मोबाइल रिचार्ज की राशि ५०० रूपये करने, थाना प्रभारी को थाने का प्रभार योग्यता के आधार पर मिलना चाहिए न कि अधिकारियों व राजनैतिक दवाब में, इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
 
उनका कहना है कि वीआईपी डयूटी के दौरान पुलिस कर्मियों को आना जाना निश्चित व सरल होना चाहिए। पुलिस कर्मचारियों जो किराया आवासीय दिया जा रहा है उसे हटाकर थानों में पुलिस कर्मियों के आवास की व्यवस्था की जाये, इसके लिए कार्यवाही की जाये। प्रत्येक माह चीता पुलिस को ५० लीटर पेट्रोल, थाने की गाडी को २०० लीटर डीजल व सब इंस्पेक्टर को ८०० लीटर पेट्रोल आदि दिया जाना चाहिए। इसके लिए मुख्यमंत्री एवं पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन भेज दिया गया है। 

 

जडी बूटी शोध संस्थान के निदेशक के खिलाफ खोला किसानों ने मोर्चा

देहरादून। सचिव उद्यान विनोद फोनिया एवं जडी बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर के निदेशक  डा. आर सी सुंदरियाल की मिली भगत से औषधीय पादप मिशन योजना के अंतर्गत एक ही क्षेत्र को लाभ पहुंचाये जाने एवं लगातार किये जा रहे धन आवंटन में बंदरबांट के खिलाफ किसानों ने मोर्चा खोलते हुए निदेशक को तत्काल बर्खास्त किये जाने की मांग की है। शोध संस्थान के खाते से १.७१ करोड़ का फर्जीवाडा किया गया है, वहीं इस प्रकरण की सीबीसीआईडी जांच किये जाने व सचिव उद्यान एवं निदेशक को तत्काल पद से बर्खास्त किये जाने की मांग सरकार से की है। किसानों ने कहा कि वहीं कैबिनेट निर्णय को ११ माह बाद भी लागू नहीं किया गया है। किसानों ने कहा कि संबंधित सचिव द्वारा पांच करोड़ में से दो करोड़ रूपये अपने पिता विधायक केदार सिंह फोनिया के क्षेत्र के किसानों के लिए लाभ पहुंचाया लेकिन शेष जिलों में किसानों को इससे वंचित रखा गया है और तीन वर्षों से अनुदान न दिये जाने से किसानों में रोष बना हुआ है।

पत्रकारों से बात करते हुए एरोमेटिक प्लांटस ग्रोअर एसोसिएशन के चेयरमैन विवेक भारती एवं किसानों ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रदेश में वर्ष २००३ में सगन्ध पौधों की खेती की शुरूआत की गई और शुरू वर्षोंं में सगन्ध किसानों की संख्या कम थी, जो ५००० से अधिक हो गई है  और सगन्ध पौधों की खेती से जुड़े किसानों को इस खेती से काफी लाभ हुआ है और राज्य सहायता समय से मिलने व सगन्ध पौधा केन्द्र के सहयोग से उनका मनोबल काफी बढा है जहां राज्य में पहले १० किग्रा सुगंधित तेल भी उत्पादन नहीं होता था वहीं सब काश्तकारों का सगन्ध तेल व गुलाब जल का उत्पादन टनों के हिसाब से हो रहा है।

उनका कहना था कि किसानों के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है और जिससे सगन्ध काश्तकारों का मनोबल गिर रहा है उनका सगन्ध फसलों की खेती के प्रति रूझान कम हो गया है और निदेशक एचआरडीआई व सचिव उद्यान के कारण एरोमैटिक सेक्टर को आगे नहीं बढने दिया जा रहा है। जड़ी बूटी संस्थान गोपेश्वर के काश्तकारों का अनुदान व राज्य सहायता ठीक समय पर दे दी जाती है, एचआरडीआई गोपेश्वर को स्थापित हुए २०-२२ वर्ष हो चुके है, पिछले २० वर्षों से औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों की संख्या में बढोत्तरी हुई है।
 
उनका कहना है कि पूर्व में सगन्ध खेती का उत्पादन शून्य था और आज किसानों की मेहनत से यह १० करोड से ऊपर पहुंच गया है। जडी बूटी संस्थान का अपना कोई उत्पादन नाम मात्र का है और जबकि जडी बूटी के क्षेत्र में ९० प्रतिशत उत्पादन भेषज विकास इकाई द्वारा किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सचिव उद्यान व निदेशक जड़ी बूटी द्वारा इस यूनिट को भी खत्म कर गोपेश्वर ले जाने की तैयारी में है और सचिव उद्यान अपने विधायक पिता केदार सिंह फोनिया के क्षेत्र में भेषज विकास इकाई को गोपेश्वर ले जाने का षडयंत्र रच लिया गया है वह विभिन्न स्तरों पर एरोमैटिक सेक्टर की उपलब्धियों को अपनी उपलब्धियां दिखाकर जनता व शासन को गुमराह कर रहे है।
 
उनका कहना है कि सचिव उद्यान द्वारा आरकेवीआई परियोजना में प्रदेश के किसानों से अवैध वसूली करते हुए नियम विरूद्ध ५० लाख इकठठा किया गया वहीं यहां पर चार विधानसभा क्षेत्र आते है और ४ से ७ लाख रूपये की धनराशि नर्सरियों के लिए अनुदान के रूप में बांटी जाती है और इसके साथ ही राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड नई दिल्ली से कृषिकरण हेतु ५६ परियोजनाओं में से करोडों रूपये की २६ परियोजना अकेले चमोली जिले को दे दी गई और प्रदेश के साथ भेदभाव पूर्ण कार्यप्रणाली की गई और अब इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है और एक बडा आंदोलन चलाया जायेगा, जरूरत पडऩे पर नर्सरियों को भी बंद कर दिया जायेगा।
 

 

अम्बिका की हत्या की जांच सीबीसीआईडी को

देहरादून। मुख्यमंत्री मेजर जनरल(से$नि$) भुवन चंद्र खण्डूड़ी ने उत्तरकाशी जिले के विकासखण्ड चिन्यालीसौड़ के ग्राम कोट के निवासी सोबत सिंह पडियार की पुत्री अम्बिका की कुछ दिनों पूर्व हुई हत्या की सीबीसीआईडी जांच के निर्देश दिए हैं। आज कैंट रोड़ स्थित नए मुख्यमंत्री आवास में जनता मिलन कार्यक्रम में सुभाष नौटियाल के नेतृत्व में स्थानीय लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने उक्त प्रकरण के संबंध में मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए बताया कि कुछ दिनों पूर्व आठवीं कक्षा की छात्रा अम्बिका की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। इसकी जांच धरासू पुलिस द्वारा की गई परंतु हत्यारों का आज तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने सीबीसीआईडी जांच के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री खण्डूड़ी ने कैंट रोड़ स्थित आवास में बड़ी संख्या में आए लोगों की शिकायतों को सुनकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। स्टाफ नर्सेस के चयन में धांधली की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने जांच करवाने के निर्देश दिए। जननी सुरक्षा योजना में आशा वर्करों का मानदेय कम किए जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मानदेय को कम किया गया है। शक्तिफार्म के बाढ़ पीडि़तों को पट्टा न दिए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर से इस पर जानकारी मंगवाने के लिए कहा गया। सूर्या रोशनी श्रमिक संगठन ने फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा श्रमिकों को निकाले जाने का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जिस पर प्रकरण की जांच श्रम आयुक्त से करवाए जाने के निर्देश दिए गए। चिकित्सा सहायता के  मामलों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रार्थी अपने प्रार्थना पत्र में मेडिकल संबंधी सभी प्रमाण पत्र लगाएं ताकि नियमानुसार आर्थिक सहायता दी जा सके। स्थानांतरण संबंधी आवेदनों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने स्थानांतरण विधेयक बना दिया है। अब सभी स्थानांतरण नियमानुसार बिना किसी पक्षपात के स्वत: प्रक्रिया के तहत हो सकेंगे। जिला स्तर से निराकरण की जा सकने वाली शिकायतों पर मुख्यमंत्री श्री खण्डूड़ी ने कहा कि जिलाधिकारियों को सख्त निर्देशित कर दिया गया है कि जिला स्तर से हल की जाने वाली समस्याओं के निदान के लिए आम जनता को राजधानी न आना पड़े। 

 

तीन साल पहले पास किया गया टैंडर भी गया ठंडे बस्ते में

देहरादून। नगर निगम की लापरवाही का एक नमूना पिछले तीन सालों से बनने वाले शौचालय का निर्माण आज तक न होने से कोतवाली क्षेत्र के दुकानदारों में खासा रोष दिखाई दे रहा हैं जबकि इस शौचालय के निर्माण के लिए तीन वर्ष पूर्व टैंडर स्वयं मेयर द्वारा पास किया गया था। जो अब ठंडे बस्ते में बंद हो गया हैं और टैंडर के रूकने से शौचालय के रूके विनिर्माण से भरी गंदगी अब कई बड़ी बड़ी महामारियों को न्यौता दे रही हैं। 

गौरतलब हैं कि तीन वर्ष पूर्व मेयर विनोद चमोली द्वारा कोतवाली क्षेत्र स्थित जय स्वीट शॉप के नजदीक बने शौचालय के विनिर्माण के लिए एक टैंडर पास किया गया था जिसे आज तक निगम प्रशासन द्वारा न तो खोला गया हैं और न ही शौचालय का विनिर्माण आज तक हुआ हैं। जो अपने आप में बहुत चिंता का विषय बनता जा रहा हैं। इस दौरान शौचालय में भरी गंदगी दिन पर दिन विभिन्न तरह की महामारियों को न्यौता दे रही हैं और निगम प्रशासन की इस लापरवाही से यहां के व्यापारियों में इतना रोष हैं कि वह भी अब निगम प्रशासन के खिलाफ कदम उठाने से पीछे नहीं हट रहें है। व्यापारियों का कहना हैं कि इस शौचालय का निर्माण ३५ साल पूर्व किया गया था लेकिन इसकी देखरेख के लिए निगम प्रशासन द्वारा तीन वर्ष पूर्व वायदा किया गया था जिसके लिए स्वयं मेयर ने टैंडर भी पास किया था लेकिन वह टैंडर भी आज ठंडे बस्ते में बंद हो गया हैं और यहां शौचालय की स्थिति बद से बदत्तर होती जा रही हैं। जहां गंदगी ने अपने पांव इस कदर पसार दिये हैं कि व्यापारियों अब डर सताने लगा हैं कि कहीं उन्हें किसी महामारी का शिकार न होना पड़े। जबकि इस विषय को लेकर व्यापारियों द्वारा कितनी ही बार निगम के स्वास्थ्य अधिकारी और मेयर को शिकायत की जा चुकी हैं। लेकिन कोई भी इस ओर गम्भीर रूप से सोचने को तैयार नहीं हो रहा हैं। 



 

 

हाथ लगाओगे तो डर जाओगे

देहरादून। धनतेरस पर लक्ष्मी को कैसे लायें घर... सोना-चांदी खरीदने से लग रहा हैं डर!हाथ लगाओगे तो डर जाओगे जी हां ये हम नहीं बल्कि उन उपभोक्ताओं का कहना हैं जो धनतेरस के उपलक्ष में ज्वैलरी शॉप तक तो जा रहें हैं लेकिन सोने-चांदी के दामों में एक दम से आयें उछाल से घबराते हुए उल्टे पांव वापिस हो रहें हैं। जो ये सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि अब धनतेरस पर माता लक्ष्मी का आगमन कैसे होगा?

हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार कहे जाने वाले दीपावली के त्यौहार में उपभोक्ताओं का अब सोने चांदी ने भी साथ छोड़ दिया हैं जो ये कहते हुए नजर आ रहें हैं कि न बाबा, न बाबा हाथ मत लगाना वरना दोगुने पैसे भरने पड़ेंगे।सोने चांदी के बड़े इस भाव से अब उपभोक्ता भी इतना सहम गये हैं कि वह इनसे बने विभिन्न प्रोडक्टस को न खरीद कर अब पुराने प्रोडक्टस से ही काम चला रहें हैं। जिसका कारण महंगाई की मार का असर इन पर दिखना जायज बताया जा रहा है। इस दौरान धनतेरस पर बाजार शॉपिंग करने गये धीरेन्द्र कुमार का कहना हैं कि जब वह एक हफ्ते पूर्व बाजार आयें थे तो उन्होंने चांदी के सिक्के का मूल्य पता किया था जो मामूली तौर पवर २५० रूपयें से शुरू होकर ५०० तक था लेकिन आज जब वह उसे खरीदने आयें तो उसका मूल्य बडक़र ३५० हो गया हैं। जिसे खरीदना तो उनकी मजबूरी थी और उनके पास इतना पैसा भी था लेकिन जिन लोगो के पास इतना पैसा नहीं हैं तो वह कहां से इस सिक्के को खरीद कर अपना शौक पूरा कर सकता हैं। इस विषय पर सोचना बहुत जरूरी हो गया हैं। इसी तरह बाजार में परेशानी का बट लिये घूम रहें एक उपभोक्ता जगदीश चन्द्र बड़थ्ेह्लाल का कहना हैं कि काश की वह दो दिन पूर्व ही ५०० का चांदी नोट खरीद लेते तो उन्हें सस्ता पड़ता क्योंकि आज जब वह उसे खरीदने आयें हैं तो उसका रेट भी बढ़ गया हैं। जो आराम से यहां ११०० रूपयें का मिल रहा हैं। जबकि दो दिन पूर्व इसका रेट ६०० रूपयें बताया जा रहा था। वहीं शार्मिला देवी का कहना है कि १००० रूपयें का चांदी का नोट शनिवार को ही १२०० रूपयें में मिल रहा था उसका रेट आज १२०० रूपयें से बढक़र १५०० रूपयें हो गया हैं। जो खरीदने में बहुत ही महंगा प्रतीत हो रहा है। इस दौरान कई उपभोक्ताओं का कहना हैं कि यदि इसी तरह महंगाई बड़ती रही तो इस बढ़ती महंगाई में तो आम इंसान को दो वक्त की रोटी निकालना भी मुश्किल हो जायेगा। इस पर केन्द्र सरकार को काबू करना चाहिए ताकि लोगो को कुछ राहत तो मिल सके। 

पल्टन बाजार में दिखी रौनक.....
दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस के उपलक्ष में दून के पल्टबन बाजार में भी खूब रौनक दिखी। कोई खील पताशे खरीदते हुए नजर आयें तो कोई लडिय़ों के साथ ही रंग बिरंगे बल्ब। इस दौरान लोगो ने पटाखों को भी खूब खरीदा जबकि उनके रेट भी बढ़ चुके हैं। 
कैसे जलायें फूल झड़ी और अनार......
इस वर्ष दीपावली के त्यौहार में अब पटाखों ने भी उपभोक्ताओं का दम निकाल दिया हैं। जिनके रेट इतने बड़ गये हैं जिन्हेंं खरीदना किसी गरीब के बस का तो बिल्कुल भी नहीं है लेकिन क्या करें दीपावली भी तो मनानी हैं जो बिना दीयों और पटाखों के सूनी रहती हैं। 
पटाखों के बढ़े रेट
अनार: ८० से ८५ रूपयें डिब्बा
फूल झड़ी:४५ रूपयें डिब्बा
रस्सी बम:८० रूपयें डिब्बा
एैटम बम:८५ रूपयें डिब्बा
चरखी:४० रूपयें डिब्बा
मुर्गा छाप:६५ से ७५ रूपयें लड़ी
सोने चांदी का उछला रेट
सोने का सिक्का(लक्ष्मी में बना हुआ):२५०० से ५००० रूपयें
चांदी का सिक्का(लक्ष्मी में बना हुआ):३५० रूपयें से २५०० रूपयें
पांच रूपयें (चांदी में बना):११०० रूपयें
हजार रूपयें(चांदी में बना):१६०० रूपयें 

 

भ्रष्टाचार पर शत्रुघन भी बोले खामोश.....

देहरादून। खामोश....इस प्रसिद्ध संवाद से फिल्मी दुनिया से राजनीति के पायेदान पर कदम रखने वाले अभिनेता और लोकसभा सदस्य शत्रुघन सिन्हा ने भी अब भ्रष्टाचार पर खामोशी तान ली हैं। जिन्होंने भ्रष्टाचार मुददे पर सवाल पूछने पर दो टूक जवाब देते हुए कहा कि अभी वह इस विषय पर कोई बात नहीं करना चाहते हैं क्योंकि वह स्कूल के कार्यक्रम में शिरकत करने आयें हैं। 

वैसे तो जब किसी विषय को लेकर सडक़ों पर जनादेशों या आम जनता द्वारा उतरा जाता हैं तो उन पर भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े कर दिये जाते हैं। जिसका ताजा उदाहरण अन्ना हजारे के रूप में सबके सामने मौजूद हैं। जिन्होंने भ्रष्टाचार की लड़ाई लडऩे के लिए एक बड़ा आंदोलन तो छेड़ा लेकिन उस आंदोलन पर भी कई राजनेताओं और संत बाबाओं से लेकर राजनीति विशेषज्ञों ने कई सवाल खड़े कर दिये। आंदोलन के बीच में ही अन्ना पर उंगलियां उठने लगी कि आंदोलन के सह पर अन्ना ने कई लाखों की संख्या में पैसा अंदर किया हैं जो चंदा के नाम पर उन्हें मिला था जिस पर अन्ना ने जवाब देही देते हुए पूरे आरोपो को बेबुनियाद भी साबित कर दिया था लेकिन जहां फिल्मी अभिनेता या अभिनेत्रियां राजनीति से जुड़ जाती हैं तो वह अपने ओदे को न भूलकर समाज सेवा या अन्य देश उपयोगी कार्यो में जुट जाते हैं जिनमें भ्रष्टाचार भी एक नया मुददा बनकर खड़ा हो जाता हैं। अब ऐसे में एक सवाल यह उठता हैं कि किसी भी कार्यक्रम में शिरकत करने आयें इन सैलिब्रेटियों का रूख कार्यक्रम पर ही क्यों टारगेट होता हैं जबकि उन्हें जनता जनाद्र्धन द्वारा सब कुछ मान लिया जाता हैं। कुछ इसी तरह की एक झलक कल तब देखने को मिली जब अपनी अदाकारों से दर्शकों के दिवाने बने अभिनेता और भाजपा के लोकसभा सदस्य शत्रुघन सिन्हा ने भ्रष्टाचार पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। जिन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि अभी वह इस विषय पर कुछ बोलना नहीं चाहते हैं क्योंकि वह इस समय स्कूल के कार्यक्रम में आ रखें हैं और स्कूली बच्चों के सामने वह भ्रष्टाचार की कोई बात नहीं करना चाहते हैं क्योंकि यह बच्चें देश का भविष्य हैं और वह ये नहीं चाहते हैं कि भ्रष्टाचार जैसा घिनौना विचार इन मासूमों के दिमाग में आयें। 

 
शत्रु की इस जवाब देही से मीडिया एक बार के लिए चौक गया था क्योंकि मीडिया भी जानती हैं कि अब भ्रष्टाचार जैसे विषय पर जितना गम्भीर देश की सरकार हैं उतने ही गम्भीर यहां की युवा पीढि़ और स्कूली बच्चें हो रहें हैं। जो  किसी न किसी माध्यम से देश को बताना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार जैसे मुददें को किस प्रकार से समाप्त किया जा सकता हैं? यहां शत्रुघन सिन्हा यह भूल गये कि जब अन्ना हजारे का आंदोलन सक्रिय था तो उस समय स्कूली बच्चें भी उस आंदोलन में अपनी अहम भूमिका उठा रहें थे और जब एक स्कूली बच्चें से पूछा गया था कि बेटा आप यहां क्यों आयें हो तो उसने एक जवाब दिया था कि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए ओर क्या....उस पर जब बच्चें से पूछा गया कि भ्रष्टाचार क्या होता हैं? तो बच्चें ने तुरन्त जवाब दिया कि जब स्कूलों में एडमिशन नहीं होता हैं तो बच्चों के अभिभावकों को कुछ पैसे देकर बच्चें का एडमिशन कराना होता हैं उसे भ्रष्टाचार कहते हैं यदि हम आज इस अपराध के प्रति आवाज नहीं उठायेंगे और आने वाले समय में उनसे भी कालेजों में प्रवेश के लिए अच्छी खासी मोटी रकम मांगी जायेगी। जो बर्दास्त करने योग्य नहीं होगी। अब शत्रुघन सिन्हा जवाब दें कि जिस स्कूल में वह आयें हैं क्या वास्तव में ही वहां के बच्चें भ्रष्टाचार के प्रति कुछ जानते नहीं हैं या फिर स्वयं सिन्हा साहब मौन धारण करते हुए सब को खामोश करना चाहते हैं।वजह कुछ भी हो लेकिन जिस प्रकार से भारत में भ्रष्टाचार का मुददा दिन पर दिन तूल पकड़ता जा रहा हैं उस पर तो अब विदेशी भी कमंट मारने से पीछे नहीं हट रहें हैं क्योंकि उन्हें भी ज्ञात हो गया कि भ्रष्टाचार की जड़े इतनी मजबूत हो गयी हैं जिसे उखाड़ फैकना किसी के बस का नहीं हैं। 

 

 

खोया पर्स कोतवाली में : ईमानदारी अभी भी जिंदा है

नैनीताल। मल्ला रामगढ़ के भट्ट रेस्टोरेंट में 13 अक्टूबर को किसी का लेडीज पर्स छूट गया था। उसमें 3190 रुपए व चांदी का समान रखा था। रेस्टोरेन्ट मालिक तारा ने पहले पर्स मालिक का दो दिन इंतजार किया, लेकिन कोई पर्स लेने नहीं आया। बाद में भट्ट ने चौकी प्रभारी नंदन सिंह अधिकारी को सौंप दिया। कोतवाल विजय कुमार चौधरी ने कहा कि जिस किसी का पर्स हो उसे कोतवाली से ले जाए।



 

17 करोड़ 46 लाख 40 हजार की योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया

चम्पावत। कुमांऊ भ्रमण के दूसरे दिन मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से0नि0) भुवन चन्द्र खण्डूड़ी ने चम्पावत में गोरल चौड़ मैदान में 17 करोड़ 46 लाख 40 हजार की योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। जिसमें 606$60 लाख की लागत के जिला चिकित्सालय, 58$61 लाख की लागत के घुरचुम में क्यैराला नदी पर पैदल सेतु, 122$40 लाख की लागत के काण्डा, श्यामलाताल ग्राम समूह पेयजल योजना तथा 15 लाख की डिग्री कॉलेज में यूजीसी नेटवर्क रिर्सोस सेन्टर को लोकार्पण तथा 224 लाख की लागत से बनने वाले सीएमटी मार्ग से न्याय पंचायत सिमल्टा तक मोटर मार्ग निर्माण, 100$80 लाख की लागत से चम्पावत नगर में रिंग रोड़ निर्माण, 41$43 लाख की कमपेड़ी पेयजल योजना, 25 लाख की लागत से राजकीय इण्टर कॉलेज कर्णकरायत में कक्षा कक्ष का निर्माण, 30 लाख की लागत से राजकीय इण्टर कन्या कॉलेज में कक्षा कक्ष निर्माण, 37$65 लाख की लागत से बनने वाले राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय ओखलन्जा, तथा 37$35 लाख की लागत से बनने वाले राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय द्गिालीचौड़ का शिलान्यास हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा 109 पात्र लोगों को समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित गौरादेवी कन्याधन, विधवा, वृद्घावस्था, विकलांग पेंशन धारकों को 12 लाख 50 हजार की धनराशि के चैक वितरित किये गये। उन्होंने पीएमजीएसवाई के तहत एडीबी के माध्यम से मरम्मत की जा रही लोहाघाट-देवीधुरा-वालिक मोटर मार्ग में इतने माह बीत जाने के बाद भी अभी तक कार्य न होने पर जिलाधिकारी को सन्ताह भर में जॉच कर रिपोर्ट भिजवाने के निर्देश दिये। उन्होंने आरईएस, पेयजल, विद्युत, शिक्षा, आपूर्ति, लोनिवि के अधिकारियों से जनहित के कार्यों में कोताही न बरतनें के निर्देश दिये उन्होंने अटल खाद्यान्न योजना के तहत एपीएल, बीपीएल, अन्त्योदय को निर्धारित मात्रा व दर पर मुहैया कराया जाए। 
 
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों से कहा जिला योजना का पैसा हरहाल में दिसम्बर माह तक व्यय कर लिया जाए तथा माह फरवरी मार्च में खर्च करने की परम्परा पर अंकुश लगाये जाए। जनहित के कार्यों में सहयोग एवं कार्यशैली में परिवर्तन की विशेष आवश्यक्ता है। जनसेवा, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं सुराज के लिए एक नया विभाग खोला गया है जिसके माध्यम से भी पारदर्शी योजनाओं को अनुशासित होकर जनता को अधिकाधिक लाभान्वित किया जायेगा। उन्होंने बैठक में जिलाधिकारी को निदेर्शित किया कि पेंशन योजनाओं कों नवम्बर से हरहाल में ऑन लाईन करने की व्यवस्था कर ली जाए। उन्होंने गौरा देवी, नंदा देवी कन्या धन योजनाओं के साथ ही विधवा, वृद्घावस्था विकलांग पेंशन धारकों को नियमित रूप से पेंशन निर्गत कराने को निर्देश दिये। उन्होंने कहा शासन स्तर से इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए धन की कमी आड़े नहीं आने दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य बाहुल्य क्षेत्र है और सैनिकों का सम्मान करते हुए उनकी सुविधाएं बढ़ायी गयी। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती जनपद भ्रमण पर दीनदयाल पार्क के लिए धन आवंटित करने व नगर पंचायत को पालिका का दर्जा दिये जाने की मांग पर इसके लिए शासन स्तर पर जल्द कार्यवाही किए जाने का भरोसा क्षेत्रवासियों को दिलाया। जनसभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए पूर्व राज्य मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायिका वीना महराना ने सरकार की उपलब्धियों का बखान किया। इस अवसर पर अपने उैोधन में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल ने कहा कि सरकार लोक जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में तेजी से कार्य करने, राज्य में बने नये वन अधिनियम कानून से विकासशील कार्यों की कार्य क्षमता बढ़ी है। 
 
इस अवसर पर दायित्वधारी केसी पुनेठा, शिवराज सिंह कठायत, हयात सिंह महरा, माधवानन्द जोशी, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमा पाण्डेय, नगर पंचायत अध्यक्ष जैलाल, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष हेमा जोशी सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। 

 

सडक़ों का हाल-ए-दर्द : कमर तोड़ सडक़ों से हांफने लगे हैं दून वासी

देहरादून। बाबू जी धीरे चलना,इन सडक़ों से जरा संभलना.....बड़े धोखे दिये हैं विभागों ने जी हां कुछ इसी तरह का हाल आज दून का हो गया हैं। जहां की कमर तोड़ सडक़ों पर चलने से अब दून वासी भी हांफने लगे हैं और इन सडक़ों पर चलने से पूर्व भगवान के आगे दसों बार हाथ जोड़ते हुए नजर आ रहें हैं क्योंकि  उन्हें इस बात का डर सताने लगा हैं कि घर से बाहर तो निकल गये हैं अब नजाने घर पहुंचने तक शरीर का कौन सा अंग टूटा हुआ मिले। 

प्रदेश की राजधानी देहरादून की सडक़ों का हाल-ए-दर्द इतना भयावह हो चुका हैं कि अब स्वयं सडक़े भी अपने दर्द को बयां करने से पीछे नहीं हट रही हैं। जिस कारण आज इन सडक़ों पर चलने से अब जनता भी चलने से कतरा रही हैं और कमर तोड़ सडक़ों से बचने के लिए किसी न किसी दूसरे रास्ते को खोज रहें हैं। जिससे न केवल कोई ओर बल्कि शहर के अन्य मौहल्लों में रहने वाले लोग भी परेशान हो रहें हैं। जिससे यहां के विभागों को सहोकार नहीं रह गया हैं। दून की टूटी फूटी सडक़ों और बड़े खडड्ें केवल मौत को ही बुलावा दे रहें हैं जिनसे पूरा दून त्रस्त हो चुका हैं। अब यदि यहां पर रायपुर रोड़ मार्ग की बात करें तो यहां की सडक़ तो पिछले दो तीन माह से टूटी फूटी हालत में ही पड़ी हुई हैं। जिनकी मरम्मत का  कार्य आज तक शुरू नहीं किया गया हैं और यह अपने आप में बहुत ही गम्भीर विषय बनता जा रहा हैं।वहीं कर्जन रोड़ मार्ग, सरकुर्लर मार्ग और अन्य मार्गो की सडक़ों का भी हाल बुरा होता जा रहा हैं। जिन पर बड़े बड़े खडडे और टूटी सडक़ें अपने आप में विभागों की पोल भी खोल रही हैं। लेकिन बावजूद इसके विभाग इन लापरवाहियों से बाज नहीं आ रहा हैं और आज तक इन सडक़ों का निर्माण न के बराबर हो रहा हैं। जिन पर आसानी से आज की सडक़ दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। जिनसे हर किसी को गम्भीर चोटें लगना अब आम बात हो गयी हैं।
 
इन टूटी सडक़ों से जनता इतनी त्रस्त हो गयी हैं कि अब वह स्वयं ही सडक़ निर्माण में जुटने को तैयार बैठी हैं। जिनका मानना हैं कि यदि उन्हें इन सडक़ों के निर्माण का ठेका दिया जायें तो वह अवश्य ही इस ओर कार्यवाही करते हुए सम्बन्धित विभागों को मुह तोड़ जवाब दे सकते हैं। वहीं दूसरी ओर बनी बनाई सडक़ों पर खुदाईका कार्य भी विभागों द्वारा किया जा रहा हैं जिसमें जल संस्थान द्वारा सर्वेचौक से शुरू किये गये इस खुदाई के कार्य को सौंग नदी तक चलाया जायेगा। इस दौरान तो चूंगी में अच्छी खासी बनी सडक़ भी टूट जायेगी जिसे बनने में पूरा एक साल बीत जायेगा। जबकि इस मार्ग को बनाने में पूर्व में भी सम्बन्धित मौहल्ले वासियों द्वारा धरना दिया गया था शायद इस बार भी उन्हें धरने का ही सहारा लेना पड़ेगा। 
 

तो अब गरीबों के घरों पर कौन कर रहा हैं कब्जा....

देहरादून। यूं तो राजधानी में निगम की भूमि सहित अनेक नदियों के किनारें कब्जा कर अपने रहने का सहारा ढूंडने वाले मलिन बस्तियों को उजाडऩे का काम निगम प्रशासन द्वारा करने में दो मिनट भी नहीं लगाये जाते हैं और वर्षो से जिस छत्त के नीचे एक गरीब आदमी अपने परिवार के साथ रह रहा होता हैं उससे वहीं छत्त दो सैकेंड में छीन ली जाती हैं लेकिन उन्हें सहारा देने की बात कह कर निगम प्रशासन इस मामले को अपने फंदे से निकालने के लिए इस हद तक आ जायेगा इसका अंदाजा लगाना भी बहुत मुश्किल हो रहा हैं। 
 
जी हां निगम प्रशासन की कच्छुए चाल से चलने वाली इस कार्यप्रणाली को देखकर तो यहीं सवाल उठ रहा हैं कि अब गरीबों के घरों पर कौन कब्जा करने वाला हैं?सूत्रों की माने तो शहर में मलिन बस्तियों का टैग लेकर नदियों किनारे या फिर निगम की भूमि पर झोपड़ पटटी बनाकर रहने वाले गरीब लोगो के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अहमदाबाद की तर्ज पर फ्लैटस बनाने का निर्णय लिया गया था। जिन्हें शहर के हर उस क्षेत्र में निर्मित करना था जहां पर मलिन बस्तियों की तदाद ज्यादा हैं। ताकि गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगो को भी रहने का अच्छा सहारा मिल जायें और भूमि पर से कब्जा धारियों को भी हटाया जा सके लेकिन यह सपना सच्च होता तब दिखेगा जब इस पर कोई कार्यवाही होगी। कुछ इसी तरह का सपना संजाये अब गरीब बस्ती में रहने वालों के दिल और अरमा टूटने लगे हैं क्योंकि उन्हें भी अब विश्वास हो चला हैं कि निगम प्रशासन द्वारा उन्हें सिर्फ धोखे में ही रखा जा रहा हैं जिन्हें पक्के मकान का झूठा सहारा दिखाकर उनके कच्चे मकानों से भी हटाया जा रहा हैं।अब यदि निगम प्रशासन की कच्छुआ चाल वाली कार्यप्रणाली की बात करें तो निगम प्रशासन द्वारा हर बार कितनी ही योजनाओं की घोषणाओं को घोषित तो कर दिया जाता हैं लेकिन उसे क्रियान्वित करने में एक मेयर बदल भी जाता हैं। जिस कारण आज तक निगम की एक भी योजना सफलता का जामा नहीं ओढ़ पायी हैं और उन योजनाओं का लाभ उन लोगो तक नहीं पहुंच पाया हैं जिन्हें वास्तविक तौर पर उनका लाभ दिया जाना था। 
 
कुछ इसी तरह की एक योजना फ्लैटस बनाने की थी। जिसमें निगम प्रशासन द्वारा शहर के दो प्रमुख स्थानों चन्दन नगर और कुष्ठ आश्रम के नजदीक फ्लैटस बनाये जाने थे। जिनका कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका हैं और उनका निर्माण भी अधूरा ही लटक गया हैं। जिस कारण न तो गरीबों को उनका आशियाना ही मिल पा रहा हैं और न ही उन्हें उनकी झोपड़ पटिटयों में रहने ही दिया जा रहा हैं। जो अपने आप में बहुत ही चिंता का विषय बनता जा रहा हैं।उधर जब भी निगम प्रशासन से इस बारे में सवाल किया जाता हैं तो उनका एक ही जवाब होता हैं कि ईमारतों के निर्माण का कार्य चल रहा हैं जो जल्द ही पूरा हो जायेगा। जबकि अन्य फ्लैटस की डीपीआर अभी निगम प्रशासन द्वारा तैयार नहीं की गयी हैं जिस कारण उसे अभी फिल्हाल रोक दिया गया है।
अब यहां एक सवाल यह उठता हैं कि यदि निगम प्रशासन द्वारा एक फ्लैटस की ही डीपीआर तैयार नहीं की जा रही हैं तो आने वाले समय में फ्लैटस को कैसे तैयार किया जायेगा। जिस पर विचार करने के स्थान पर निगम प्रशासन अभी सुस्ता ही रहा हैं और  प्रदेश सरकार भी उसकी सुद लेने को तैयार नहीं है। अब यदि बात की जायें तो उन गरीब परिवारों की तो यहां राजधानी में अभी तक १०३ मलिन बस्तियों को सूची में शामिल किया गया हैं। जिनमेंं से १२३ को मान्यता दी गयी हैं जिन्हें मान्यता मिलने के बाद नगर निगम की सूची में शामिल किया गया हैं लेकिन बावजूद इसके उन्हीं बस्तियों को उखाडऩे से भी निगम प्रशासन परहेज नहीं कर रहा हैं और जब देखो हर दूसरे दिन अपनी टीम को लेकर इन बस्तियों को अपने काल का ग्रास बनाया जाता हैं। 
वहीं दूसरी ओर बस्तीवासियों का आरोप हैं कि यदि उन्हें वह इस शहर में रहने नहीं देना चाहते हैं तो साफ तौर से कह दे क्योंकि रोज रोज के जख्म देने से बेहतर हैं कि वह एक ही बार में अपना ठिकाना किसी ओर शहर में ढूंड ले या फिर मौत को गले लगाकर  सभी को इससे शांति दे सके।एक ओर इन मलिन बस्तिवासियों का दुख और दूसरी ओर निगम प्रशासन की लापरवाही जो अब गरीबों के लिए नासूर बनती जा रही हैं। अब यहां एक सवाल यह उठता हैं कि आखिर कब निगम प्रशासन अपनी कुंभकरणी नींद से जागेगा और इस ओर सही कार्यवाही करते हुए गरीबों को उनका आशियाना देगा। 



30 days as CM : Maj. General (Retd.) Bhuwan Chandra Khanduri

Dehradun : Chief Minister Major General (Retd.) Bhuwan Chandra Khanduri’s one month in office has witnessed a historical initiative in the direction of bringing about Suraaj and Sushasan (Good governance and good administration) in Uttarakhand. The manner in which the Chief Minister has started off his work has helped transmit a new ray of hope and confidence among the people of the State. A foundation of a clean, transparent and a responsible administration was laid while adopting important resolutions and taking significant decisions in the very first meeting of the cabinet itself, held on September 11 after the swearing-in ceremony. It was decided that that the office of the Lokayukta in the State would be made stronger and that the Chief Minister will also be brought under its ambit. All Ministers, IAS and IPS officials of the State were directed to declare their assets by 15 October, whereas it was also decided to make provision for right to public service to ensure government services to the general public without any hindrance, and for confiscation of benaami property and its utilisation in public interest.

In compliance of the decisions taken in the Cabinet to bring about cleanliness in the Government and the Administration, a separate department of ‘Suraaj, Bhrashtachar Unmulan evam Jan Sewa’ has been formed to fight against corruption, and ensure good governance and public service. In order to ensure availability of essential services within specified time frame to the general public in Uttarakhand, a right to public service Act has been passed. Under this, service mainly include ration card, mutation and other revenue records, income certificate, caste certificate, permanent resident certificate, birth-death certificate, driving licence, registration of document, passing of layout plan, electricity and water connection, vehicle registration, undisputed change of name, among others, have been identified. In case if service is not provided within the set time, then disciplinary proceedings would be initiated against the concerned official or employee. To monitor the said provision, a commission would soon be constituted which besides monitoring and inspecting the works of the first and the second appeals will also give its suggestions to make right to public service more effective and stronger. With the passing of the right to service Act, the general public would be freed of corruption in their day-to-day lives.

Under Chief Minister Shri Khanduri’s leadership, the State Government has taken a major initiative in the direction of bringing about good governance, by passing an Act to confiscate ill-gotten properties of public servants earned through illegal means and for utilising the same in public interest. Under this, special courts would be set up, which, after hearing the public servants’ side, will issue orders regarding taking possession of wealth and properties obtained through illegal means within a maximum period of six months. Besides instilling a sense of fear among corrupt public servants, this will also ensure utilisation of the unauthorised properties in public utility works. As per the transparent procedure of working of the Government, an E-Procurement system has been introduced in the Public Works Department.

In order to make the process of transfer of Government employees, more fair, free of favouritism, and transparent, a law has been formulated in place of the transfer policy. Each and every accessible and remote area has been classified district-wise, the list of which would be made available on the website. Besides, the services rendered by all government officials and employees in remote and difficult areas would also be publicised on the website. A system has been made to automatically relieve the employees posted in remote areas and transfer them to accessible areas after a prescribed time period. Posting will compulsorily be made in remote and inaccessible areas after first appointment and promotion. Posting in remote and inaccessible areas has been made pre-requisite for promotion. To make the entire transfer process clean and transparent, software would soon be developed. While the new law related to transfer would grant relief to sincere employees, it would also help ensure the availability of officials and employees in the remote areas of the State.

Besides clamping down on corruption, the State government has also taken several decisions for the development of the State and for extending rightful benefits to its employees. In order to remove the Forest Act-related hurdles, the provision that granted protected forest status to the benaap land has been annulled. Owing to this decision of the Government, there would be no need now to undertake cumbersome procedures for transfer of forest land for development purposes. While fulfilling the long-standing aspirations of the teachers, the provision to grant them term-end benefits has been restored, which is expected to benefit about 70,000 teachers in the State. The number of posts of Drawing and Disbursing Officers (DDOs) in the state has been increased from 1025 to 4000. This will provide the much needed relief to salaried employees and the pensioners in the remote and far-flung areas of the State. The delivery system in pension disbursement has been made more logical and transparent. The State government employees have been extended the benefit of a 6 percent dearness allowance, which is the same as the central employees. The Chief Minister waived off the State’s share of 25 percent VAT on the enhancement, in order to grant some relief to the residents of the State from the increase in the prices of petrol at the central level.

In order to know about the problems of the general public and to resolve them at the earliest, Chief Minister Major General (Retd.) Bhuwan Chandra Khanduri is not only engaged in continuously meeting the people who call on him at his residence but has also been in the people’s midst by touring the different areas of the State during the last one month. The Chief Minister has directed the District Magistrates unequivocally to expeditiously resolve the problems of the general public. He has directed for putting a system into place to ensure that people do not have to make rounds of the capital for such works that can be done at the local level, as it entails wastage of precious time and money of the people.

Chief Minister Shri Khanduri has also carried out effective advocacy of matters related to Uttarakhand at the central level. During his meeting with Prime Minister Dr. Manmohan Singh on October 5, Chief Minister Shri Khanduri demanded among other things, speedy development of road, rail, air and communication network in the frontier (border) areas and extension of the duration of the Concessional Industrial Package to March 2017. He also asked the Prime Minister for providing Central funding to Uttarakhand on 90:10 basis, as is in the case of north-eastern states, and drew his attention to the pending railway projects in Uttarakhand such as the Muzaffarnagar-Roorkee, Dehradun-Vikasnagar-Kalsi, Rishikesh-Karnaprayag, and Tanakpur-Bageshwar rail lines. Besides, the Central government was also asked to allocate 6 MSSCMD of gas for the gas-based plants at Kashipur and Haridwar. The Chief Minister General Khanduri also demanded introduction of a new scheme for development of Himalayan agriculture in the XIIth Five Year Plan. During his meeting with Finance Minister Shri Pranab Mukherjee on 1 October, the Chief Minister demanded payment of Rs. 1545.98 crore, which is still lying pending under the pension head, from the Uttar Pradesh government, and also demanded lump sum payment of the Central Plan funds. At this, the Central government has given its assurances regarding initiating comprehensive action while keeping in view the interests of Uttarakhand.

It is clear that in the short duration of one month itself, Chief Minister Major General (Retd.) Bhuwan Chandra Khanduri has laid the foundation stone of Suraaj and Sushasan in the State. The impact of transparent and corruption–free administration propounded by the Chief Minister is beginning to become evident in the day to days affairs of the state. While a clampdown on corruption at the higher and the lower levels has been brought about, on the other hand, along with ensuring a system to resolve the problems of the people at the local level, a sustained monitoring of the same is also being carried out. The Chief Minister while carrying out an effective advocacy of the State’s interest before the Prime Minister and the Finance Minister, has drawn special attention to the problems related to Uttarakhand.

विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर

देहरादून। उत्तराखंड में अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले चुनाव की तैयारी जोरों पर है। मतदान के लिये करीब 17 हजार इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें कोलकाता से मंगायी जा रही हैं।
 
 राज्य निर्वाचान आयोग सूत्रों ने बताया कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने का कार्य भी जारी है तथा जनवरी महीने तक इसे हर हालत में पूरा कर लिया जायेगा। सूत्रों के अनुसार, राज्य में चुनाव के समय जो बर्फीले इलाके हैं उसे पहले से ही चिन्हित कर लिया जायेगा। ताकि वहां चुनाव कराने के लिये विशेष टीम तैनात की जा सके।
 
दुर्गम क्षेत्रों में भारत तिब्बत सीमा पुलिस की मदद ली जायेगी। सूत्रों ने बताया कि डाक मतपत्र के बारे में नामांकन के बाद संबधित पतों पर मतपत्र भेजे जायेंगे ताकि लोग समय से अपना मताधिकारों का उपयोग कर सकें।


 

आसमान छू रहे फूलों के दाम

श्रीनगर गढ़वाल। नवरात्र और शादियों के सीजन की शुरुआत के साथ ही फूलों के दाम भी चढ़ गए हैं। सजावट और पूजा में प्रयुक्त होने वाले फूलों के दामों में लगभग प्रति किलो 25 से 35 रुपये तक की वृद्धि हुई है। वहीं, गुलाब के दाम में कुछ कमी दर्ज की गई है।

पहाड़ों में पूजा में पहले से ही फूलों का प्रयोग बहुतायत से होता रहा है। इन दिनों शादियों में भी सजावट के लिए फूलों का प्रयोग किया जा रहा है। रुद्रप्रयाग और चमोली जनपदों के लिए भी श्रीनगर से ही फूलों की सप्लाई हो रही है। श्राद्ध पक्ष की समाप्ति के बाद नवरात्र और शादियों की शुरुआत होने से धार्मिक आयोजन भी खासी संख्या में हो रहे हैं जिनमें पूजा और सजावट के लिए फूलों का प्रयोग किया जा रहा है। इसके कारण फूलों की कीमतों में पिछली माह की तुलना में खासी वृद्धि हुई है। श्राद्ध पक्ष में 30-45 रुपये प्रति किलो बिक रहा गेंदा इन दिनों 70 रुपये किलो तक पहुंच गया है। गिल्ड के फूल 45 रुपये दर्जन से बढक़र 70 रुपये दर्जन में बिक रहे हैं। सजावट में प्रयुक्त होने वाला जरदरा भी 30 रुपये से बढक़र लगभग 75 रुपये दर्जन पर पहुंच गया है। वहीं इन सबके बीच गुलाब की कीमतों में कमी हुई है। पिछले माह तक 170-190 रुपये में बिक रहा गुलाब इस माह 130 रुपये दर्जन पर पहुंच गया। गुलाब की कली के दाम भी 20 रुपये से घटकर 15 रुपये रह गए हैं। 

श्रीनगर के सबसे बड़े जैकब भाई फूल सेंटर के व्यापारी उम्मेद सिंह बिष्ट ने बताया कि धार्मिक आयोजनों की अधिकता के कारण इस माह फूलों के दामों में वृद्धि हुई है। साथ ही बारिश के कारण भी फूलों की पैदावार प्रभावित हुई है। 

 

सांप्रदायिक हिंसा, तीन की मौत, कर्फ्यू

रुद्रपुर । तराई का शांत शहर रुद्रपुर सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल उठा। कुरान शरीफ की कथित बेअदबी से मुस्लिम समुदाय के लोग भडक़ उठे। उन्होंने इंदिरा चौक पर जाम लगाकर पांच दर्जन से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया। आधा दर्जन बसें क्षतिग्रस्त कर दीं। जबर्दस्त पथराव से दर्जन भर पुलिस कर्मियों समेत 31 लोग जख्मी हो गए। मौके पर पहुंचे एसडीएम पथराव में घायल हो गए। दंगे में तीन लोग मारे गए। दो दर्जन से अधिक दुकानें फूंक दी गई। स्थिति को काबू करने के लिए पुलिस ने कई राउंड हवाई फायरिंग की। दंगा वाले क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है।

शहर के भदईपुरा निवासी मोहम्मद मुश्ताक के घर के सामने रविवार की प्रात: किसी शरारती तत्व ने कुरान शरीफ को क्षतिग्रस्त करते हुए उस पर खून व मांस के टुकड़े रखकर फेंक दिया। आसपास के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जब यह देखा तो वे भडक़ उठे। इधर, दूसरे समुदाय के लोगों के भी एकत्र होने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। एसएसपी गणेश मर्तोलिया, एसडीएम वीर सिंह बुदियाल आदि ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत करने का प्रयास किया। थोड़ी देर बाद सीरगोटिया, गांधी कालोनी, सुभाष कालोनी व भदईपुरा के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इंदिरा चौक पहुंचकर जाम लगा दिया। देखते ही देखते उन्होंने वाहनों पर पथराव कर दिया। इससे आधा दर्जन बसें क्षतिग्रस्त हो गई। इंदिरा चौक पर जाम लगने पर एडीएम विजय चंद्र कौशल व बंशीधर तिवारी, एएसपी अशोक भट्ट, एसडीएम वीर सिंह बुदियाल व सीओ पंकज भट्ट भारी संख्या में पुलिस, पीएसी व दंगा नियंत्रण वाहन के साथ मौके पर पहुंचे। लोग इतने उग्र थे कि उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में ही मोबाइकों, जीपों, टै्रक्टरों व ट्रकों को आग के हवाले करना शुरू कर दिया। एसडीएम श्री बुदियाल ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उग्र भीड़ ने उल्टे उन्हें मारपीट कर घायल कर दिया। यहां तक कि उनके कपड़े भी फाड़ डाले। यह देखकर पुलिस ने लाठी फटकार कर लोगों को रपटाया और एसडीएम का बचाव किया। इसी बीच लोगों ने पुलिस पर जबर्दस्त पथराव कर दिया। लोगों के उग्र व्यवहार को देखकर पुलिस बैकफुट पर आ गई और असहाय होकर आगजनी व पथराव देखने लगी। पथराव के दोपहर तक कई दौर चले। इसमें एडीएम समेत तमाम पुलिस कर्मी जख्मी हो गए। इस दौरान लोगों ने आसपास के होटल, पेट्रोल पंप को भी नहीं बख्शा।
 
इधर मुस्लिम समुदाय के रूप को देखकर हिंदू समुदाय के सैकड़ों लोगों ने भी रम्पुरा व रोडवेज से इंदिरा चौक की तरफ बढक़र पथराव शुरू कर दिया। दोनों पक्षों में भी पथराव के कई दौर चले। पुलिस बेबस होकर देखती रही। अलबत्ता पुलिस ने कई राउंड हवाई फायर करते हुए उग्र भीड़ को खदेडऩे की नाकाम कोशिश की। इस बीच सीरगोटिया मुहल्ले में छतों पर चढ़े लोगों ने तमंचों से फायर, हथगोले व तेजाब भरे बल्ब पुलिस कर्मियों व दूसरे समुदाय के लोगों पर फेंके। इससे कई घायल हो गए।
 
इधर जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम स्थिति का जायजा लेने मौके पर पहुंचे। हालात देखकर वह उस समय लौट गए। थोड़ी देर बाद दंगा नियंत्रण वाहन में बैठकर एसएसपी श्री मर्तोलिया नैनीताल रोड की ओर गए। जब लौटे तो उन्होंने छतों पर चढ़े लोगों को पथराव न करने की हिदायत दी तो उन पर ही पथराव कर दिया गया। यह देखकर पुलिस कर्मियों ने लोगों को लाठियां भांजकर तितर-बितर किया। पुलिस व उग्र भीड़ के बीच आगे-पीछे होने का खेल चलता रहा। स्थिति काबू न आते देखकर कर्फ्यू की घोषणा की गई। सीरगोटिया व रम्पुरा की तरफ फ्लैग मार्च किया गया। पुलिस की सख्ती देखकर लोग तितर-बितर हो गए। इससे पहले उपद्रवियों की फायरिंग के दौरान एक अज्ञात युवक की सिर पर गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद भदईपुरा निवासी शेर सिंह की भी छर्रे लगने से निजी चिकित्सालय में मौत हो गई। उसे 24 छर्रे लगे थे। इधर दंगे में घायल खेड़ा निवासी 50 वर्षीय अब्दुल रहमान ने बरेली ले जाते समय किच्छा में दम तोड़ दिया। उपद्रव के दौरान नैनीताल रोड, सिब्बल सिनेमा, रोडवेज के आसपास की दुकानों में लूटपाट कर आग लगा दी गई।
 
कर्फ्यू लगने के बाद जिलाधिकारी श्री पुरुषोत्तम व एसएसपी श्री मर्तोलिया ने भारी फोर्स के साथ शहर का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया। खबर लिखे जाने तक स्थिति नियंत्रण में थी।


नरेंद्रनगर को पृथक जनपद बनाने की मांग को संघर्ष समिति ने 72 घंटे का क्रमिक अनशन शुरू

ऋषिकेश। नरेंद्रनगर को पृथक जनपद बनाने की मांग को संघर्ष समिति ने 72 घंटे का क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। पंद्रह अगस्त को घोषित किए गए चार नए जिलों में नरेंद्रनगर को शामिल न किए जाने के बाद संघर्ष समिति ने आंदोलन का बिगुल फूंका है।
मुनिकीरेती क्रांति चौक पर गांधी जयंती व उत्तराखंड आंदोलन के शहीदी दिवस पर नरेंद्रनगर जिला बनाओ संघर्ष समिति ने 72 घंटे का क्रमिक अनशन आरंभ किया। समिति अध्यक्ष संजय कोठियाल, संरक्षक मनोज द्विवेदी, महासचिव वाचस्पति रयाल आदि ने कहा कि नरेंद्रनगर 63 वर्षो तक टिहरी जनपद का मुख्यालय रहा है। यहां आज भी जिले के लिए आधारभूत ढांचा मौजूद है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की मांग के पीछे मकसद राज्य का विकास रहा है और यह तभी संभव है जब छोटे जनपदों का गठन किया जाए। सरकार ने चार नए जनपदों का सृजन करने की घोषणा की है जो स्वागत योग्य है, मगर नरेंद्रनगर को इसमें शामिल न कर सरकार ने स्थानीय लोगों की वर्षो पुरानी मांगों को दरकिनार किया है। वक्ताओं ने टिहरी जनपद के साथ उपेक्षा का आरोप भी सरकार पर लगाया। संघर्ष समिति ने साफ किया कि नरेंद्रनगर को जिला बनाने की मांग को उनका आंदोलन ठोस निर्णय न होने तक जारी रहेगा। यह क्रमिक अनशन चार अक्टूबर तक चलेगा। पहले दिन अध्यक्ष संजय कोठियाल, मनोज द्विवेदी, भाष्कर गैरोला, पंकज भट्ट, प्रेम सिंह नेगी, लाखराम बिजल्वाण और मेहर सिंह पयाल आदि क्रमिक अनशन पर बैठे। इस दौरान शीशराम कंसवाल, महाजन पंवार, विपिन रावत, धन सिंह रावत, बीएस पयाल और सूर्यमणि डंगवाल आदि मौजूद रहे।



वाटर सामाजिक संस्था द्वारा नि:शुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्रारम्भ

गदरपुर। वाटर सामाजिक संस्था द्वारा उत्तराखण्ड यूथ क्लब के सदस्यों को प्रशिक्षित करने के लिए कम्प्यूटर प्रशिक्षण का पहला बैच प्रारम्भ कर दिया गया है। वाटर संस्था की अध्यक्षा शिल्पी अरोरा ने बताया कि संस्था यूथ क्लब के सदस्यों को कम्प्यूटर का बेसिक ज्ञान नि:शुल्क करा रही है। प्रथम चरण में संस्था ने 50 सदस्यों का बैच बनाकर कम्प्यूटर प्रशिक्षण की शुरूआत कर दी है। कम्प्यूटर प्रशिक्षण लेने में सदस्य भी काफी रूचि ले रहे हैं उन्होने कहा कि संस्था सभी सदस्यों को प्रशिक्षित करेगी जिससे कि युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकेगें उन्होने कहा कि आज कम्प्यूटर का युग है सभी कार्यालयों में कम्प्यूटर के द्वारा ही कार्य किये जाते है जिससे कि युवाओं का प्रशिक्षित होना जरूरी है।

उन्होने बताया कि 18 से 35 वर्ष की आयु के युवक एवं युवतियां उत्तराखण्ड यूथ क्लब का सदस्य बनकर इसका लाभ ले सकता हैं। इससे युवाओं का भविष्य तो निखरेगा ही साथ ही साथ उनका मनोवल भी बढ़ेगा।
 
इस प्रषिक्षण कार्यक्रम में परिवर्तन विकास संस्थान का पूरा योगदान है और कार्यक्रम उनके सहयोग से सम्भव हो पाया है परिवर्तन विकास के सचिव श्री सिब्ते नबी जी ने बताया कि हमारा पूरा सहयोग उत्तराखण्ड यूथ क्लब और षिल्पी अरोरा जी के साथ है उनकी तरफ से हमें आगे भी उत्तराखण्ड यूथ क्लब के जितने भी सदस्यों की सूची मिलेगी उन्हेे भी नि:षुल्क प्रषिक्षण दिया जायेगा। यह कार्यक्रम संस्थान में कार्यरत प्रषिक्षक श्री अफसर अली की देखरेख में होगा। षिल्पी अरोरा ने अपनी तरफ से परिवर्तन विकास संस्थान के सचिव श्री सिब्ते नबी जी का आभार व्यक्त किया और कहा कि हमें ऐसा सहयोग मिलता रहा तो पूरे क्षेत्र का सर्वागीण विकास हो सकेगा। हम इनके आभारी है। 


सीएम ने साम्प्रदायिक तनाव से उत्पन्न स्थिति को दु:खद बताया, लोगों से शांति व संयम बनाए रखने की अपील की

देहरादून । मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से$नि$) भुवन चन्द्र खण्डूड़ी ने ऊधमसिंहनगर के रूद्रपुर शहर में साम्प्रदायिक तनाव से उत्पन्न स्थिति को दु:खद बताते हुए लोगों से शांति व संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उाराखण्ड में साम्प्रदायिक सौहाद्र्र की परम्परा रही है व सभी धर्मों व सम्प्रदायों के लोग मिलजुलकर रहते आए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कतिपय अराजक तत्वों द्वारा प्रदेश के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाडऩे का प्रयास किया गया है, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन को घटना की विस्तृत जांच करने व अराजक तत्वों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री खण्डूड़ी ने घटना में मृत लोगों के प्रति भी गहरा दु:ख व्यक्त हुए दिवंगत आत्माओं की शांति एवं दु:ख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। उन्होंने घटना में घायल हुए व्यक्तियों के समुचित उपचार के भी निर्देश दिये है। 
 
रूद्रपुर से जिलाधिकारी डा$बीवी$आर$सी$ पुरूषोाम ने बताया कि शांति व्यवस्था कायम करने के लिए रूद्रपुर थाना क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कफ्र्यू लगा दिया गया है। उन्होंने बताया कि जनपद में स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि आज की घटना में दो लोगों की मृत्यु तथा लगभग 10 लोगों घायल हुए है। घायलों को उपचार हेतु चिकित्सालय में भर्ती किया गया है। पूरे शहर को दो जोन व पांच सेक्टरों में विभाजित कर सैक्टर मजिस्ट्रेट व पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। पीएसी की पांच कम्पनी लगा दी गई है, जबकि शीइा्र ही रैपिड एक्शन फोर्स की तीन कम्पनी पहुंच गई है। आयुक्त कुमायूं कुणाल शर्मा व डीआईजी कुमायूं अमिताभ सिन्हा मौके पर पहुंच कर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। अराजक तत्वों की पहचान की जा रही है व अब तक 6 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। 




40 साल बाद हुआ रुद्रपुर साम्प्रायदिकता के हवाले।

रुद्रपुर । रविवार प्रात: 8:00 बजे सैकड़ों मुसलमान इन्दिरा चौराहे पर एकत्र होकर हाथो में हथियार लेकर थाने पर प्रदर्शन कर रहे थे, जिस पर स्थानीय पुलिस प्रशासन के समझाने पर कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस प्रशासन पर पथराव एवं गोलीबारी प्रारम्भ कर दी, जिससे मौके पर पहुचे उप जिलाधिकारी वीर सिंह बुधियाल बुरी तरह घायल हो गये तथा थाना प्रभारी आर0एस0 असवाल, अपर जिलाधिकारी वंशीधर तिवारी को गम्भीर चोटे आयी। हिंसा के चलते हुए लाठी चार्ज एवं पथराव के दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति को गोली लगने के कारण मृत्यु हो गयी। 

मुस्लिम व्यक्ति की मृत्यु से आक्रोशित सैकड़ों मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने इन्दिरा चौराहे पर एकत्र होकर एक पैट्रोल पम्प में आग लगा दी एवं किच्छा रोड पर हिन्दुओं की दुकानों एवं पुलिस एवं निजी वाहनों की सडक़ पर तोडफ़ोड शुरु कर दी। अनियंत्रित भीड़ असलहों के साथ थाने की ओर बढऩे लगी, तभी निकटवर्ती ग्राम रम्मपुरा के सैकड़ों लोग सडक़ों पर मुस्लिम प्रदर्शनकारियों के विरोध एवं जिला प्रशासन पर हुए पथराव के विरोध में सडक़ों पर उतर आये तथा दोनो समुदायों के लोगों ने गोलीबारी शुरु कर दी। इस दौरान कई दुकानों को असामाजिक तत्वों द्वारा आग के हवाले कर दिया। 
 
ज्ञातव्य है कि यदि रम्मपुरा के गॉंववासी सडक़ों पर नहीं उतरते, तो जिला पुलिस प्रशासन के साथ बहुत बड़ा हादसा घट सकता था। स्थिति तनावपूर्ण तथा अनियंत्रित होने पर आयी पुलिस फोर्स एवं जिला पुलिस प्रशासन द्वारा कफ्र्यू लगा दिया गया। कुल मिलाकर इसमें एक जनहानि एवं कई व्यक्ति दोनों समुदाय के घायल हो गये। यदि समय रहते जिला प्रशासन ने कोई कड़ा कदम नहीं उठाया, तो प्रदेश में साम्प्रदायिक हिंसा का माहौल कायम हो जायेगा।  








खण्डूड़ी के व्यक्तित्व की पहचान उनके पद से नहीं उनके कार्यो एवं आचरण से होती है: सुरेश राणा

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री खण्डूड़ी ऐसे व्यक्तित्व के धनी है जिनकी पहचान पद से नहीं उनके कार्यो एवं आचरण से होती है। श्री खण्डूड़ी भाजपा के कर्मठ एवं अग्रणीय नेताओं में से एक है और उनकी इस छवि के कारण उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देशवासियों के मन में इनके प्रति अगाध श्रद्घा है।
 
महिला आयोग की अयक्षा श्रीमती सुशीला बलूनी ने कहा कि शहीद पूरे देश के लिए पूजनीय है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं रामपुरा तिराहा कांड की साक्षी है और उन्होंने स्वयं पूरे घटनाक्रम को भुगता है जिसको याद करके आज भी दिल सिहर उठता है लेकिन इस कांड में मुजफ्फरनगर के स्थानीय लोगों ने जिस तरह की मदद की वह अमूल्य है।
 
उत्तराखंड दैवीय आपदा सलाहकार समिति के अयक्ष तीरथ सिंह रावत ने मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा कांड में स्थानीय लोगों के सहयोग एवं प्यार की प्रशंसा करते हुए उम्मीद जताई कि यह घटना उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मय प्यार के सेतु के रुप में जानी जाएगी।
 
कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद की अयक्ष ऊषा रावत, आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अयक्ष रविन्द्र जुगरान, भाजपा नेता राजेन्द्र अन्थवाल, पंडित महावीर शर्मा, मुजफ्फरनगर के नगर पालिका अयक्ष कपिल देव अग्रवाल आदि ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर जिलाधिकारी हरिद्वार डी सैन्थिल पाण्डि़यन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार पुष्कर सिंह सलाल, हरिद्वार भाजपा जिलायक्ष सुशील चौहान, जिलायक्ष महिला मोर्चा रेणू गर्ग आदि मौजूद थे।
इससे पहले मुख्यमंत्री श्री खण्डूड़ी एवं गणमान्य लोगों द्वारा उत्तराखंड शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके उसकी परिक्रमा की। 




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